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Koneru Humpy: कौन हैं कोनेरू हम्पी? दूसरी बार जीता विश्व रैपिड शतरंज का खिताब, पिता के सपने को हकीकत में बदला
Sun, 29 Dec 2024 04:22 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: Mayank Tripathi
Updated Sun, 29 Dec 2024 04:22 PM IST
सार
कोनेरू का जन्म 31 मार्च 1987 में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुआ था। उनके पिता अशोक कोनेरू भी शतरंज खिलाड़ी हैं। वह चाहते थे कि उनकी बेटी भी शतरंज खेले और विजेता बनें। यही वजह है कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम भी हम्पी रखा, जिसका अर्थ होता विजयी होता है। अब हम्पी ने विश्व रैपिड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर पिता का सपना पूरा कर दिया।
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कोनेरू हम्पी
- फोटो : Twitter
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विस्तार
भारतीय ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने रविवार को दूसरी बार विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया। उन्होंने इंडोनेशिया की इरीन सुकंदर को हराकर खिताब अपने नाम किया। हम्पी ने इससे पहले 2019 में यह प्रतियोगिता जीती थी। भारत की यह नंबर एक महिला शतरंज खिलाड़ी चीन की जू वेनजुन के बाद एक से ज्यादा बार यह खिताब जीतने वाली दूसरी खिलाड़ी बनीं। वह ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला शतरंज खिलाड़ी हैं।
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कोनेरू हम्पी
- फोटो : Twitter
पिता के सपने को हकीकत में बदला
कोनेरू का जन्म 31 मार्च 1987 में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुआ था। उनके पिता अशोक कोनेरू भी शतरंज खिलाड़ी हैं। वह चाहते थे कि उनकी बेटी भी शतरंज खेले और विजेता बनें। यही वजह है कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम भी हम्पी रखा, जिसका अर्थ होता विजयी होता है। अब हम्पी ने विश्व रैपिड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर पिता का सपना पूरा कर दिया। वर्तमान में हम्पी ओएनजीसी में चीफ मैनेजर हैं और उनके पति अवनेश सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते हैं।
कोनेरू का जन्म 31 मार्च 1987 में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुआ था। उनके पिता अशोक कोनेरू भी शतरंज खिलाड़ी हैं। वह चाहते थे कि उनकी बेटी भी शतरंज खेले और विजेता बनें। यही वजह है कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम भी हम्पी रखा, जिसका अर्थ होता विजयी होता है। अब हम्पी ने विश्व रैपिड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर पिता का सपना पूरा कर दिया। वर्तमान में हम्पी ओएनजीसी में चीफ मैनेजर हैं और उनके पति अवनेश सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते हैं।
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कोनेरू हम्पी
- फोटो : Twitter
छोटी उम्र में जीते स्वर्ण
हम्पी को विश्व विजेता बनाने में उनके पिता अशोक कोनेरू का अहम योगदान रहा। बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी और हम्पी को शतरंज के गुर सिखाने लगे थे। छह वर्ष की उम्र से ही हम्पी ने खेल में रुचि लेना शुरु कर दिया था। पिता की मेहनत और अपने हुनर की बदौलत हम्पी ने सिर्फ नौ वर्ष की उम्र में शतरंज में तीन राष्ट्रीय स्तर के स्वर्ण मेडल अपने नाम कर लिए थे।
हम्पी को विश्व विजेता बनाने में उनके पिता अशोक कोनेरू का अहम योगदान रहा। बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी और हम्पी को शतरंज के गुर सिखाने लगे थे। छह वर्ष की उम्र से ही हम्पी ने खेल में रुचि लेना शुरु कर दिया था। पिता की मेहनत और अपने हुनर की बदौलत हम्पी ने सिर्फ नौ वर्ष की उम्र में शतरंज में तीन राष्ट्रीय स्तर के स्वर्ण मेडल अपने नाम कर लिए थे।
कोनेरू हम्पी
- फोटो : Twitter
खिताब जीतने पर जताई खुशी
हम्पी ने दूसरी बार विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद कहा, मैं बहुत उत्साहित हूं और मुझे बहुत खुशी है। वास्तव में मुझे उम्मीद थी कि यह बहुत कठिन दिन होगा, किसी तरह के टाई- ब्रेक की तरह। लेकिन जब मैंने खेल खत्म किया तो मुझे तभी पता चला जब मध्यस्थ ने मुझे बताया और यह मेरे लिए एक तनावपूर्ण क्षण था। इसलिए यह काफी अप्रत्याशित है क्योंकि पूरे साल मैं काफी संघर्ष करती रही हूं और मेरे टूर्नामेंट बहुत खराब रहे हैं, जहां मैं अंतिम स्थान पर रही हूं। इसलिए यह मेरे लिए आश्चर्य की बात है।
हम्पी ने दूसरी बार विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद कहा, मैं बहुत उत्साहित हूं और मुझे बहुत खुशी है। वास्तव में मुझे उम्मीद थी कि यह बहुत कठिन दिन होगा, किसी तरह के टाई- ब्रेक की तरह। लेकिन जब मैंने खेल खत्म किया तो मुझे तभी पता चला जब मध्यस्थ ने मुझे बताया और यह मेरे लिए एक तनावपूर्ण क्षण था। इसलिए यह काफी अप्रत्याशित है क्योंकि पूरे साल मैं काफी संघर्ष करती रही हूं और मेरे टूर्नामेंट बहुत खराब रहे हैं, जहां मैं अंतिम स्थान पर रही हूं। इसलिए यह मेरे लिए आश्चर्य की बात है।