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'दिल छोटा न करें भारतीय, बहुत बड़ा खेल है कुश्ती'
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
Updated Tue, 12 Feb 2013 08:48 PM IST
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कुश्ती को ओलंपिक से बाहर किए जाने का फैसला आया तो उस वक्त कुश्ती की सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय संस्था फीला के अध्यक्ष राफेल मार्टीनेटी लुसान (स्विटजरलैंड) स्थित अपने ऑफिस में थे। जैसे ही उन्हें यह खबर लगी वह स्तब्ध रह गए। उन्हें विश्वास नहीं हुआ। लेकिन मार्टीनेटी ने इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के इस निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है।
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अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें मालूम है कुश्ती भारत में बहुत बड़ा खेल बन चुका है। भारतीयों को दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है। वह ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना) में इस वर्ष सितंबर में होने वाली बैठक में कुश्ती की वापसी को पूरा जोर लगा देंगे।
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अमर उजाला के सवाल पर मार्टीनेटी के मुंह से पहला शब्द यही निकला यह पूरी तरह बकवास निर्णय है। इसका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। आईओसी सदस्यों को दुनिया भर में इस खेल की लोकप्रियता के बारे में कोई अंदाजा नहीं है।
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वर्ष 2002 में फीला अध्यक्ष पद की गद्दी संभालने वाले मार्टीनेटी को दुख इस बात का है कि आईओसी ने इतना बड़ा निर्णय लेने से पहले एक बार उन्हें भरोसे में लेने की जरूरत नहीं समझी। उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि यह वह खेल है जिसके लिए लंदन ओलंपिक के एक्सेल एरीना में लोगों ने पांच सौ डॉलर का टिकट लेकर मारा मारी की।
वह ओलंपिक के इस सबसे पुराने खेल की वापसी के लिए कुश्ती के वर्ल्ड और ओलंपिक चैंपियनों को लिखेंगे। उनके साथ मिलकर फीला आईओसी पर इस खेल की वापसी के लिए दबाव बनाएगी। तीन बार भारत का दौरा कर चुके मार्टीनेटी को मालूम है कि कुश्ती की भारत में क्या हैसियत है। वह कहते हैं उन्हें अंदाजा है कि इस वक्त भारत के पहलवानों पर क्या बीत रही होगी। लेकिन यह हाल सिर्फ भारत का नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे देशों का भी है। अंत में वह यही कहते हैं कि भारत में अपने लोगों को बता दें उम्मीद न छोड़ें। सितंबर में इस पर अंतिम फैसला होने से पहले वह बड़ा संघर्ष करने जा रहे हैं।