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'बतौर टीम हमें ज्यादा से ज्यादा मैच जीतने की जरूरत'
Sat, 04 Jan 2020 11:00 PM IST
Rohit Ojha
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Sat, 04 Jan 2020 11:00 PM IST
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सुनील छेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
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भारत के अनुभवी और तेज तर्रार स्ट्राइकर सुनील छेत्री अपने लिए 2020 में बड़े लक्ष्य तय नहीं करना चाहते हैं। सुनील छेत्री कहते हैं कि मुझे मालूम है कि मैं अब भारत के लिए मैं बहुत ज्यादा मैच नहीं खेलूंगा। फिर भी अभी हड़बड़ी में किसी फैसले पर पहुंचने की जरूरत नहीं है। मैं निजी तौर पर एक समय केवल एक मैच की बाबत सोचता हूं। बतौर टीम हमें ज्यादा से ज्यादा मैच जीतने की जरूरत है। अंतत: हमारा लक्ष्य चीन में 2023 में एएफसी एशियन कप के लिए क्वॉलिफाई करना है।
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हमें इस महाद्वीपीय चैंपियनशिप के लिए बराबर क्वॉलिफाई करने की जरूरत है और इसको लेकर कतई समझौता नहीं कर सकते हैं। हमारी टीम इसको लेकर विश्वास से सराबोर है। मुझे हमारी भारतीय टीम के चीन में 2023 एएफसी एशियन चैंपियनशिप के लिए क्वॉलिफाई करने को लेकर किसी तरह की शक की गुंजाइश ही नहीं लगती है।
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भारत के कतर में 2022 में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप क्वॉलीफायर्स में पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रॉनाल्डो के बाद इस समय दुनिया में फुटबॉल खेल रहे फुटबॉलरों में गोल दागने में भारत के सुनील छेत्री दूसरे नंबर हैं। अब तक भारत के लिए 72 अंतर्राष्ट्रीय गोल सुनील छेत्री के नाम हैं। अभी हाल ही में भारत के राष्ट्रीय फुटबॉल कोच आइगोर स्टीमैक ने कहा कि अब सुनील छेत्री 29 बरस के हो चुके हैं। इस बाबत सुनील छेत्री कहते हैं कि मुझे और मेहनत करने की दरकार है।
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फिलहाल पांच मैचों से तीन अंक हैं और उसे अपना अगला मेच 26 मार्च को कतर से घर में खेलना है। मुझे इस बात का फख्र है कि हमारे क्लब के पांच-छह खिलाड़ी भारत के लिए खेलते हैं। यह और बेहतर होगा कि यदि हमारे क्लब के और खिलाड़ी भारत के लिए खेले। हमारे नौजवान खिलाड़ी बहुत प्रतिभाशाली हैं। अहम यह है कि हम जो कर रहे उसे जारी रखें। हम जरा सी भी ढील गवारा नहीं कर सकते हैं।
हमारे क्लब बीएफसी ने घरेलू स्तर पर बढिय़ा प्रदर्शन किया है और हम इसे जारी रखना चाहते हैं। बेशक हम एशिया में बढिय़ा प्रदर्शन करना चाहते हैं। इस साल भी हमारे द्वार पर मौका दस्तक दे रहा है और हमें इसे भुनाने की दरकार है। मैं इस साल 2019 से बेहतर इंसान बनना चाहता हूं। मैं बड़े वादे नहीं करना चाहता हूं। मैं ज्यादा पढना चाहता हूं। अलग अलग की यात्रा कर अलग अलग संस्कृतियों को समझने की कोई अंत नहीं है।’