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भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ रची जा रही साजिश

Mon, 05 Aug 2013 03:11 PM IST
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी Updated Mon, 05 Aug 2013 03:11 PM IST
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cwg create conspiracy against indian shooters

भारतीय खिलाड़ियों ने दिल्ली में हुए पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर दूसरा स्थान हासिल किया था लेकिन अब ऐसी साजिश रची जा रही है कि जिससे अगले साल ग्लासगो में भारत पिछला प्रदर्शन दोहरा न सके।

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कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (सीजीएफ) की ओर से शूटिंग में भारत का वर्चस्व खत्म करने के लिए ऐसी साजिश रची गई है जिससे ग्लासगो में 2006 क्वालालंपुर में 16 और 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में जीते गए 14 गोल्ड जीतने का कारनामा दोहराना संभव नहीं होगा।
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सीजीएफ ने अगले वर्ष होने वाले इन खेलों से सभी शूटिंग इवेंटों की पेयर्स इवेंट (टीम चैंपियनशिप) खत्म करने के साथ पुरुषों की सेंटर फायर पिस्टल व स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट को समाप्त कर दिया है। इस कदम से कॉमनवेल्थ गेम्स से शूटिंग के 20 से अधिक गोल्ड मेडल खत्म हो गए हैं।
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जताया विरोध पर नहीं हुई सुनवाई
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अलावा कॉमनवेल्थ शूटिंग फेडरेशन (सीएसएफ) ने सीजीएफ की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हुई।

सीजीएफ ने इसके पीछे ओलंपिक फॉरमेट अपनाने का तर्क दिया है। लेकिन ओलंपिक छोड़ें दुनिया के किसी भी खेल में नहीं होने वाली बिग बोर को इन खेलों से नहीं हटाया गया है।

यही नहीं इस इवेंट की पेयर इवेंट क्वींस पेयर भी बरकरार रखी गई है। इसके अलावा महिलाओं की 50 मीटर प्रोन व डबल ट्रैप भी नॉन ओलंपिक इवेंट हैं जिन्हें इन खेलों में रखा गया है।

भारत के लिए यह बड़ा झटका है। दिल्ली में कुल जीते गए 38 में से 14 शूटिंग से और इनमें भी सात गोल्ड पेयर्स से आए थे। इसके अलावा पांच रजत व दो कांस्य पदक भी जीते। जबकि स्टैंडर्ड पिस्टल व सेंटर फायर से दो गोल्ड, दो रजत व एक कांस्य पदक आया।

सिर्फ ई-मेल से दी गई थी सूचना
एनआरएआई के एडवाइजर व सीएसएफ उपाध्यक्ष बलजीत सिंह सेठी ने सीजीएफ के इस कदम को साजिश करार दिया है। सेठी का कहना है कि यह निर्णय लेने से पहले भारत को भरोसे में नहीं लिया गया। सिर्फ ई-मेल के जरिए सूचना दी गई। उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया। सीएसएफ भी इसके खिलाफ है।


उन्होंने कहा कि बिग बोर को इन खेलों में क्यों रखा जा रहा है। लेकिन कोई जवाब नहीं आया। उनके व कुछ अन्य देशों के विरोध के बावजूद यह निर्णय वापस नहीं लिया जाएगा।

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