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कमलजीत की कहानी: पिता ने कहा था- ईश्वर ने मौका दिया है, शांति से खेलना; एशियाड में दिलाया सोना
सार
कमलजीत एक अंक से व्यक्तिगत फाइनल से चूकने के बाद पिता रतीराम को फोन कर रो पड़े थे। मिश्रित टीम में खेलने का मौका मिलने पर पिता ने उन्हें शांति से खेलने की सलाह दी। बुखार से जूझ रहीं सुरुचि के साथ कमलजीत ने शानदार प्रदर्शन किया और भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
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कमलजीत और सुरुचि
- फोटो : IANS
विस्तार
एक दिन पहले ही कमलजीत पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। वह महज एक अंक से 10 मीटर एयर पिस्टल के व्यक्तिगत मुकाबलों के फाइनल में जगह बनाने से रह गए थे। कमलजीत को कुछ नहीं सूझ रहा था और उन्होंने पिता रतीराम को फोन मिलाया और रोने लगे।
कमलजीत के लिए यह दुख तीन साल पहले घटी उस मुसीबत से भी बड़ा था जब सड़क दुर्घटना में उनकी जांघ की हड्डी टूट गई थी। 10 मीटर एयर पिस्टल की टीम और व्यक्तिगत इवेंट में शामिल उस वक्त तक कमलजीत के लिए एशियाई खेल खत्म हो चुके थे। इन दोनों ही इवेंट में भारत का कोई पदक नहीं आया था, लेकिन थोड़ी देर जब उन्हें बताया गया कि केदारलिंग की जगह मिश्रित टीम स्पर्धा में वह सुरुचि के साथ खेलेंगे। फिर क्या था कमलजीत ने फिर पिता को फोन मिलाया और बताया कि वह शुक्रवार को सुरुचि के साथ खेलने जा रहे हैं। रतीराम ने बेटे से कहा, भगवान ने बड़ा मौका दिया है, शांति से खेलना और फिर उन्होंने सोना जीत लिया।
बुखार से उबरकर सुरुचि ने जीता सोना
कमलजीत की तरह सुरुचि सिंह के लिए भी 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित स्पर्धा का स्वर्ण बड़ी राहत से कम नहीं है। व्यक्तिगत मुकाबलों में पदक की दावेदार सुरुचि ने ऐसा प्रदर्शन किया था जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। पिता इंदर सिंह और भाई निशांत ने उनसे पूछा कि क्या हो गया था तो उन्होंने बताया कि बुधवार की रात उन्हें बुखार था और वह रात भर नहीं सो पाई। मैच के दौरान भी उनका शरीर टूट रहा था। शुक्रवार की सुबह घरवालों ने जब सुरुचि से बात की तो उन्होंने कहा बुखार ठीक है, अब आप लोग चिंता नहीं करो मैं कमलजीत के साथ अपना श्रेष्ठ करके आउंगी। विश्वकप में पांच स्वर्ण जीत चुकीं सुरुचि ने ऐसा ही किया और स्वर्ण जीतने में अहम भूमिका निभाई।
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सुरुचि के लगातार प्रदर्शन ने ही किया प्रेरित: कमलजीत
नई दिल्ली। पहली बार सुरुचि के साथ जोड़ी बनाकर खेल रहे कमलजीत ने जीत के बाद बताया कि वह फाइनल में सुरुचि के प्रदर्शन से प्रेरित हुए। उन्होंने कहा, फाइनल में मुझे घर खाली हाथ नहीं जाना था। एक दिन पहले ही मुझे दूसरा पदक जीतने का दूसरा मौका मिला था। फाइनल में मैं देख रहा था कि हर शॉट में सुरुचि अच्छा कर रही है। मेरे मन में था कि वो अच्छा कर रही है तो मुझे भी करना है। मैंने इससे यह सीखा की लय कैसे पकड़नी है। एथलेटिक्स से ताल्लुक रखने वाले कमलजीत कहते हैं कि वह अभी भी एथलेटिक्स देखते हैं और शॉटपुटर तजिंदरपाल सिंह तूर को फॉलो करते हैं।
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कमलजीत के लिए यह दुख तीन साल पहले घटी उस मुसीबत से भी बड़ा था जब सड़क दुर्घटना में उनकी जांघ की हड्डी टूट गई थी। 10 मीटर एयर पिस्टल की टीम और व्यक्तिगत इवेंट में शामिल उस वक्त तक कमलजीत के लिए एशियाई खेल खत्म हो चुके थे। इन दोनों ही इवेंट में भारत का कोई पदक नहीं आया था, लेकिन थोड़ी देर जब उन्हें बताया गया कि केदारलिंग की जगह मिश्रित टीम स्पर्धा में वह सुरुचि के साथ खेलेंगे। फिर क्या था कमलजीत ने फिर पिता को फोन मिलाया और बताया कि वह शुक्रवार को सुरुचि के साथ खेलने जा रहे हैं। रतीराम ने बेटे से कहा, भगवान ने बड़ा मौका दिया है, शांति से खेलना और फिर उन्होंने सोना जीत लिया।
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बुखार से उबरकर सुरुचि ने जीता सोना
कमलजीत की तरह सुरुचि सिंह के लिए भी 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित स्पर्धा का स्वर्ण बड़ी राहत से कम नहीं है। व्यक्तिगत मुकाबलों में पदक की दावेदार सुरुचि ने ऐसा प्रदर्शन किया था जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। पिता इंदर सिंह और भाई निशांत ने उनसे पूछा कि क्या हो गया था तो उन्होंने बताया कि बुधवार की रात उन्हें बुखार था और वह रात भर नहीं सो पाई। मैच के दौरान भी उनका शरीर टूट रहा था। शुक्रवार की सुबह घरवालों ने जब सुरुचि से बात की तो उन्होंने कहा बुखार ठीक है, अब आप लोग चिंता नहीं करो मैं कमलजीत के साथ अपना श्रेष्ठ करके आउंगी। विश्वकप में पांच स्वर्ण जीत चुकीं सुरुचि ने ऐसा ही किया और स्वर्ण जीतने में अहम भूमिका निभाई।
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सुरुचि के लगातार प्रदर्शन ने ही किया प्रेरित: कमलजीत
नई दिल्ली। पहली बार सुरुचि के साथ जोड़ी बनाकर खेल रहे कमलजीत ने जीत के बाद बताया कि वह फाइनल में सुरुचि के प्रदर्शन से प्रेरित हुए। उन्होंने कहा, फाइनल में मुझे घर खाली हाथ नहीं जाना था। एक दिन पहले ही मुझे दूसरा पदक जीतने का दूसरा मौका मिला था। फाइनल में मैं देख रहा था कि हर शॉट में सुरुचि अच्छा कर रही है। मेरे मन में था कि वो अच्छा कर रही है तो मुझे भी करना है। मैंने इससे यह सीखा की लय कैसे पकड़नी है। एथलेटिक्स से ताल्लुक रखने वाले कमलजीत कहते हैं कि वह अभी भी एथलेटिक्स देखते हैं और शॉटपुटर तजिंदरपाल सिंह तूर को फॉलो करते हैं।