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ज्वाला ने लांच किया ऐसा एप्स जो महिलों को बचाएगा मुसीबत से
अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 14 Nov 2014 01:36 PM IST
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भारतीय बैडमिंटन जगत की सबसे विद्रोही खिलाड़ी का खिताब पा चुकी ज्वाला गुट्टा अपने बिंदास तेवरों के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने एक ऐसा एप्स जारी किया है जो महिलाओं पर होने वाले छेड़छाड़ को रोकने और उन्हें मुसीबत से बचाने में कारगर होगा।
कानपुर की सिटी पुलिस ने अपना ‘कानपुर पुलिस एसओएस’ एप्स गुरुवार को लांच किया। इस एप्स के माध्यम से अब पुलिस जरूरतमंद की मौके पर मदद कर सकेगी। इसके के जरिए पुलिस आपकी लोकेशन को आसानी से ट्रेस कर आपकी मदद कर पाएगी।
गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करते ही यह ऐप्स आपसे आपके 5 परिचितों के मोबाइल नंबर फीड करवाएगा। इसके बाद जरूरत पर यह स्वत: उन नंबरों को इमरजेंसी मैसेज फारवर्ड कर देगा। सुविधा का लाभ लेने के लिए आपको यह एप्स अपने स्मार्ट फोन में डाउन लोड करना होगा।
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डाउनलोड होते ही फोन पर एक अलार्म आईकन बन जाएगा। खास बात यह है कि प्रदेश में सुरक्षा के लिहाज से इस तरह के एप्स की शुरूआत करने वाला पहले शहर का दर्जा कानपुर को प्राप्त हुआ है। ‘कानपुर पुलिस एसओएस’ एप्स एक चलता-फिरता सिक्योरिटी अलार्म होगा जो हर किसी एक हाथ में हमेशा रहेगा।
दरअसल इमरजेंसी में कॉल करने पर पुलिस को लोकेशन बताने, हालात समझने में वक्त लगता है। संभव है कि बदमाश इसका मौका भी न दें। इन सब चीजों का ख्याल कर यह एप्स में तैयार किया गया है। मुश्किल के क्षण में इस एप्लीकेशन को चालू करने के लिए केवल आपको अपने मोबाइल एप का रेड बटन दबाना होगा।
मोबाइल ऑन होते ही उसमें स्वत: मौके की वीडियो और ऑडियो रिकार्डिंग शुरू हो जाएगी और आटोमेटिक 100 नंबर के कंट्रोल रूम को पहुंचने लगेगी। ऐसे हर 15 सेकेंड में ऑडियो और वीडियो फाइल पुलिस कंट्रोल रूम में पहुंचते रहेंगे। इससे घटना की सटीक लोकेशन और पीड़ित किस स्पॉट पर है। इसका कंट्रोल रूम को पता चलता रहेगा। इससे पुलिस टीम को जल्द से जल्द मौके पर पहुंचने पर आसानी होगी।
यहीं नहीं अभिभावक और करीबी का मोबाइल नंबर फीड होने पर उन्हें भी सूचना मिल सकेगी। मोबाइल से भेजी गई सूचनाएं सर्वर पर इकट्ठा होती रहेंगी। इनका उपयोग आरोपी के खिलाफ कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। एसएसपी के. सुनील इमैनुएल ने बताया कि इस्टिरिया कंपनी के इंजीनियरों की तरफ से नए साफ्टवेयर में एसओएस (सोशल एप फॉर पर्सनल सेफ्टी) बनाया गया है।
यह नया एप्लीकेशन खासकर महिलाओं और बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सुरक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत इन्हें ही है।
ऐसे करेगा काम
लाल घंटी दबाते ही परिचितों के मोबाइल पर पहुंचने वाले मैसेज में लिखा होगा--‘आई ऐम इन इमरजेंसी, फॉर लोकेशन सी गूगल मैप।’ लॉगिन के लिए पाथ लिखा रहेगा। इस पर क्लिक करते ही मैप में लोकेशन दिखेगी। साथ ही ट्रेस के लिए कोडवर्ड भी लिखे रहेंगे।
मैसेज पढ़कर परिचित खुद भी लोकेशन जान सकेंगे। साथ ही पुलिस को फोन कर मदद मांग सकेंगे। वहीं एक मैसेज खुद-ब-खुद कंट्रोल रूम पहुंच जाने से डॉयल-100 सक्रिय हो जाएगी।
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कानपुर की सिटी पुलिस ने अपना ‘कानपुर पुलिस एसओएस’ एप्स गुरुवार को लांच किया। इस एप्स के माध्यम से अब पुलिस जरूरतमंद की मौके पर मदद कर सकेगी। इसके के जरिए पुलिस आपकी लोकेशन को आसानी से ट्रेस कर आपकी मदद कर पाएगी।
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गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करते ही यह ऐप्स आपसे आपके 5 परिचितों के मोबाइल नंबर फीड करवाएगा। इसके बाद जरूरत पर यह स्वत: उन नंबरों को इमरजेंसी मैसेज फारवर्ड कर देगा। सुविधा का लाभ लेने के लिए आपको यह एप्स अपने स्मार्ट फोन में डाउन लोड करना होगा।
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डाउनलोड होते ही फोन पर एक अलार्म आईकन बन जाएगा। खास बात यह है कि प्रदेश में सुरक्षा के लिहाज से इस तरह के एप्स की शुरूआत करने वाला पहले शहर का दर्जा कानपुर को प्राप्त हुआ है। ‘कानपुर पुलिस एसओएस’ एप्स एक चलता-फिरता सिक्योरिटी अलार्म होगा जो हर किसी एक हाथ में हमेशा रहेगा।
दरअसल इमरजेंसी में कॉल करने पर पुलिस को लोकेशन बताने, हालात समझने में वक्त लगता है। संभव है कि बदमाश इसका मौका भी न दें। इन सब चीजों का ख्याल कर यह एप्स में तैयार किया गया है। मुश्किल के क्षण में इस एप्लीकेशन को चालू करने के लिए केवल आपको अपने मोबाइल एप का रेड बटन दबाना होगा।
मोबाइल ऑन होते ही उसमें स्वत: मौके की वीडियो और ऑडियो रिकार्डिंग शुरू हो जाएगी और आटोमेटिक 100 नंबर के कंट्रोल रूम को पहुंचने लगेगी। ऐसे हर 15 सेकेंड में ऑडियो और वीडियो फाइल पुलिस कंट्रोल रूम में पहुंचते रहेंगे। इससे घटना की सटीक लोकेशन और पीड़ित किस स्पॉट पर है। इसका कंट्रोल रूम को पता चलता रहेगा। इससे पुलिस टीम को जल्द से जल्द मौके पर पहुंचने पर आसानी होगी।
यहीं नहीं अभिभावक और करीबी का मोबाइल नंबर फीड होने पर उन्हें भी सूचना मिल सकेगी। मोबाइल से भेजी गई सूचनाएं सर्वर पर इकट्ठा होती रहेंगी। इनका उपयोग आरोपी के खिलाफ कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। एसएसपी के. सुनील इमैनुएल ने बताया कि इस्टिरिया कंपनी के इंजीनियरों की तरफ से नए साफ्टवेयर में एसओएस (सोशल एप फॉर पर्सनल सेफ्टी) बनाया गया है।
यह नया एप्लीकेशन खासकर महिलाओं और बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सुरक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत इन्हें ही है।
ऐसे करेगा काम
लाल घंटी दबाते ही परिचितों के मोबाइल पर पहुंचने वाले मैसेज में लिखा होगा--‘आई ऐम इन इमरजेंसी, फॉर लोकेशन सी गूगल मैप।’ लॉगिन के लिए पाथ लिखा रहेगा। इस पर क्लिक करते ही मैप में लोकेशन दिखेगी। साथ ही ट्रेस के लिए कोडवर्ड भी लिखे रहेंगे।
मैसेज पढ़कर परिचित खुद भी लोकेशन जान सकेंगे। साथ ही पुलिस को फोन कर मदद मांग सकेंगे। वहीं एक मैसेज खुद-ब-खुद कंट्रोल रूम पहुंच जाने से डॉयल-100 सक्रिय हो जाएगी।