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2036 ओलंपिक के लिए भारत का रोडमैप तैयार: नए चयन नियमों के साथ आगे बढ़ेगी दावेदारी, कब होगा मेजाबन का एलान?
Thu, 02 Jul 2026 08:49 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Thu, 02 Jul 2026 08:49 PM IST
सार
2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत ने नए आईओसी चयन ढांचे के तहत अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं, जबकि अंतिम मेजबान का फैसला 2029 में होगा। वहीं, सरकार मानसून सत्र में संशोधित राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग बिल पेश करेगी, जिसमें प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी और आपूर्ति पर पांच साल तक की जेल का प्रावधान प्रस्तावित है।
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ओलंपिक (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Adobe
विस्तार
भारत 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की नई मेजबान चयन प्रक्रिया को लेकर भी आश्वस्त नजर आ रहा है। भारतीय पक्ष का कहना है कि वह विभिन्न माध्यमों से आईओसी के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखेगा।
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2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की तैयारी
भारत ने 2024 में अहमदाबाद में 2036 ओलंपिक आयोजित करने की मंशा जताते हुए आईओसी को औपचारिक 'लेटर ऑफ इंटेंट' सौंपा था। हालांकि, 2025 में आईओसी की नई अध्यक्ष किर्स्टी कोवेंट्री ने मेजबान चयन प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक कार्य समूह गठित किया, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
हाल ही में आईओसी सत्र में नई चयन प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत 2036 ओलंपिक के मेजबान का फैसला वर्ष 2029 के मध्य में किया जाएगा। भारत की ओर से इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) गुजरात सरकार के सहयोग से करेगा।
भारत ने 2024 में अहमदाबाद में 2036 ओलंपिक आयोजित करने की मंशा जताते हुए आईओसी को औपचारिक 'लेटर ऑफ इंटेंट' सौंपा था। हालांकि, 2025 में आईओसी की नई अध्यक्ष किर्स्टी कोवेंट्री ने मेजबान चयन प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक कार्य समूह गठित किया, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
हाल ही में आईओसी सत्र में नई चयन प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत 2036 ओलंपिक के मेजबान का फैसला वर्ष 2029 के मध्य में किया जाएगा। भारत की ओर से इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) गुजरात सरकार के सहयोग से करेगा।
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विभिन्न माध्यमों से मजबूत करेगा दावा
एक वरिष्ठ सूत्र ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि सरकार सीधे आईओसी सदस्यों से संपर्क नहीं कर सकती, लेकिन कई अन्य माध्यम मौजूद हैं, जिनके जरिए भारत अपने दावे को मजबूत करेगा। हालांकि उन्होंने इन माध्यमों का खुलासा नहीं किया।
एक वरिष्ठ सूत्र ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि सरकार सीधे आईओसी सदस्यों से संपर्क नहीं कर सकती, लेकिन कई अन्य माध्यम मौजूद हैं, जिनके जरिए भारत अपने दावे को मजबूत करेगा। हालांकि उन्होंने इन माध्यमों का खुलासा नहीं किया।
नई चयन प्रक्रिया में क्या बदला?
- आईओसी ने मेजबान चयन प्रक्रिया में 'स्ट्रैटेजिक डायलॉग' नाम का एक नया चरण जोड़ा है।
- यह चरण 'कंटीन्युअस डायलॉग' और 'टार्गेटेड डायलॉग' के बीच होगा।
- इस चरण में उम्मीदवार देशों को वित्तीय गारंटी, लागत नियंत्रण की योजना, परियोजनाओं की समय-सीमा और अन्य जरूरी मानकों को पूरा करना होगा।
- फिलहाल भारत 'कंटीन्युअस डायलॉग' चरण में शामिल है।
- नई प्रक्रिया के अनुसार 2027 में इच्छुक देशों को 'स्ट्रैटेजिक डायलॉग' में प्रवेश मिलेगा।
- इसके बाद 2028 में 'टार्गेटेड डायलॉग' शुरू होगा।
- इस दौरान आईओसी की फ्यूचर होस्ट कमीशन प्रस्तावित मेजबान शहरों का दौरा भी करेगी।
- इसके बाद 2029 में आईओसी कार्यकारी बोर्ड अपनी पसंदीदा मेजबान सूची आईओसी सत्र के सामने रखेगा, जहां मतदान के जरिए अंतिम मेजबान का चयन किया जाएगा।
कतर सबसे बड़ी चुनौती
2036 ओलंपिक की मेजबानी की दौड़ में भारत को सबसे बड़ी चुनौती कतर से मिल रही है। इसके अलावा तुर्की और दक्षिण अफ्रीका के भी दावेदारी पेश करने की संभावना है।
2036 ओलंपिक की मेजबानी की दौड़ में भारत को सबसे बड़ी चुनौती कतर से मिल रही है। इसके अलावा तुर्की और दक्षिण अफ्रीका के भी दावेदारी पेश करने की संभावना है।
डोपिंग
- फोटो : अमर उजाला/AI
मानसून सत्र में पेश होगा संशोधित राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग बिल
केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में संशोधित राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। इस संशोधन का उद्देश्य खिलाड़ियों तक प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी और आपूर्ति करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान लागू करना है।
केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में संशोधित राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। इस संशोधन का उद्देश्य खिलाड़ियों तक प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी और आपूर्ति करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान लागू करना है।
पांच साल तक की जेल का प्रावधान
संशोधित बिल में खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थ उपलब्ध कराने या उनकी तस्करी करने वालों के लिए अधिकतम पांच साल की जेल का प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं, यदि कोई डॉक्टर या चिकित्सा विशेषज्ञ जानबूझकर प्रतिबंधित दवाएं लिखता है, तो उसे भी इस कानून के दायरे में लाया जाएगा। इस संशोधित विधेयक पर 18 जून तक सार्वजनिक सुझाव मांगे गए थे और अब परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें इसे पेश किए जाने की संभावना है।
संशोधित बिल में खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थ उपलब्ध कराने या उनकी तस्करी करने वालों के लिए अधिकतम पांच साल की जेल का प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं, यदि कोई डॉक्टर या चिकित्सा विशेषज्ञ जानबूझकर प्रतिबंधित दवाएं लिखता है, तो उसे भी इस कानून के दायरे में लाया जाएगा। इस संशोधित विधेयक पर 18 जून तक सार्वजनिक सुझाव मांगे गए थे और अब परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें इसे पेश किए जाने की संभावना है।
सरकार क्यों ला रही है यह संशोधन?
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया लगातार यह कहते रहे हैं कि प्रतिबंधित दवाओं की संगठित आपूर्ति को अपराध घोषित करना समय की जरूरत है। पिछले तीन वर्षों से भारत विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की डोपिंग उल्लंघन करने वाले देशों की सूची में शीर्ष पर रहा है। इसी तरह का प्रस्ताव 2018 में भी लाया गया था, जिसमें दोषियों के लिए चार साल की जेल और दो लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान था। हालांकि, 2022 में पारित कानून से इन प्रावधानों को हटा दिया गया था, क्योंकि सरकार ने उस समय दंडात्मक कानून की बजाय रोकथाम आधारित कानून को प्राथमिकता दी थी। अब संशोधित बिल के जरिए फिर से कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू करने की तैयारी की जा रही है।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया लगातार यह कहते रहे हैं कि प्रतिबंधित दवाओं की संगठित आपूर्ति को अपराध घोषित करना समय की जरूरत है। पिछले तीन वर्षों से भारत विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की डोपिंग उल्लंघन करने वाले देशों की सूची में शीर्ष पर रहा है। इसी तरह का प्रस्ताव 2018 में भी लाया गया था, जिसमें दोषियों के लिए चार साल की जेल और दो लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान था। हालांकि, 2022 में पारित कानून से इन प्रावधानों को हटा दिया गया था, क्योंकि सरकार ने उस समय दंडात्मक कानून की बजाय रोकथाम आधारित कानून को प्राथमिकता दी थी। अब संशोधित बिल के जरिए फिर से कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू करने की तैयारी की जा रही है।