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Lakshya Sen: पहला मैच हुआ रद्द फिर भी नहीं मानी हार, अब सेमीफाइनल में पहुंचकर जगाई ओलंपिक में पदक की उम्मीद
Fri, 02 Aug 2024 11:26 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: Mayank Tripathi
Updated Fri, 02 Aug 2024 11:26 PM IST
सार
पेरिस ओलंपिक में लक्ष्य ने शुरुआत जीत के साथ की थी। हालांकि, उनकी पहली दौर की जीत अमान्य घोषित कर दी गई थी। शनिवार को खेले गए पुरुष एकल बैडमिंटन प्रतियोगिता में ग्वाटेमाला के केविन कॉर्डन के खिलाफ जीत हासिल की थी, लेकिन कोहनी की चोट के कारण कॉर्डन ने अपना नाम वापस ले लिया था।
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लक्ष्य सेन
- फोटो : PTI
विस्तार
भारत के युवा शटलर लक्ष्य सेन शु्क्रवार को पुरुष एकल सेमीफाइनल में पहुंच गए। ओलंपिक के इतिहास में वह बैडमिंटन में पुरुष सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। उन्होंने ताइवान के चू टिन चेन को 19-21, 21-15, 21-12 से हराया। अब वह पदक की जंग लेंगे।
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लक्ष्य सेन
- फोटो : Social Media
पेरिस ओलंपिक में लक्ष्य ने शुरुआत जीत के साथ की थी। हालांकि, उनकी पहली दौर की जीत अमान्य घोषित कर दी गई थी। शनिवार को खेले गए पुरुष एकल बैडमिंटन प्रतियोगिता में ग्वाटेमाला के केविन कॉर्डन के खिलाफ जीत हासिल की थी। लेकिन कोहनी की चोट के कारण कॉर्डन ने अपना नाम वापस ले लिया था। इस तरह ग्रुप एल में केवलत तीन खिलाड़ी बचे थे जिसमें सेन के अलावा क्रिस्टी और कैरागी शामिल थे।
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लक्ष्य सेन
- फोटो : PTI
शुक्रवार को चू टिन चेन के खिलाफ जीत से पहले पुरुष एकल के प्री क्वार्टर फाइनल में लक्ष्य सेन का सामना एचएस प्रणय से हुआ था। गुरुवार को खेले गए मुकाबले में विश्व रैंकिंग 19 लक्ष्य ने 13वें रैंक के प्रणय को हरा दिया। इसी के साथ प्रणय का सफर पेरिस ओलंपिक में समाप्त हो गया था। इससे पहले दुनिया के चौथे नंबर के खिलाड़ी इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी को सीधे गेमों में 21-18, 21-12 से मात दी थी।
लक्ष्य सेन
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उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्म लेने वाले लक्ष्य ने आठ साल की उम्र में अपने पिता डीके सेन (बैडमिंटन कोच) के मार्गदर्शन में खेलना शुरू किया था। उनके परिवार ने उनके हुनर को पहचाना और उन्हें बेंगलुरु में प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में दाखिला दिलाया, जहां उन्होंने प्रसिद्ध कोच विमल कुमार और प्रकाश पादुकोण से खेल के गुर सीखे।
लक्ष्य सेन
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लक्ष्य की प्रतिस्पर्धी भावना शुरू से ही स्पष्ट थी। 2016 में उन्होंने एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और 2017 में विश्व जूनियर रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचे। 2018 में भी उन्होंने एशियाई जूनियर चैंपियनशिप और समर यूथ ओलंपिक में रजत पदक जीता था।
लक्ष्य सेन
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2019 में डच ओपन और सारलोरलक्स ओपन सहित कई खिताबों के साथ वह नए कीर्तिमान स्थापित करते रहे। 2021 में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक के साथ-साथ 2022 में भारत की ऐतिहासिक थॉमस कप जीत में योगदान दिया।