फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   vrat katha amlaki ekadashi 2014

होलाष्टक में इस दिन आंवले से भगवान विष्णु को करें प्रसन्न

Wed, 16 Mar 2016 05:49 PM IST
राकेश झा/ अमर उजाला, दिल्ली।
राकेश झा/ अमर उजाला, दिल्ली। Updated Wed, 16 Mar 2016 05:49 PM IST
विज्ञापन
vrat katha amlaki ekadashi 2014
इन दिनों होलाष्टक चल रहा है जो अशुभ समय माना जाता है। इस अशुभ समय को शुभ बनाने के लिए भगवान विष्णु का प्रिय व्रत एकादशी 12 मार्च को आया है। इस एकादशी का नाम है आमलकी एकादशी।
विज्ञापन

 
यह एकादशी हर साल फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को तिथि को मनाई जाती है। शास्त्रों में इस एकादशी को अक्षय नवमी के समान है शुभ फलदायी बताया गया है।

जिस तरह अक्षय नवमी में आंवले के वृक्ष की पूजा होती है उसी प्रकार आमलकी एकादशी के दिन आंवले की वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन


इस दिन आवले की पूजा क्यों होती है?
आध्यात्मिक विषयों के जानकार 'पण्डित जयगोविंद शास्त्री' बताते हैं कि अमालकी एकादशी के दिन आंवले की पूजा का महत्व इसलिए है क्योंकि इसी दिन सृष्टि के आरंभ में आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस संदर्भ में कथा है कि विष्णु की नाभि से उत्पन्न होने के बाद ब्रह्मा जी के मन में जिज्ञासा हुई कि वह कौन हैं, उनकी उत्पत्ति कैसे हुई।

इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए ब्रह्मा जी परब्रह्म की तपस्या करने लगे। ब्रह्म जी की तपस्या से प्रश्न होकर परब्रह्म भगवान विष्णु प्रकट हुए। विष्णु को सामने देखकर ब्रह्मा जी खुशी से रोने लगे।

इनके आंसू भगवान विष्णु के चरणों पर गिरने लगे। ब्रह्मा जी की इस प्रकार भक्ति भावना देखकर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। और ब्रह्मा जी के आंसूओं से आमलकी यानी आंवले का वृक्ष उत्पन्न हुआ।

भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी से कहा कि आपके आंसूओं से उत्पन्न आंवले का वृक्ष और फल मुझे अति प्रिय रहेगा। जो भी आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करेगा उसके सारे पाप समाप्त हो जाएंगे और व्यक्ति मोक्ष प्राप्ति का अधिकारी होगा।


आमलकी एकादशी व्रत विधिः
एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु एवं आंवले के वृक्ष की पूजा करें। अगर आंवले का वृक्ष उपलब्ध नहीं हो तो आंवले का फल भगवान विष्णु को प्रसाद स्वरूप अर्पित करें।

घी का दीपक जलकार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जो लोग व्रत नहीं करते हैं वह भी इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करें और स्वयं खाएं भी।

शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवले का सेवन भी पाप का नाश करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed