Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य अपने समय में महानतम शिक्षकों में से एक थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गुप्त शासनकाल के दौरान वे चंद्रगुप्त के महामंत्री थे। आचार्य चाणक्य बहुत ही दूरदर्शी और महान रणनीतिकार थे। उन्होंने चाणक्य नीति जैसा महान ग्रंथ लिखा है, जिसमें लोक कल्याण की बातें सूत्रों के रूप में निहित हैं। यदि कोई व्यक्ति चाणक्य नीति में बताई गई बातों का पालन करता है तो वह अपने जीवन को सफल बना सकता है। आचार्य चाणक्य का मानना था कि विद्यार्थी जीवन एक तप के समान होता है। विद्यार्थियों के जीवन पर परिवार के साथ-साथ आसपास का परिवेश और शिक्षा का प्रभाव जरूर पड़ता है, लेकिन कई बार यदि उनके आसपास का माहौल बेहतर नहीं है और फिर भी यदि विद्यार्थियों अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं और इसके पीछे सात सूत्र काम करते हैं। इन सात सूत्रों के बारे में चाणक्य ने अपनी नीति में विस्तार से बताया है।
Chanakya Niti: इन सात सूत्रों में छिपा है विद्यार्थियों की सफलता का मूलमंत्र
Chanakya Niti:आचार्य चाणक्य का मानना था कि विद्यार्थी जीवन एक तप के समान होता है। विद्यार्थियों के जीवन पर परिवार के साथ-साथ आसपास का परिवेश और शिक्षा का प्रभाव जरूर पड़ता है।
क्रोध पर नियंत्रण
चाणक्य नीति के अनुसार जो विद्यार्थी अपने क्रोध पर काबू नहीं कर सकता, वह ज्ञान हो कर भी अज्ञानी के समान होता है। क्योंकि जब वह क्रोध में होता है तो उसके सोचने समझने की शक्ति कम हो काटी है, इसलिए विद्यार्थी को अपने क्रोध को काबू में रखने का प्रयास करना चाहिए।
न हो लोभ की भावना
लालच व्यक्ति को बुरे कर्म की ओर धकेलता है और यदि लालच मनुष्य के मन में घर कर जाए तो वह इसमें गिरता चल जाता है। इसलिए विद्यार्थियों के अंदर लोभ यानी लालच की भावना नहीं होनी चाहिए। इस पर नियंत्रण रखना हर विद्यार्थी के लिए जरूरी है। विद्यार्थियों के मन में सिर्फ एक लालच होना चाहिए और वो है ज्ञान अर्जन का।
स्वाद पर नियंत्रण
आचार्य चाणक्य के अनुसार विद्यार्थियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो उन्हें अच्छे स्वास्थ्य के साथ बुद्धि विकास में भी मदद करे। जिन छात्रों को जिह्वा का स्वाद लग जाता है उसका पढ़ने-लिखने में मन नहीं लग सकता। इसलिए विद्यार्थियों को सादा भोजन ही करना चाहिए।
श्रृंगार से रहे दूर
आचार्य चाणक्य के अनुसार विद्यार्थी जीवन में छात्रों को शृंगार आदि से दूर रहना चाहिए। क्योंकि जो बच्चे सिर्फ सजने संवरने में मन लगाएंगे उनका मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगेगा।