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Paris Olympics: भारत ने हॉकी में जीते हैं सर्वाधिक पदक, टेनिस में अच्छा नहीं रहा है प्रदर्शन, जानें आंकड़े
Mon, 08 Jul 2024 01:28 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 08 Jul 2024 01:28 PM IST
सार
लंबे अरसे बाद टोक्यो 2020 में पदक का सूखा समाप्त करने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम की नजरें अब स्वर्ण पदक पर रहेंगी। भारत ने 1980 में मॉस्को ओलंपिक के बाद से इन खेलों में अब तक स्वर्ण नहीं जीता है।
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पेरिस ओलंपिक 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पेरिस ओलंपिक का काउंडटाउन शुरू हो चुका है और भारतीय दल इसके लिए पूरी तरह है। भारत को इस बार उम्मीद है कि पेरिस में खिलाड़ी अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करेंगे। वहीं, लंबे अरसे बाद टोक्यो 2020 में पदक का सूखा समाप्त करने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम की नजरें अब स्वर्ण पदक पर रहेंगी। भारत ने 1980 में मॉस्को ओलंपिक के बाद से इन खेलों में अब तक स्वर्ण नहीं जीता है। भारत अब तक हॉकी में कुल 12 पदक जीत चुका है जिसमे आठ स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं।
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भारत ने 41 साल का सूखा किया था समाप्त
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने इस तरह ओलंपिक खेलों में 41 साल का पदक का सूखा समाप्त किया था। यह 1980 में मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उसका पहला पोडियम फिनिश था। यह भारत का हॉकी में तीसरा कांस्य पदक भी था। इस बार पुरुष टीम की कोशिश पदक का रंग बदलने पर रहेगी। टीम से ज्यादा उम्मीद इसलिए भी होगी क्योंकि महिला हॉकी टीम पेरिस खेलों के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी है।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने इस तरह ओलंपिक खेलों में 41 साल का पदक का सूखा समाप्त किया था। यह 1980 में मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उसका पहला पोडियम फिनिश था। यह भारत का हॉकी में तीसरा कांस्य पदक भी था। इस बार पुरुष टीम की कोशिश पदक का रंग बदलने पर रहेगी। टीम से ज्यादा उम्मीद इसलिए भी होगी क्योंकि महिला हॉकी टीम पेरिस खेलों के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी है।
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भारत को इस बार एथलेटिक्स से भी काफी उम्मीदें है जिसमे पिछली बार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण पदक जीता था। 121 साल में पहली बार भारत को ट्रैक एंड फील्ड में स्वर्ण पदक हासिल हुआ था। टोक्यो ओलंपिक में भारत ने भारोत्तोलन, बैडमिंटन, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती और एथलेटिक्स में पदक अपने नाम किए थे। दिलचस्प बात यह है कि भारत का ओलंपिक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हॉकी में रहा है और देश ने सबसे ज्यादा पदक इसी खेल में जीते हैं। आइए जानते हैं किन खेलों में अब तक भारत को कितने पदक मिले हैं...
किस खेल में कितने पदक जीते?
| खेल | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल |
| एथलेटिक्स | 1 | 2 | 0 | 3 |
| बैडमिंटन | 0 | 1 | 2 | 3 |
| मुक्केबाजी | 0 | 0 | 3 | 3 |
| हॉकी | 8 | 1 | 3 | 12 |
| निशानेबाजी | 1 | 2 | 1 | 4 |
| टेनिस | 0 | 0 | 1 | 1 |
| भारोत्तोलन | 0 | 1 | 1 | 2 |
| कुश्ती | 0 | 2 | 5 | 7 |
| कुल | 10 | 9 | 16 | 35 |
हॉकी में भारत ने कब-कब जीते पदक
भारत के लिए हॉकी में स्वर्णिम युग की शुरुआत 1928 में एम्स्टर्डम ओलंपिक से हुई थी। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने दिग्गज खिलाड़ी ध्यान चंद के नेतृत्व में 29 गोल किए और एक भी गोल खाए बिना अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद टीम ने 1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीता था और अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया था। भारत ने फिर 1936 बर्लिन ओलंपिक में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्णिम हैट्रिक लगाई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के चलते 1940 और 1944 में ओलंपिक खेलों का आयोजन नहीं किया गया था और फिर 1948 में लंदन ओलंपिक से भारत ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने पहले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया। भारत ने यहां भी अपनी छाप छोड़ी और हॉकी में लगातार चौथा स्वर्ण जीता। इसके बाद 1952 और 1956 में भी टीम स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही थी। भारत ने इस तरह लगातार छह ओलंपिक में हॉकी में स्वर्ण पदक जीते थे।
भारत के लिए हॉकी में स्वर्णिम युग की शुरुआत 1928 में एम्स्टर्डम ओलंपिक से हुई थी। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने दिग्गज खिलाड़ी ध्यान चंद के नेतृत्व में 29 गोल किए और एक भी गोल खाए बिना अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद टीम ने 1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीता था और अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया था। भारत ने फिर 1936 बर्लिन ओलंपिक में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्णिम हैट्रिक लगाई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के चलते 1940 और 1944 में ओलंपिक खेलों का आयोजन नहीं किया गया था और फिर 1948 में लंदन ओलंपिक से भारत ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने पहले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया। भारत ने यहां भी अपनी छाप छोड़ी और हॉकी में लगातार चौथा स्वर्ण जीता। इसके बाद 1952 और 1956 में भी टीम स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही थी। भारत ने इस तरह लगातार छह ओलंपिक में हॉकी में स्वर्ण पदक जीते थे।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम 1960 रोम ओलंपिक में पाकिस्तान से फाइनल में 0-1 से हार गई थी और इस तरह उसका स्वर्ण पदक जीतने का सिलसिला टूट गया था। भारत ने उस वक्त रजत पदक हासिल किया था। हालांकि, चार साल बाद फिर 1964 में टोक्यो ओलंपिक में भारत ने स्वर्ण पदक जीता। इस बार टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को मात दी और पुरानी हार का बदला चुकता किया। 1968 में मेक्सिको सिटी में हुए ओलंपिक में पुरुष हॉकी टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और उसे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, टीम ने वेस्ट जर्मनी को हराकर कांस्य पदक जीता। 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में भी टीम को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था। उस समय सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को हराया था, लेकिन भारतीय टीम ने नीदरलैंड को हराकर ओलंपिक में दूसरा कांस्य पदक जीता था। 1980 मॉस्को ओलंपिक में पुरुष हॉकी टीम ने फिर अपना दबदबा बनाया और स्पेन को हराकर आठवीं बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। भारतीय पुरुष हॉकी टीम का दबदबा इसके बाद लंबे समय तक गायब रहा और टीम टोक्यो 2020 से पहले तक कोई पदक नहीं जीत सकी थी। हालांकि, भारत ने टोक्यो में 41 साल का पदक का सूखा समाप्त किया, लेकिन ओलंपिक में 44 साल से हॉकी में भारत स्वर्ण नहीं जीत सका है।
टेनिस में आया है सिर्फ एक पदक
भारत ने 1924 के पेरिस ओलंपिक में टेनिस में अपना डेब्यू किया था। चार पुरुष और एक महिला खिलाड़ियों ने सिंगल्स वर्ग में हिस्सा लिया। पुरुष डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में दो जोड़ियों ने हिस्सा लिया। हालांकि, इस खेल में भारत का प्रदर्शन ओलंपिक में बेहतर नहीं रहा है और देश ने अब तक सिर्फ एक पदक जीता है। भारत को 1996 में एटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस ने कांस्य पदक दिलाया था जो ओलंपिक में टेनिस में भारत का एकमात्र पदक है। पेस ने उस वक्त फर्नांडो मेलिगेनी को हराकर पोडियम फिनिश किया था।
भारत ने 1924 के पेरिस ओलंपिक में टेनिस में अपना डेब्यू किया था। चार पुरुष और एक महिला खिलाड़ियों ने सिंगल्स वर्ग में हिस्सा लिया। पुरुष डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में दो जोड़ियों ने हिस्सा लिया। हालांकि, इस खेल में भारत का प्रदर्शन ओलंपिक में बेहतर नहीं रहा है और देश ने अब तक सिर्फ एक पदक जीता है। भारत को 1996 में एटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस ने कांस्य पदक दिलाया था जो ओलंपिक में टेनिस में भारत का एकमात्र पदक है। पेस ने उस वक्त फर्नांडो मेलिगेनी को हराकर पोडियम फिनिश किया था।