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फ्लैश बैक: जब लंदन का मेट्रो स्टेशन ध्यानचंद के नाम से रोशन हुआ
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
Updated Fri, 06 Oct 2017 12:48 PM IST
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ध्यानचंद
- फोटो : The indian express
देश में हॉकी के खिलाड़ियों का सम्मान कम हुआ है। हॉकी के जादूगर ध्यानचंद को अभी तक देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न नहीं दिया गया है। अपने देश में ऐसी बेरूखी के बीच 2012 में लंदन के तीन मेट्रो स्टेशन तीन भारतीय हॉकी खिलाड़ियों के नाम से रोशन हुए थे।
पढ़ेंः- ध्यानचंद एक नजर में: हॉकी के जादूगर के बारे में जानें 5 मुख्य बातें
ध्यानचंद के साथ उनके छोटे भाई रूप सिंह ने भी हॉकी में देश को गौरवान्वित किया था। लेकिन बहुत कम खेल प्रेमी रूप सिंह के बारे में जानते हैं। ध्यानचंद का निधन 1979 में हुआ और रूप सिंह का निधन 1977 में हुआ था। इसी तरह कोलकाता में रहने वाले लेसली वॉल्टर क्लाडियस ने भी देश को हॉकी में तीन बार गोल्ड दिलाया। लेकिन सरकार ने इनका भी ध्यान नहीं दिया।
इन तीनों को देश में पर्याप्त सम्मान नहीं मिला लेकिन हजारों मील दूर लंदन में 2012 के ओलंपिक खेलों के दौरान मेट्रो स्टेशनों में इन तीनों के नाम ओलंपिक हीरो के रूप में अंकित किए गए।
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सभी मेट्रो स्टेशनों में अब तक के ओलंपिक के 358 विजेताओं के नाम लिखे गए। दरअसल ओलंपिक के दौरान मेट्रो स्टेशन इन खिलाड़ियों के नाम से जाने गए। लंदन में 361 मेट्रो ट्यूब स्टेशनों को ओलंपिक लीजेंड मैप में शामिल किया गया। इन ओलंपिक विजेताओं में छह हॉकी खिलाड़ी थे। जिनमें से तीन भारत से ध्यानचंद, रूप सिंह और क्लाडियस शाामिल थे।
पढ़ेंः- जानिए, सचिन तेंदुलकर कैसे हो गए भारत रत्न के लिए ध्यानचंद से आगे
2012 के ओलंपिक के दौरान वाइल वाटफोर्ड मेट्रो जंक्शन को ध्यानचंद के नाम से जाना गया। वाटफोर्ड हाई स्ट्रीट स्टेशन रूप सिंह के नाम से तथा बुशे स्टेशन क्लॉडियस के नाम से जाना गया। ऐसे सम्मान के बाद ध्यानचंद के बेटे तथा पूर्व हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार ने कहा कि यह भारतीय हॉकी के लिए एक सुखद खबर थी। देश में हॉकी के सितारों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। लंदन ओलंपिक के दौरान ऐसा सम्मान हॉकी के इन चैंपियन खिलाड़ियों को एक तरह से श्रद्धांजलि थी।
ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF
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ध्यानचंद के साथ उनके छोटे भाई रूप सिंह ने भी हॉकी में देश को गौरवान्वित किया था। लेकिन बहुत कम खेल प्रेमी रूप सिंह के बारे में जानते हैं। ध्यानचंद का निधन 1979 में हुआ और रूप सिंह का निधन 1977 में हुआ था। इसी तरह कोलकाता में रहने वाले लेसली वॉल्टर क्लाडियस ने भी देश को हॉकी में तीन बार गोल्ड दिलाया। लेकिन सरकार ने इनका भी ध्यान नहीं दिया।
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इन तीनों को देश में पर्याप्त सम्मान नहीं मिला लेकिन हजारों मील दूर लंदन में 2012 के ओलंपिक खेलों के दौरान मेट्रो स्टेशनों में इन तीनों के नाम ओलंपिक हीरो के रूप में अंकित किए गए।
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सभी मेट्रो स्टेशनों में अब तक के ओलंपिक के 358 विजेताओं के नाम लिखे गए। दरअसल ओलंपिक के दौरान मेट्रो स्टेशन इन खिलाड़ियों के नाम से जाने गए। लंदन में 361 मेट्रो ट्यूब स्टेशनों को ओलंपिक लीजेंड मैप में शामिल किया गया। इन ओलंपिक विजेताओं में छह हॉकी खिलाड़ी थे। जिनमें से तीन भारत से ध्यानचंद, रूप सिंह और क्लाडियस शाामिल थे।
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2012 के ओलंपिक के दौरान वाइल वाटफोर्ड मेट्रो जंक्शन को ध्यानचंद के नाम से जाना गया। वाटफोर्ड हाई स्ट्रीट स्टेशन रूप सिंह के नाम से तथा बुशे स्टेशन क्लॉडियस के नाम से जाना गया। ऐसे सम्मान के बाद ध्यानचंद के बेटे तथा पूर्व हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार ने कहा कि यह भारतीय हॉकी के लिए एक सुखद खबर थी। देश में हॉकी के सितारों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। लंदन ओलंपिक के दौरान ऐसा सम्मान हॉकी के इन चैंपियन खिलाड़ियों को एक तरह से श्रद्धांजलि थी।
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