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एशियाड: गांव वालों ने मारे ताने, माता-पिता और कोच ने जताया भरोसा, पोल वॉल्ट में कांस्य जीत भावुक हुईं बरानिका

Sat, 26 Sep 2026 04:20 PM IST
मयंक त्रिपाठी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया Published by: मयंक त्रिपाठी Updated Sat, 26 Sep 2026 04:20 PM IST
सार

बरानिका इलांगोवन ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की पोल वॉल्ट स्पर्धा में 4.20 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता। गांव के तानों और 2019 की एसीएल चोट के बावजूद उन्होंने माता-पिता, कोच और एएफआई के भरोसे से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

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Baaranika Elangovan Overcomes Village Taunts to Win Historic Pole Vault Bronze at Asian Games 2026
बरानिका इलांगोवन - फोटो : Athletics Federation of India

विस्तार

एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार को भारतीय एथलीट बरानिका इलांगोवन ने महिलाओं की पोल वॉल्ट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 24 वर्षीय बरानिका ने 4.20 मीटर की ऊंचाई पार कर पोडियम हासिल किया। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर चुनौतियों और संघर्ष से भरा रहा। तमिलनाडु के मयिलादुथुरै जिले के कुथलम गांव से आने वाली बरानिका ने जब पोल वॉल्ट की शुरुआत की, तो गांव के लोगों ने उनके इस फैसले पर सवाल उठाए थे। यहां तक कि कुछ लोगों ने उनके माता-पिता से कहा था कि यह खेल काफी जोखिम भरा है और अगर बेटी को चोट लग गई तो उससे शादी करने के लिए कोई तैयार नहीं होगा।
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Baaranika Elangovan Overcomes Village Taunts to Win Historic Pole Vault Bronze at Asian Games 2026
बरानिका इलांगोवन - फोटो : Sony Liv Screen Grab
2019 में लगी थी गंभीर चोट
बरानिका को 2019 में पोल वॉल्ट के दौरान एसीएल की चोट लगी थी और उनकी सर्जरी भी हुई। इसके बावजूद उन्होंने खेल को छोड़ने के बजाय वापसी का फैसला किया। उनके माता-पिता और कोच ने इस दौरान उनका साथ दिया और उनकी क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। कांस्य पदक जीतने के बाद बरानिका ने आईएएनएस से कहा, 'मैं एक गांव से आती हूं। जब मैंने शुरुआत की, तो 2019 में वॉल्टिंग के दौरान चोट लगने के बाद मेरी एसीएल सर्जरी हुई थी। उस समय हर कोई मेरे माता-पिता से कह रहा था, लड़की को पोल वॉल्ट में हिस्सा क्यों लेने दे रहे हो? यह इवेंट काफी जोखिम भरा है। अगर उसे कुछ हो गया, तो कोई उससे शादी नहीं करेगा।'

उन्होंने कहा कि गांव के लोगों की बातों के बावजूद उनके माता-पिता ने उन पर भरोसा किया। बरानिका ने अपने कोच को भी अपनी सफलता का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, 'वे हमारी पीठ पीछे बातें कर रहे थे, मगर मेरे मम्मी-पापा को मुझ पर भरोसा था। उन्होंने कोच से साफ-साफ बात की। मेरे कोच को मेरी काबिलियत पर भरोसा था। उन्होंने उनसे कहा, 'वह आपकी सोच से कहीं ज्यादा कर दिखाएगी। वह निश्चित रूप से खेल में नाम कमाएगी।' मैं उनका भी शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने दूसरों की बात नहीं सुनी। उन्होंने मुझ पर भरोसा किया।'
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पदक जीतने का नहीं हुआ यकीन
बरानिका के लिए यह पल इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्हें शुरुआत में पता ही नहीं चला कि उनका प्रदर्शन उन्हें पोडियम तक पहुंचा चुका है। कजाखस्तान की एक एथलीट के साथ तीसरा स्थान साझा करने के बाद उन्हें साथी खिलाड़ी से पता चला कि उन्होंने कांस्य पदक जीत लिया है। उन्होंने कहा, 'मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मैंने पदक जीत लिया है। मेरी साथी एथलीट मेरे पास आई और कहा, 'तुम कांस्य की हकदार हो, तुमने इसे जीत लिया है।' मेरे साथी ने मुझे बताया कि मैं कांस्य के लिए तीसरे स्थान पर रही। मुझे इसके बारे में तभी पता चला। मैं पर्सनल बेस्ट का लक्ष्य बना रही थी, लेकिन असल में मुझे पदक मिला।'
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Baaranika Elangovan Overcomes Village Taunts to Win Historic Pole Vault Bronze at Asian Games 2026
बरानिका इलांगोवन - फोटो : IANS
एएफआई के समर्थन को दिया श्रेय
बरानिका ने अपनी सफलता का श्रेय एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) को भी दिया। उन्होंने बताया कि एशियन गेम्स से पहले जापान में आयोजित तैयारी कैंप ने उन्हें वहां के माहौल में ढलने में काफी मदद की। उन्होंने कहा, 'इस बार, एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने हमारे पोल ले जाने के लिए हर एयरलाइन के साथ हर संभव कोशिश की और उन्होंने इसे सच में मुमकिन कर दिखाया। मैं एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का भी शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। उन्हीं की वजह से मैं यह मेडल जीत सकी।'

बारानिका के मुताबिक, एशियन गेम्स से एक सप्ताह पहले सुगुपा यूनिवर्सिटी में लगाए गए तैयारी कैंप से उन्हें जापान के मौसम, समय, खाने और रिकवरी के हिसाब से खुद को तैयार करने में मदद मिली। उन्होंने कहा, 'उन्होंने हमारे लिए सब कुछ व्यवस्थित किया और यह वाकई बहुत अच्छा था।'
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