नहीं जानते होंगे, जल में क्यों विसर्जित करते हैं देवी देवताओं की मूर्तियों को?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा आने वाली है। मूर्तिकार सुंदर-सुंदर देवी प्रतिमा बनाने में लगे हैं। लोग इन मूर्तियों को बड़े ही आदर से घर लाएंगे और इनकी पूजा करेंगे लेकिन अगले ही दिन किसी नदी या तालाब में ले जाकर विसर्जित कर देंगे।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को जल में ही क्यों विसर्जित कर दिया जाता है। पण्डित मुरली झा बताते हैं कि इसका उत्तर शास्त्रों में है। शास्त्रों के अनुसार जल ब्रह्म का स्वरुप माना गया है। क्योंकि सृष्टि के आरंभ में और अंत में संपूर्ण सृष्टि में सिर्फ जल ही जल होता है।
पढ़ें, पुरुष क्यों पहनते हैं जनेऊ जानकर हैरान रह जाएंगे
जल बुद्घि और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसके देवता गणपति को माना गया है। जल में ही श्रीहरि का निवास है इसलिए वह नारायण भी कहलते हैं।
पढ़ें, साप्ताहिक राशिफलः जनवरी महीने का अंतिम सप्ताह कैसा रहेगा आपके लिए
माना जाता है कि जब जल में देव प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है तो देवी देवताओं का अंश मूर्ति से निकलकर वापस अपने लोक को चला जाता है यानी परम ब्रह्म में लीन हो जाता है। यही कारण है कि मूर्तियों और निर्माल को जल में विसर्जित किया जाता है।