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Sakshi Padekar: मां-बाप के त्याग से निशानेबाज बनीं साक्षी, दूसरा विश्वकप खेलने गईं चीन; कैसे बनाई टीम में जगह?

Mon, 20 Jul 2026 02:05 PM IST
शिवम गर्ग हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 20 Jul 2026 02:05 PM IST
सार

चौकीदार पिता और वेल्डिंग करने वाली मां की बेटी साक्षी पाडेकर ने संघर्षों से निकलकर भारतीय शूटिंग टीम में जगह बनाई। चीन में दूसरा सीनियर विश्वकप खेलने पहुंचीं साक्षी ने अपनी कहानी साझा की।

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Sakshi Padekar Journey From Struggles To Indian Shooting Team After Parents Sacrifice
साक्षी पाडेकर - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

बचपन के संघर्ष की बात छिड़ते ही निशानेबाज साक्षी पाडेकर तपाक से बोलती हैं, मुझे कोई सहानुभूति नहीं चाहिए। बावजूद इसके मैं अपनी कहानी देश के हर युवा को इसलिए बताना चाहती हूं कि अगर मैं कर सकती हूं तो हर कोई कर सकता है।

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सीनियर स्तर पर दूसरा विश्वकप खेलने चीन गईं साक्षी गर्व से बताती हैं कि मैं चौकीदार पिता की बेटी हूं। मैं भारतीय टीम में हूं, पर मेरे पापा आज भी चौकीदारी करते हैं। मां गृहणी हैं, लेकिन वह भी कुछ समय पहले तक सात हजार रुपये प्रतिमाह पर वेल्डिंग का काम करती थीं। इस दौरान उनकी अंगुलियां जख्मी हो गई, जिसके चलते उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।

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मैं ही हूं पिता का बैंक बैलेंस
22 वर्षीय साक्षी कहती हैं कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, लेकिन माता-पिता हमेशा मेरे सपनों के साथ खड़े रहे। साक्षी भावुक होकर कहती हैं कि परिवार के पास जीरो बैंक बैलेंस है, लेकिन मेरे पिता से अगर आप पूछेंगे तो वह यही कहेंगे मेरा बैंक बैलेंस मेरे तीन बच्चे (दो बहनें, एक भाई) हैं। साक्षी कहती हैं कि अगर ऐसे मां-बाप हर घर में हों तो देश में ओलंपिक के पदकों की संख्या बढ़ जाएगी।

कई खेलों की राष्ट्रीय खिलाड़ी रही हैं साक्षी
साक्षी मार्शल आर्ट थांग्टा और अशटेडू अखाड़ा की राष्ट्रीय खिलाड़ी रही हैं। अशटेडू अखाड़ा में लगातार दो राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण जीते। वह जूडो, बेसबाल, सॉफ्टवाल की भी खिलाड़ी रहीं, लेकिन एनसीसी में उन्होंने 22 की राइफल पकड़ी तो उन्हें इसमें आनंद आया। उन्होंने 2021 में शूटिंग शुरू की और इस वर्ष सीनियर भारतीय टीम में जगह बना ली।

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