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Mark Magsayo: संघर्ष भरी है फिलीपींस के पेशेवर बॉक्सर मार्क मैगसायो की कहानी, फेदरवेट चैंपियन को अगला मैनी पैक्कीयाओ बोला जा रहा है
Wed, 06 Jul 2022 10:42 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 06 Jul 2022 10:42 PM IST
सार
मैगसायो का बचपन और बेहद संघर्ष में बीता। 2003 में जब वह आठ साल के थे तो उन्होंने बॉक्सिंग को अपनाया, लेकिन उस दौरान उन्हें खाने के लाले थे। दो वक्त की रोटी के लिए उन्होंने फिलीपींस में सड़कों पर आईसक्रीम बेची।
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मार्क
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
फिलीपींस के पेशेवर बॉक्सर और वल्र्ड बॉक्सिंग काउंसिल (डब्लूबीसी) में फेदरवेट विश्व चैंपियन मार्क मैगसायो को दुनिया भर में अगला मैनी पैक्कियाओ (फिलीपींस के महान पेशेवर मुक्केबाज) बुलाया जा रहा है। पेशेवर बॉक्सिंग की दुनिया में उन्होंने अब तक 24 बाउट लड़ी हैं और सभी में जीत हासिल की है, जिसमें 16 नॉक आउट जीत शामिल हैं।
मैगसायो का बचपन और बेहद संघर्ष में बीता। 2003 में जब वह आठ साल के थे तो उन्होंने बॉक्सिंग को अपनाया, लेकिन उस दौरान उन्हें खाने के लाले थे। दो वक्त की रोटी के लिए उन्होंने फिलीपींस में सड़कों पर आईसक्रीम बेची। 10 साल की उम्र में वह आईसक्रीम भी बेचते थे और बॉक्सिंग भी करते थे।
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मैगसायो का बचपन और बेहद संघर्ष में बीता। 2003 में जब वह आठ साल के थे तो उन्होंने बॉक्सिंग को अपनाया, लेकिन उस दौरान उन्हें खाने के लाले थे। दो वक्त की रोटी के लिए उन्होंने फिलीपींस में सड़कों पर आईसक्रीम बेची। 10 साल की उम्र में वह आईसक्रीम भी बेचते थे और बॉक्सिंग भी करते थे।
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मार्क
- फोटो : सोशल मीडिया
तीन हार के बाद पिता ने बॉक्सिंग करने से किया मना
बावजूद इसके मैगसायो ने हार नहीं मानी। वह स्कूल भी जाते थे, लेकिन स्कूल जाने से पहले सुबह जमकर दौड़ लगाते थे और स्कूल से आने के बाद ट्रेनिंग में जुट जाते थे। उसके बाद फिर आईसक्रीम बेचने का सिलसिला शुरू हो जाता था।
उन्होंने एक ब्रिटिश अखबार को बताया उनका बचपन बेहद गरीबी में पला, क्यों कि उनका परिवार बेहद गरीब था। उन्होंने उस दौरान अपने परिवार का दो वक्त का खाना पूरा करने के लिए फिलीपींस के शहर तागबिलारान की सड़कों पर आईसक्रीम बेचकर आर्थिक सहायता की।
बावजूद इसके मैगसायो ने हार नहीं मानी। वह स्कूल भी जाते थे, लेकिन स्कूल जाने से पहले सुबह जमकर दौड़ लगाते थे और स्कूल से आने के बाद ट्रेनिंग में जुट जाते थे। उसके बाद फिर आईसक्रीम बेचने का सिलसिला शुरू हो जाता था।
उन्होंने एक ब्रिटिश अखबार को बताया उनका बचपन बेहद गरीबी में पला, क्यों कि उनका परिवार बेहद गरीब था। उन्होंने उस दौरान अपने परिवार का दो वक्त का खाना पूरा करने के लिए फिलीपींस के शहर तागबिलारान की सड़कों पर आईसक्रीम बेचकर आर्थिक सहायता की।
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मार्क
- फोटो : सोशल मीडिया
यही उनका बचपन है। पहली तीन बाउट हारने के बाद जब पिता ने उन्हें बॉक्सिंग करने से मना किया तो उन्होंने मन में ठाना वह और मेहनत करेंगे, क्यों कि वह अभी बच्चे ही थे। यह मेहनत रंग लाई और अगली बाउट उन्होंने जीत ली।
मार्क
- फोटो : सोशल मीडिया
पैक्कियाओ के कोच रोश दे रहे हैं ट्रेनिंग
2013 में पेशेवर बनने से पहले उन्होंने शौकिया मुक्केबाजी में 200 बाउट जीतीं। 2015 में वह अमेरिका आए। इन दो सालों में उन्होंने पेशेवर बॉक्सिंग की 11 बाउट जीतीं, लेकिन पांच साल बाद 2020 में मैगसायो की जिंदगी एकदम से बदल गई। उन्हें पेशेवर मुक्केबाज के महान कोच हॉल ऑफ फेम में शामिल फ्रेडी रोश का साथ मिल गया।
ये वही रोश हैं जिन्होंने पैक्कियाओ को आम मुक्केबाज से महान पेशेवर बॉक्सर बनाया। पैक्कियाओ ही मैगसायो के रोल मॉडल रहे। वह बचपन में उनकी बाउट देखकर बड़े हुए। मैगसायो बताते हैं कि रोश के पास आने से पहले उन्हें लगता था कि वह बॉक्सिंग केबारे में सब कुछ जानते हैं, लेकिन वह गलत थे।
2013 में पेशेवर बनने से पहले उन्होंने शौकिया मुक्केबाजी में 200 बाउट जीतीं। 2015 में वह अमेरिका आए। इन दो सालों में उन्होंने पेशेवर बॉक्सिंग की 11 बाउट जीतीं, लेकिन पांच साल बाद 2020 में मैगसायो की जिंदगी एकदम से बदल गई। उन्हें पेशेवर मुक्केबाज के महान कोच हॉल ऑफ फेम में शामिल फ्रेडी रोश का साथ मिल गया।
ये वही रोश हैं जिन्होंने पैक्कियाओ को आम मुक्केबाज से महान पेशेवर बॉक्सर बनाया। पैक्कियाओ ही मैगसायो के रोल मॉडल रहे। वह बचपन में उनकी बाउट देखकर बड़े हुए। मैगसायो बताते हैं कि रोश के पास आने से पहले उन्हें लगता था कि वह बॉक्सिंग केबारे में सब कुछ जानते हैं, लेकिन वह गलत थे।
मार्क और उनकी पत्नी
- फोटो : सोशल मीडिया
रोश ने उन्हें कई नई तकनीकि सिखाई। उन्होंने स्टाइल को ही बदल दिया। रोश की अगुवाई में पैक्कियाओ आज मैगसायो केसलाहकार और मेंटर बन गए हैं। जब पहली बार पैक्कियाओ और युवा मुक्केबाज की मुलाकात फिलीपींस में हुई तो उन्होंने मैगसायो से यही कहा कि रोजाना कड़ी मेहनत करो और हमेशा अनुशासित रहो।
पत्नी फ्रांसेस संभालती हैं सारा काम
मैगसायो अपनी सफलता के पीछे अपनी पत्नी फ्रांसेस का भी हाथ मानते हैं। यह उनकी पत्नी हैं जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती हैं। वह बतौर मैनेजर काम करती हैं और मैगसायो की हर पेशेवर बाउट के आयोजन का जिम्मा वह संभालती हैं। मैगसायो इस साल जनवरी में गैरी रसेल जूनियर को हराकर फेदरवेट में विश्व चैंपियन बने हैं। वह पहली बार इसी सप्ताह अपने खिताब की रक्षा करने जा रहे हैं। उनके सामने मैक्सिकन वर्गास होंगे।
पत्नी फ्रांसेस संभालती हैं सारा काम
मैगसायो अपनी सफलता के पीछे अपनी पत्नी फ्रांसेस का भी हाथ मानते हैं। यह उनकी पत्नी हैं जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती हैं। वह बतौर मैनेजर काम करती हैं और मैगसायो की हर पेशेवर बाउट के आयोजन का जिम्मा वह संभालती हैं। मैगसायो इस साल जनवरी में गैरी रसेल जूनियर को हराकर फेदरवेट में विश्व चैंपियन बने हैं। वह पहली बार इसी सप्ताह अपने खिताब की रक्षा करने जा रहे हैं। उनके सामने मैक्सिकन वर्गास होंगे।