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सिंधू ही नहीं इन खिलाड़ियों के खून में भी बहता है खेल...
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 20 Aug 2016 07:30 PM IST
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पीवी सिंधू
- फोटो : getty
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सिंधू ही नहीं इन खिलाड़ियों के खून में भी बहता है खेल...
लिएंडर पेस
- फोटो : getty
लिएंडर पेस
भारत के लिए 1996 में अटलांटा ओलंपिक में भारत के लिए टेनिस की एकल स्पर्धा में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाले लिएंडर पेस के माता-पिता भी खेलों से जुड़े रहे हैं। लिएंडर के पिता वेस पेस भारतीय हॉकी टीम में मिडफील्डर थे और वह 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे। उनकी मां जेनिफर पेस भारतीय बॉस्केटबॉल टीम सदस्य थीं। उन्होंने 1980 में एशियाई बॉस्केटबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था।
भारत के लिए 1996 में अटलांटा ओलंपिक में भारत के लिए टेनिस की एकल स्पर्धा में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाले लिएंडर पेस के माता-पिता भी खेलों से जुड़े रहे हैं। लिएंडर के पिता वेस पेस भारतीय हॉकी टीम में मिडफील्डर थे और वह 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे। उनकी मां जेनिफर पेस भारतीय बॉस्केटबॉल टीम सदस्य थीं। उन्होंने 1980 में एशियाई बॉस्केटबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था।
सिंधू ही नहीं इन खिलाड़ियों के खून में भी बहता है खेल...
अशोक कुमार
अशोक कुमार
हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार अपने पिता की परंपरा को आगे ले गए। उनके पिता ने भारत को पहली बार ओलंपिक चैंपियन बनाया, वहीं बेट अशोक ने 1975 में भारत को पहली बार हॉकी का विश्व चैंपियन बनाने में मुख्य भूमिका अदा की। अशोक देश को ओलंपिक का स्वर्ण पदक तो नहीं जिता सके लेकिन 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली हॉकी टीम के सदस्य थे।
हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार अपने पिता की परंपरा को आगे ले गए। उनके पिता ने भारत को पहली बार ओलंपिक चैंपियन बनाया, वहीं बेट अशोक ने 1975 में भारत को पहली बार हॉकी का विश्व चैंपियन बनाने में मुख्य भूमिका अदा की। अशोक देश को ओलंपिक का स्वर्ण पदक तो नहीं जिता सके लेकिन 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली हॉकी टीम के सदस्य थे।
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सिंधू ही नहीं इन खिलाड़ियों के खून में भी बहता है खेल...
हरियाणा पहलवान साक्षी मलिक, विनेश फोगट और बबीता फोगट
- फोटो : फाइल फोटो
गीता और बबीता फोगट
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली गीता फोगट ने कुश्ती में भारत को दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक दिलाया था। इसके बाद वह साल 2012 में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं। गीता को देखकर बहन बबीता भी पहलवान बन गईं। उन्होंने रियो के लिए क्वालीफाई क्वालीफाई किया था। उनके पिता महावीर सिंह भी पहलवान थे। उन्होंने ही अपनी बेटियों को पहलवानी का प्रशिक्षण दिया। महावीर के जीवन पर ही आमिर खान दंगल नाम की फिल्म बना रहे हैं।
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली गीता फोगट ने कुश्ती में भारत को दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक दिलाया था। इसके बाद वह साल 2012 में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं। गीता को देखकर बहन बबीता भी पहलवान बन गईं। उन्होंने रियो के लिए क्वालीफाई क्वालीफाई किया था। उनके पिता महावीर सिंह भी पहलवान थे। उन्होंने ही अपनी बेटियों को पहलवानी का प्रशिक्षण दिया। महावीर के जीवन पर ही आमिर खान दंगल नाम की फिल्म बना रहे हैं।
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सिंधू ही नहीं इन खिलाड़ियों के खून में भी बहता है खेल...
मिल्खा सिंह
जीव मिल्खा सिंह
उड़न सिख मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह अंतरराष्ट्रीय गोल्फ जगत में जाना-माना नाम हैं। वह आज तक के सबसे सफल भारतीय गोल्फर हैं। मिल्खा सिंह भारत के सर्वकालिक श्रेष्ठतम एथलीट्स में से एक है। वह रोम ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ के फाइनल में चौथे स्थान पर थे। हार जीत का अंतर इतना कम था कि अंतिम फैसला फोटो फिनिश के आधार पर लेना पड़ा था। और मिल्खा ओलंपिक पदक जीतने से चूक गए थे।
उड़न सिख मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह अंतरराष्ट्रीय गोल्फ जगत में जाना-माना नाम हैं। वह आज तक के सबसे सफल भारतीय गोल्फर हैं। मिल्खा सिंह भारत के सर्वकालिक श्रेष्ठतम एथलीट्स में से एक है। वह रोम ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ के फाइनल में चौथे स्थान पर थे। हार जीत का अंतर इतना कम था कि अंतिम फैसला फोटो फिनिश के आधार पर लेना पड़ा था। और मिल्खा ओलंपिक पदक जीतने से चूक गए थे।