दिल्ली कोर्ट का अंतरराष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा पर FIR दर्ज करने का आदेश
दिल्ली की एक अदालत ने एक घर खरीदार की शिकायत पर एक बिल्डर कंपनी, उसके अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
गुरुग्राम निवासी भावना अग्रवाल का आरोप है कि होम्सटेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रा. लि. ने सेक्टर 73 में ‘ऐस बाई शारापोवा’ नाम के रिहायशी प्रोजेक्ट में एक फ्लैट के एवज में उनसे वर्ष 2013 में 53 लाख रुपये जमा करवाए थे। बिल्डर की ओर से कहा गया था कि शारापोवा खुद टेनिस एकेडमी चलाएंगी। बिल्डर कंपनी का दावा था कि प्रोजेक्ट पहली किस्त जमा कराने के तीन साल में पूरा हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पढ़ेंः- यूएस ओपन: मारिया शारापोवा 15 महीने बाद कोर्ट में उतरी और यह कमाल कर दिया
भावना ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए धोखाधड़ी, जालसाजी और अमानत में खयानत के आरोप में एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की मांग की थी। उनके वकील पीयूष सिंह ने अदालत से कहा, ‘कंपनी की ओर से गुरुग्राम के सेक्टर 73 में इस प्रोजेक्ट के लिए कई अखबारों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में विज्ञापन दिया गया था।
विज्ञापन और कंपनी की वेबसाइट पर दावा किया गया कि इस प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा की एकेडमी होगी। वह जब भी भारत का दौरा करेंगी तो यहां निजी प्रशिक्षण सत्र चलाएंगी। बिल्डर कंपनी की ओर से प्रोजेक्ट तीन साल में पूरा हो जाने का भी दावा किया गया। इसके बाद उनके मुव्वकिल ने 53.03 लाख रुपये देकर प्रोजेक्ट में बुकिंग करा ली।
वकील का कहना था कि कंपनी के पास न तो जरूरी लाइसेंस था और न ही प्रोजेक्ट शुरू करने की मंजूरी। इसलिए उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई को इस प्रोजेक्ट में निवेश कराकर उनके साथ धोखाधड़ी की गई है।
इस पर अदालत ने कहा, ‘शिकायतकर्ता का कहना है कि शारापोवा को देखने के बाद ही उन्होंने इस प्रोजेक्ट में फ्लैट लेने में दिलचस्पी दिखाई। कंपनी के विज्ञापनों में भी प्रस्तावित टेनिस एकेडमी की जिक्र है। अगर शिकायतकर्ता के दावों पर यकीन करें तो प्रस्तावित साइट पर कुछ भी नहीं हुआ है। आरोपी कंपनी के पास लाइसेंस अथवा निर्माण के लिए जरूरी मंजूरी भी नहीं है। सही तथ्यों का पता लगाने के लिए इस मामले की पुलिस जांच जरूरी है।’
चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने पुलिस को आदेश देते हुए कहा, ‘अगर आरोपी कंपनी के पास लाइसेंस अथवा रिहायशी इमारत बनाने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं है और उसने 5200 वर्ग फीट जगह के लिए शिकायतकर्ता से 53.3 लाख रुपये लिए हैं तो यह आपराधिक मामला है। इसलिए पुलिस का तथ्यों की जांच करना आवश्यक है। अदालत संबंधित एसएचओ को मामले से जुड़ी धाराओं में एफआईआर दर्ज करने और सभी कोणों से जांच करने का आदेश देती है।’