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जिस बेटी के लिए पिता ने बेची भैंस, उसने किया कमाल
Updated Tue, 29 Jul 2014 08:18 PM IST
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ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में कांस्य पदक जीतने वाली बनारसी बाला पूनम यादव की आज सभी तारीफ कर रहे हैं, लेकिन उसे यहां तक पहुंचाने में गरीब माता-पिता ने भी कम त्याग नहीं किया।
माता-पिता के त्याग के अलावा अन्य कई और लोग भी हैं जो उनकी सफलता की कहानी रचने में भागीदार रहे हैं।
पूनम की सफलता पर न सिर्फ घर के लोग बेहद खुश हैं बल्कि पूरा गांव और शहर अपनी इस लाडली बिटिया की तारीफ में जुटा हुआ है।
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माता-पिता के त्याग के अलावा अन्य कई और लोग भी हैं जो उनकी सफलता की कहानी रचने में भागीदार रहे हैं।
पूनम की सफलता पर न सिर्फ घर के लोग बेहद खुश हैं बल्कि पूरा गांव और शहर अपनी इस लाडली बिटिया की तारीफ में जुटा हुआ है।
भैंस बेचकर किया पैसे का इंतजाम
पूनम को यहां तक पहुंचने के लिए सिर्फ उनकी ही मेहनत ही नहीं है बल्कि उनके घर का भी अहम योगदान है। इस भारोत्तोलक को ग्लासगो भेजने के चक्कर में पिता कैलाश नाथ यादव ने अपनी वो भैंस बेच दी जिसका दूध बेचकर वे रोजी-रोटी का इंतजाम करते थे।
अब वह बड़े फक्र से कहते हैं, पूनम की सफलता ने उनके वर्षों के संघर्ष को सार्थक कर दिया। खपरैल के टूटे-फूटे घर में गुजर-बसर करने वाले कैलाश नाथ यादव को आज भी भरोसा नहीं हो रहा है कि भैंसों की देखभाल करने वाली उनकी बिटिया एक दिन कामनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर उन्हें रातोंरात प्रसिद्ध कर देगी।
बातचीत में बार-बार छलक उठने वाले आंसू पोंछते हुए पिता कैलाश ने बताया कि प्रतियोगिता की तैयारी से पहले उसके खानपान पर हजारों रुपए खर्च होने थे। ऐसे में उनके सामने भैंस बेंचने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, लेकिन उन्हें इसका तनिक भी अफसोस नहीं क्योंकि बेटी ने पदक जीतकर उनका ही नहीं गांव का भी नाम रोशन कर दिया।
अब वह बड़े फक्र से कहते हैं, पूनम की सफलता ने उनके वर्षों के संघर्ष को सार्थक कर दिया। खपरैल के टूटे-फूटे घर में गुजर-बसर करने वाले कैलाश नाथ यादव को आज भी भरोसा नहीं हो रहा है कि भैंसों की देखभाल करने वाली उनकी बिटिया एक दिन कामनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर उन्हें रातोंरात प्रसिद्ध कर देगी।
बातचीत में बार-बार छलक उठने वाले आंसू पोंछते हुए पिता कैलाश ने बताया कि प्रतियोगिता की तैयारी से पहले उसके खानपान पर हजारों रुपए खर्च होने थे। ऐसे में उनके सामने भैंस बेंचने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, लेकिन उन्हें इसका तनिक भी अफसोस नहीं क्योंकि बेटी ने पदक जीतकर उनका ही नहीं गांव का भी नाम रोशन कर दिया।
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गांव में है जश्न का माहौल
सोमवार को शिवपुर के दादूपुर गांव में जश्न का माहौल था। सुबह से ही पूनम के घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी एसएस मिश्र ने जब कमिश्नर की ओर से पिता कैलाश नाथ यादव को बुके भेंट किया तो उनकी आंखों से आंसू छलक उठे।
गांव की बिटिया की इस शानदार सफलता पर दादूपुर में हर कोई खुश दिखा। पूनम के पिता कैलाशनाथ के घर बधाई देने और मिठाई खाने-खिलाने का दौर सुबह से ही शुरू हो गया था।
कमिश्नर के निर्देश पर प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी एसएस मिश्रा भी दादूपुर गांव पहुंचे। उन्होंने जब कैलाश नाथ यादव को बेटी की कामयाबी की बधाई दी तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पास खड़े लोगों की भी आंखें नम हो गईं।
मिश्रा ने पूनम की कामयाबी को परिवार ही नहीं देश के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि गरीब किसान की बेटी ने वह कर दिखाया जिसकी उम्मीद नहीं थी। गांव वाले भी इसपर फूले नहीं समा रहे थे और फक्र से कह रहे थे कि ‘पूनम तह हमहनी के गांव का होनहार बिटिया बा’।
गांव की बिटिया की इस शानदार सफलता पर दादूपुर में हर कोई खुश दिखा। पूनम के पिता कैलाशनाथ के घर बधाई देने और मिठाई खाने-खिलाने का दौर सुबह से ही शुरू हो गया था।
कमिश्नर के निर्देश पर प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी एसएस मिश्रा भी दादूपुर गांव पहुंचे। उन्होंने जब कैलाश नाथ यादव को बेटी की कामयाबी की बधाई दी तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पास खड़े लोगों की भी आंखें नम हो गईं।
मिश्रा ने पूनम की कामयाबी को परिवार ही नहीं देश के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि गरीब किसान की बेटी ने वह कर दिखाया जिसकी उम्मीद नहीं थी। गांव वाले भी इसपर फूले नहीं समा रहे थे और फक्र से कह रहे थे कि ‘पूनम तह हमहनी के गांव का होनहार बिटिया बा’।
कुलाधिपति भी करेंगे सम्मानित
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली काशी विद्यापीठ बीए अंतिम वर्ष की छात्रा पूनम यादव को कुलाधिपति राजभवन में सम्मानित करेंगे।
कुलपति डा. पृथ्वीश नाग ने बताया कि कुलाधिपति ने छात्रा के बारे में पूरी जानकारी मांगी है। उन्होंने राजभवन बुलाकर पूनम को सम्मानित करने के लिए कहा है।
कुलपति ने बताया कि पूनम के बनारस आने पर कुलाधिपति को पत्र भेजकर सम्मान समारोह की तिथि मांगी जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से भी उसे सम्मानित किया जाएगा।
कुलपति डा. पृथ्वीश नाग ने बताया कि कुलाधिपति ने छात्रा के बारे में पूरी जानकारी मांगी है। उन्होंने राजभवन बुलाकर पूनम को सम्मानित करने के लिए कहा है।
कुलपति ने बताया कि पूनम के बनारस आने पर कुलाधिपति को पत्र भेजकर सम्मान समारोह की तिथि मांगी जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से भी उसे सम्मानित किया जाएगा।
पूनम का होगा भव्य स्वागत
भारोत्तोलक पूनम 4 अगस्त को स्वदेश पहुंचेंगी। यदि वह बनारस अपने घर आई तो यहां ढोल-नगाड़ों से उसका भव्य स्वागत किया जाएगा।
पिता कैलाश नाथ यादव और बहन शशि ने बताया कि उन्होंने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। परिवार वाले जहां पूनम को देखने के लिए उतावले हैं वहीं गांव के लोग उसके स्वागत के लिए। कैलाश का कहना है कि बेटी ने वह कर दिखाया जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी।
पूनम को आगे बढ़ाने में सपा नेता सतीश फौजी का भी हाथ था। पिता कैलाशनाथ बताते हैं कि फौजी से उनकी मुलाकात संत अड़गड़ानंदजी के सक्तेशगढ़ स्थित आश्रम में हुई थी। उनकी परेशानी सुनकर फौजी ने पूनम की खेल की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। पूनम ने भी पदक जीतकर उनके मान सम्मान को बुलंदी पर पहुंचा दिया।
पिता कैलाश नाथ यादव और बहन शशि ने बताया कि उन्होंने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। परिवार वाले जहां पूनम को देखने के लिए उतावले हैं वहीं गांव के लोग उसके स्वागत के लिए। कैलाश का कहना है कि बेटी ने वह कर दिखाया जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी।
पूनम को आगे बढ़ाने में सपा नेता सतीश फौजी का भी हाथ था। पिता कैलाशनाथ बताते हैं कि फौजी से उनकी मुलाकात संत अड़गड़ानंदजी के सक्तेशगढ़ स्थित आश्रम में हुई थी। उनकी परेशानी सुनकर फौजी ने पूनम की खेल की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। पूनम ने भी पदक जीतकर उनके मान सम्मान को बुलंदी पर पहुंचा दिया।
पूनम के बाद बनारस की स्वाति की किस्मत चमकी
पूनम के अलावा बनारस की ही स्वाति सिंह शायद अब अपने भाग्य को कोसना बंद कर देंगी। दिल्ली के बाद ग्लास्गो में भी वह चौथे स्थान पर रहीं। लगातार दूसरे राष्ट्रमंडल खेलों में पदक उनसे रूठ गया था। पर शायद इसे ही भाग्य कहते हैं।
स्वाति की किस्मत में पदक लिखा तो उन्हें कंपटीशन खत्म होने के चार दिन बाद भी मिल गया। अब स्वाति भी गर्व से कह सकेंगी कि वह भी कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट हैं।
जिस 53 किलो भार वर्ग में वह चौथे स्थान पर रही थीं इस वर्ग का गोल्ड जीतने वाली नाईजीरियाई वेटलिफ्टर चीका अमालाहा एक नहीं दो स्टेरायड्स के सेवन के लिए डोप में फंस गई हैं। उनका गोल्ड छिनना तय है। सिर्फ स्वाति ही खुशकिस्मत नहीं रहीं बल्कि कांस्य जीतने वाली मात्सा संतोषी को अब रजत हासिल हो सकेगा।
स्वाति की किस्मत में पदक लिखा तो उन्हें कंपटीशन खत्म होने के चार दिन बाद भी मिल गया। अब स्वाति भी गर्व से कह सकेंगी कि वह भी कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट हैं।
जिस 53 किलो भार वर्ग में वह चौथे स्थान पर रही थीं इस वर्ग का गोल्ड जीतने वाली नाईजीरियाई वेटलिफ्टर चीका अमालाहा एक नहीं दो स्टेरायड्स के सेवन के लिए डोप में फंस गई हैं। उनका गोल्ड छिनना तय है। सिर्फ स्वाति ही खुशकिस्मत नहीं रहीं बल्कि कांस्य जीतने वाली मात्सा संतोषी को अब रजत हासिल हो सकेगा।