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चोटिल ध्यानचंद जब साथियों से बोले, बदले की भावना के साथ मत खेलो
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा
Updated Wed, 04 Oct 2017 12:59 PM IST
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मेजर ध्यानचंद
- फोटो : Sportskeeda.com
साल 1936 का ओलंपिक जर्मनी की राजधानी बर्लिन में होना था, जहां हिटलर का शासन था। टीम की पहली सूची में ध्यानचंद का नाम ही नहीं था, जिस पर खूब बवाल हुआ। हालांकि बाद में टीम की कप्तानी ध्यानचंद को मिली। हर तरफ हिटलर की जय जयकार थी। इस ओलंपिक के इंतजाम बेहद खर्चीले थे। ओलंपिक मशाल पहली बार सूरज की किरणों से जलाई गई। बता दें कि ये पहले ओलंपिक खेल थे, जिन्हें टीवी पर दिखाया गया।
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भारत और जर्मनी के बीच होने वाले मैच को बारिश होने पर टाल दिया गया। जब मैच शुरू हुआ, तो जर्मनी खिलाड़ियों ने आक्रामक रुख अपनाया। ध्यानचंद के दांत में चोट लगी, जिसके चलते उन्हें कुछ वक्त के लिए मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद ध्यानचंद चोटिल हालत में ही मैदान में लौटे और साथियों को समझाया कि बदले के लिए नहीं, बढ़िया खेल खेलो। बस फिर क्या ध्यानचंद ने वापसी के साथ ताबड़तोड़ गोल दागने शुरू किए।
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बता दें कि 1936 के ओलंपिक खेल शुरू होने से पहले ही एक अभ्यास मैच में भारतीय टीम जर्मनी से 4-1 से हार गई थी। लेकिन इस हार के बाद भी ध्यानचंद जरा भी नहीं डगमगाए। भारत ने बर्लिन ओलंपिक में शुरुआती अभ्यास मैच गंवाने के बाद अगले चरण में अपने सभी तीन लीग मैच जीते थे।
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