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Lord Shiva: भगवान भोलेनाथ ने इसलिए धारण किया था भिक्षु का रूप, हनुमान जी के जन्म से जुड़ी है रोचक कथा

Tue, 15 Nov 2022 01:33 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Tue, 15 Nov 2022 01:33 PM IST
सार

 Lord Shiva:  कहा जाता है कि अपने भक्तों की रक्षा के लिए महादेव ने कई अवतार लिए हैं। देवों के देव महादेव कहे जाने वाले शिव जी ने एक एक बार भिक्षु का भी वेष धारण कर लिया था। शिव जी ने भिक्षु का भी वेश क्यों धारण किया था? इस स्टोरी में जानेंगे आप 
 

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why Lord shiva took the form of a monk know the story of lord shiva and mata anjani
भगवान भोलेनाथ ने इसलिए धारण किया था भिक्षु का रूप - फोटो : iStock

विस्तार

Hanuman Birth Story: हिंदू धर्म में भगवान शिव शंकर को सभी देवों में सबसे उच्च स्थान प्राप्त है। यही वजह है कि वे देवों के देव महादेव कहलाते हैं। शिव जी कालों के भी काल महाकाल हैं। इनकी कृपा से बड़ा से बड़ा संकट भी टल जाता है। भगवान शिव को मनुष्य तो क्या देवी-देवता, सुर-असुर सभी पूजते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव शम्भू बहुत ही आसानी से प्रसन्न हो जाने वाले देव हैं। वे केवल भाव के भूखे हैं, यदि कोई श्रद्धा पूर्वक उन्हें केवल एक लोटा जल अर्पित कर दे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। कहा जाता है कि अपने भक्तों की रक्षा के लिए महादेव ने कई अवतार लिए हैं। देवों के देव महादेव कहे जाने वाले शिव जी ने एक एक बार भिक्षु का भी वेष धारण कर लिया था। शिव जी ने भिक्षु का भी वेश क्यों धारण किया था चलिए जानते हैं... 

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माता अंजनी ने की थी कठिन तपस्या 
पौराणिक कथा के अनुसार, केसरी और माता अंजनी काफी समय से संतान सुख से वंचित थे। संतान की प्राप्ति के लिए उन्होंने ऋषि मतंग से उपाय पूछा। ऋषि मतंग ने माता अंजनी को 12 वर्षों तक भगवान शिव की तपस्या और उपवास करने को कहा। वहीं ऋषि मतंग की बात मानते हुए माता अंजनी ने बिल्कुल वैसा ही किया। उन्होंने शिव जी की कठोर तपस्या की। फिर तपस्या पूरी होने पर मतंग ऋषि ने माता अंजनी को आशीर्वाद दिया कि शिव जी जल्दी ही आशीर्वाद देने आएंगे। 
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भगवान शिव ने इसलिए धारण किया भिक्षु का वेश  
मतंग ऋषि की बात सुनकर माता अंजनी ने भगवान शिव के स्वागत और सत्कार के लिए 56 भोग बनाए। वहीं माता अंजनी की परीक्षा लेने के लिए शिव जी भिक्षु का वेश धारण कर पहुंचे। माता अंजनी ने भिक्षु को भोजन परोसा, लेकिन भिक्षु के रूप में शिव जी ने 56 भोग खाने की इच्छा जताई। माता अंजनी ने भिक्षु से कहा कि 56 भोग भगवान शिव के लिए है। इस पर भिक्षु क्रोधित हो गए और माता अंजनी पर क्रोध जताते हुए भगवान शिव को अपशब्द बोलने लगे। इस पर माता अंजनी ने भिक्षु से भगवान शिव का अपमान न करने की प्रार्थना की, लेकिन भिक्षु भगवान शिव के लिए अपशब्द कहता ही रहा। तब माता अंजनी ने अपने क्रोध पर संयम रखते हुए भिक्षु से 56 भोग खाने को दे दिया। 

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इस बात से प्रसन्न होकर भिक्षु बने महादेव अपने असली रूप में आ गए और माता अंजनी को दर्शन दिए। शिव जी ने अंजनी को आशीर्वाद दिया कि रुद्रावतार हनुमान आपके गर्भ से जन्म लेंगे, जो वेदों शास्त्रों के महान ज्ञाता होंगे। इसके बाद शिव जी के आशीर्वाद से माता अंजनी ने हनुमान जी को जन्म दिया।  

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