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खेल मंत्रालय को खेल संघों की मान्यता पर फैसला लेने के लिए कोर्ट की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट

Fri, 18 Sep 2020 07:30 AM IST
Kuldeep Singh स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 18 Sep 2020 07:30 AM IST
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Sports Ministry does not need courts permission to decide on recognition of sports associations: Supreme Court said
खेल मंत्रालय

राष्ट्रीय खेल संघों को प्रतिबंधित किए जाने के मामले में बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से खेल मंत्रालय को थोड़ी राहत मिल गई है। खेल मंत्रालय की ओर से अदालत में दाखिल की गई स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) की सुनवाई में फैसला सुनाया गया कि मंत्रालय को खेल संघों पर कोई भी फैसला लेने से पहले हाईकोर्ट से अनुमति मांगने की जरूरत नहीं है।

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खेल संघों की मान्यता बहाली की उम्मीद जगी
अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट में खेल संघों का मामला 2010 से लंबित है। उसने हाईकोर्ट को इसे जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद अब खेल मंत्रालय खेल संघों की मान्यता पर फैसला ले सकता है। इसके बारे में उसे सिर्फ हाईकोर्ट को बताना होगा। 
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा खेल मंत्रालय को खेल संघों की मान्यता पर फैसला लेने को अदालत की अनुमति की जरूरत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि अगर याचिकाकर्ता को खेल मंत्रालय की ओर से खेल संघों की मान्यता पर लिए गए फैसले पर कोई एतराज है तो इसे वह चुनौती दे सकते हैं। अदालत के इस फैसले के बाद अब खेल मंत्रालय प्रतिबंधित किए गए 57 खेल संघों की मान्यता बहाल कर सकता है। हालांकि वह खेल संघों की मान्यता के बारे में हाईकोर्ट को दो मई को ही बता चुका है, लेकिन उसकी ओर से एक बार अदालत को यह सूचना दी जा सकती है।
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वहीं याचिकाकर्ता राहुल मेहरा सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अपने पक्ष में बताते हैं। मेहरा मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने वापस इस मामले को हाईकोर्ट के पास भेज दिया है। फिर उन्होंने सभी 57 खेल संघों को स्पोट्र्स कोड पर खरा नहीं बताया है। इसका जवाब भी मंत्रालय ने हाईकोर्ट में दाखिल नहीं किया है।

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