AI: गणित के सवालों में फेल हो रहा है एआई, दिग्गज प्रोफेसर ने चेताया, भरोसा किया तो खा जाएंगे धोखा

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Wed, 07 Jan 2026 09:37 AM IST
सार

यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम के प्रसिद्ध गणितज्ञ और तर्कशास्त्र के प्रोफेसर जोएल डेविड हैमकिन्स ने गणितीय शोध में एआई के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा LLMs अक्सर गणित में गलत जवाब देते हैं और उनका तर्क कमजोर व अविश्वसनीय होता है।

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AI in Mathematics Faces Sharp Criticism: Joel David Hamkins Calls Outputs Garbage Answers and Flawed Reasoning
एआई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

    विस्तार

    यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम के मशहूर गणितज्ञ और तर्कशास्त्र के प्रोफेसर जोएल डेविड हैमकिन्स का मानना है कि आज के एआई सिस्टम गणितीय शोध के लिए भरोसेमंद नहीं हैं। उनका कहना है कि मौजूदा लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) अक्सर गलत जवाब देते हैं और उनका तर्क भी कमजोर होता है।

    'एआई से कोई खास मदद नहीं मिली'

    हाल ही में लेक्स फ्रिडमैन पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान हैमकिन्स ने बताया कि उन्होंने कई महंगे और एडवांस एआई मॉडल आजमाए, लेकिन अनुभव बहुत निराशाजनक रहा। उन्होंने कहा, 'मैंने इन्हें काफी इस्तेमाल किया, लेकिन गणित के काम में ये बिल्कुल मददगार नहीं लगे'।

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    एआई की सबसे बड़ी समस्या: गलती मानने से इनकार

    हैमकिन्स के मुताबिक, एआई की सबसे बड़ी दिक्कत यह नहीं है कि वह गलत होता है, बल्कि यह है कि वह अपनी गलती मानता ही नहीं है। जब वे एआई के तर्क में साफ-साफ गलती दिखाते हैं, तो भी मॉडल कह देता है, 'सब ठीक है' और अपनी बात पर अड़ा रहता है। हैमकिन्स ने इसकी तुलना इंसानों से की और कहा कि अगर कोई इंसान इस तरह व्यवहार करे, तो उससे दोबारा बात करने का मन ही न करे। उनके अनुसार, यही रवैया एआई पर भरोसा करना मुश्किल बना देता है।

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    टेस्ट में पास, लेकिन असल काम में फेल?

    आजकल कुछ लोग दावा करते हैं कि एआई ने कठिन गणितीय समस्याओं में मदद की है। लेकिन कई बड़े गणितज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। नोबेल स्तर के गणितज्ञ टेरेंस ताओ भी चेतावनी दे चुके हैं कि एआई ऐसे प्रमाण बना देता है जो ऊपर से सही लगते हैं। लेकिन अंदर गहरी और गंभीर गलतियां होती हैं, जिन्हें कोई भी इंसानी विशेषज्ञ स्वीकार नहीं करेगा।

    एआई अभी गणित के लिए भरोसेमंद नहीं

    हैमकिन्स का साफ कहना है कि परीक्षाओं या बेंचमार्क में अच्छा प्रदर्शन करने का मतलब यह नहीं कि एआई असली रिसर्च में भी उतना ही उपयोगी होगा। उनके शब्दों में, 'गणितीय तर्क के मामले में एआई अभी भरोसे के लायक नहीं है'। हालांकि वे मानते हैं कि भविष्य में एआई बेहतर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह एक प्रोफेशनल गणितज्ञ के लिए सच्चा 'शोध साथी' बनने से कोसों दूर है।

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