{"_id":"d6ca83798ee368a4e6a91d92a54de52b","slug":"how-led-lights-use-in-stumps","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानते हैं, स्टंप में कैसे काम करती है एलईडी लाइट!","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल ","slug":"sports"}}
जानते हैं, स्टंप में कैसे काम करती है एलईडी लाइट!
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 01 Apr 2014 04:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांग्लादेश में खेले जा रहे ट्वंटी-20 वर्ल्ड कप में स्टंप और बेल्स में लगी लाल रंग की एलईडी लाइट क्रिकेटप्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
विज्ञापन
खिलाड़ी के बोल्ड, रन आउट या स्टंप्स होने पर स्टंप में लगी लाल रंग की एलईडी लाइट जलने लगती है और इससे क्रिकेटप्रेमियों को अनोखा एहसास होता है।
हालांकि क्रिकेटप्रेमी अभी इस बात से अंजान से की इस नई तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले कहां हुआ है और यह तकनीक कैसे काम करती है।
दरअसल आईसीसी ने इस नई तकनीक का प्रयोग क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) के नक्शेकदम पर चलते हुए लिया है जिसने सबसे पहले इन अनोखे स्टंप और बेल्स का इस्तेमाल 2012 में बिग बैश ट्वंटी-20 लीग के दौरान किया था।
विज्ञापन
इस तकनीक को जिंग विकेट सिस्टम कहते हैं और इसका निर्माण साउथ ऑस्ट्रेलियन जिंग इंटरनेशनल ने किया है। इसमें बेल्स में एक सेंसर लगा होता है जो विकेट के गिरने पर सेकंड के 1/1000 हिस्से पर काम करता है।
विज्ञापन
एक बार जब विकेट गिरता है तब वेल्स तुरंत लाल रंग की एलईडी लाइट फ्लैश करती है और एक रेडियो सिग्नल स्टंप की लाइट को जलाने के लिए भेजती है।
स्टंप के ऊपर लगी दोनों बेल्स में कम बोल्टेज वाली बैटरी लगी होती है जिससे यह लाइट जलती है। इस तकनीक के इस्तेमाल से अंपायरों को स्टंपिंग और रन आउट के फैसले देने में आसानी हो रही है।