Rohan Bopanna: कभी संन्यास के बारे में सोच रहे थे रोहन बोपन्ना, अब 43 की उम्र में जीता ग्रैंडस्लैम; देखें सफर
बोपन्ना ओपन एरा में ग्रैंड स्लैम जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। वह 43 साल और 329 दिन की आयु में चैंपियन बने हैं। यह उनके करियर का दूसरा ग्रैंडस्लैम खिताब है।
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बोपन्ना ने उस भावुक पल को याद किया जब उन्होंने अपनी पत्नी सुप्रिया अन्नैया से कहा था कि वह अब टेनिस खेलना जारी नहीं रखना चाहते। शनिवार को बोपन्ना को ओपन युग में ग्रैंड स्लैम जीतने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति बनते देखने के लिए उनकी पत्नी और उनकी बेटी त्रिधा स्टेडियम में मौजूद थीं।
मैच के बाद बोपन्ना ने कहा “यह सबसे बड़ी उपलब्धि है और इसमें कोई सवाल नहीं है। दो साल पहले, मैंने उसे (पत्नी सुप्रिया) एक वीडियो भेजा था, जिसमें कहा था कि मैं टेनिस बंद करना चाहता हूं, क्योंकि मैं वास्तव में मैच नहीं जीत रहा हूं। अब आज, नंबर एक स्थान पर रहते हुए, जीत हासिल करना, यह जादुई है। देश से इतना अद्भुत समर्थन मिल रहा है।”
Look what it means to @rohanbopanna and @mattebden 😍
At 43, Bopanna has his FIRST Men's Doubles Grand Slam title - and becomes the oldest to do so in the Open Era 👏👏#AusOpen pic.twitter.com/qs0JlrkMO7— #AusOpen (@AustralianOpen) January 27, 2024
बोपन्ना ने 2024 में शानदार प्रदर्शन किया। इस सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने अपने पेशेवर करियर में 500वीं जीत हासिल की। इस जीत के साथ वह 43 साल की उम्र में दुनिया के सबसे उम्रदराज शीर्ष खिलाड़ी बने थे। पद्म श्री जीतने के बाद बोपन्ना की खुशी दोगुनी हो गई जिसके बाद वह मेलबर्न पार्क में शीर्ष पर रहे। बोपन्ना ने कहा “बहुत सारी चीजें हुई हैं। 500वीं जीत से शुरुआत करना, नंबर 1 पर पहुंचना, पद्मश्री जीतना और अब... यही सपना है। इससे बेहतर कुछ नहीं, यह खूबसूरत है।''
बोपन्ना ने उभरते टेनिस खिलाड़ियों के लिए एक कड़ा संदेश दिया और उनसे कहा कि चाहे वर्तमान कितना भी निराशाजनक क्यों न हो, कभी हार न मानें। उन्होंने युवाओं से सफलता प्राप्त करने के लिए समय की सीमाओं से मुक्त होने को कहा। वह बोले “कभी भी जल्दी मत करो। मेरा मतलब है कि कोई समय सीमा नहीं है। हमने वे सीमाएं स्वयं निर्धारित की हैं। आज, हम अभी भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं या वही कर रहे हैं जो हम हैं, जो हमें पसंद है। जब तक आप जो करते हैं उससे प्यार करते हैं और आप वास्तव में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, यही मायने रखता है। बोपन्ना ने कहा, मेरे लिए सबसे बड़ा संदेश यह है कि कभी हार न मानें और कभी भी खुद पर संदेह न करें।"
2017 में बोपन्ना ने पहली बार ग्रैंड स्लैम जीता था। उन्होंने फिलिप चैटरियर में रॉबर्ट फराह और अन्ना-लेना ग्रोनफेल्ड को 2-6, 6-2, 12-10 से हराकर गैब्रिएला डाब्रोव्स्की के साथ मिश्रित युगल खिताब जीता। पिछले साल मिश्रित युगल में सानिया मिर्जा के साथ जोड़ी बनाते हुए वह मेलबर्न पार्क में उपविजेता रहे थे। लेकिन मेलबर्न पार्क में पुरुष युगल में बोपन्ना को कोई रोक नहीं सका, क्योंकि उन्होंने अपने जबरदस्त खेल से भारतीय टेनिस को इतिहास का हिस्सा बनने में मदद की।