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Vijayadashimi 2020: जानिए कौन सी बात बनी रावण की मृत्यु का कारण

Sat, 24 Oct 2020 01:15 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Sat, 24 Oct 2020 01:15 PM IST
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vijaya dashami 2020 Why do celebrated Dussehra  know the story of shurpanakha
dussehra 2020

दशहरे को बुराई पर अच्छाई के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि के समाप्त होने के अगले दिन यानि दशमी तिथि को दशहरा का पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस बार दशहरे का पर्व 25 अक्तूबर को मनाया जाएगा। जगह-जगह बुराई स्वरुप  रावण के पुतले का दहन किया जाता है। यह त्योहार श्री राम के युग यानि त्रेतायुग से संबंधित है। रावण के विषय में उल्लेख मिलता है कि वह बहुत ही विद्वान, प्रकांड पंडित और शक्तिशाली था। किसी में भी रावण को मारने का साहस नहीं था। जानते है कि फिर वह कौन सी बात थी जो रावण की मृत्यु का कारण बनी....

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रावण की एक बहन थी जिसका नाम शूर्पनखा था। जब राम जी को वनवास मिला तब वे भाई लक्ष्मण और माता सीता के साथ वन में भटक रहे थे। उसी समय शूर्पनखा राम जी को देखकर मोहित हो गई। जिसके बाद शूर्पनखा राम जी के पास जाकर इस प्रकार कहने लगी कि इस प्रदेश में मैं स्वेच्छाधारिणी राक्षसी हूं सभी मुझसे भयभीत रहते हैं। वह अहंकार के साथ कहती है रावण मेरा भाई है। अतः मैं तुमसे विवाह करना चाहती हूं। इस पर भगवान श्री राम ने शूर्पनखा से कहा कि उनका विवाह हो चुका है और उन्होंने अपनी पत्नी सीता को वचन दिया है कि वे उनके अलावा किसी और से विवाह नहीं करेंगे। इसके बाद राम जी उसे लक्ष्मण के पास भेज देते हैं। लेकिन लक्ष्मण भी शूर्पनखा से विवाह करने को मना कर देते हैं। जिसके बाद शूर्पनखा विवाह की हठ करने लगती है। क्रोधित होकर लक्ष्मण उसके नाक-कान भंग कर देते हैं।

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तब शूर्पनखा रोते हुए अपने भाई के पास जाती है और लक्ष्मण के बारे में बताती है अपनी बहन की यह स्थिति देखकर रावण क्रोधित हो जाता है। जिसके बाद वह कई राक्षसो को भेजता है परंतु राम जी सबका वध कर देते हैं। जिसके बाद छल से रावण माता सीता का हरण कर लेता है। यही बात रावण की मृत्यु का कारण बनी।  तब भगवान राम लंका पर चढ़ाई कर देते हैं जिसके बाद दशमी के दिन रावण का वध करने के बाद लंका पर विजय प्राप्त करके राम जी माता सीता को वापस ले आते हैं। इसी उपलक्ष्य में दशहरे का त्योहार मनाया जाता है। लंका पर विजय प्राप्त करने के कारण इसे विजदशमी भी कहते हैं।

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