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घर के मंदिर में जानिए किन देवी-देवताओं की मूर्तियां रखना होता है वर्जित और क्यों ?

Thu, 01 May 2025 11:45 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 01 May 2025 11:45 AM IST
सार

घर के मंदिर में क्या हैं भगवान की मूर्तियों के रखने के नियम, नहीं होनी चाहिए ऐसी मूर्तियां

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Vastu Shastra For Home Temple Rules for Placing Idols Ghar KE Mandir Mein Kaisi Murti Nahi Rakhna Chahiye
कैसा होना चाहिए पूजा घर - फोटो : freepik

विस्तार

हिंदू धर्म में घर का मंदिर यानी पूजाघर एक ऐसा स्थान होता है जहां ईश्वर की आराधना करके सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। लेकिन पूजा स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि वहां केवल उन्हीं देवताओं की मूर्तियां या चित्र रखे जाएं जो शास्त्रों के अनुसार शुभ माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ देवताओं के स्वरूप, मूर्तियां या चित्र घर के मंदिर में नहीं रखने चाहिए क्योंकि उनकी उपस्थिति से घर में अशांति, रोग या आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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1. खंडित या टूटी हुई मूर्तियां
शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी देवी-देवता की खंडित या टूटी हुई मूर्ति को घर के मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मूर्तियों से देवी-देवताओं का वास हट जाता है और यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं। यदि कोई मूर्ति टूट जाए तो उसे सम्मानपूर्वक बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
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2. एक से अधिक शिवलिंग या गणेश प्रतिमाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार एक ही देवता की अनेक मूर्तियां एक ही स्थान पर स्थापित करना अशुभ होता है। विशेषकर शिवलिंग या गणेश जी की एक से अधिक मूर्तियां रखने से पूजा में एकाग्रता भंग होती है और फल मिलने में रुकावट आती है।

3. शनिदेव की मूर्ति या चित्र
शनिदेव को न्याय का देवता और उग्र ग्रह माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शनिदेव की पूजा विशेष विधियों से करनी चाहिए। यदि उनकी प्रतिमा या चित्र घर के पूजाघर में रख दिया जाए और पूजा विधिपूर्वक न की जाए, तो इससे शनि रुष्ट हो सकते हैं। यह परिवार में तनाव, रोग और धनहानि जैसी समस्याएं बढ़ा सकती है।

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4. भैरव बाबा की मूर्ति
कालभैरव शिव का रक्षक रूप हैं, जिनकी पूजा तांत्रिक और विशेष नियमों से की जाती है। घर के मंदिर में उनकी मूर्ति रखना गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है, क्योंकि साधारण व्यक्ति से पूजा में त्रुटि हो सकती है, जिससे अनचाही बाधाएं उत्पन्न होती हैं।

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5. मां काली या चामुंडा की उग्र मूर्तियां
मां काली और चामुंडा का स्वरूप रौद्र और उग्र होता है। इनकी पूजा साधना और विशेष मंत्रों के साथ की जानी चाहिए। यदि इनके उग्र स्वरूप की मूर्ति या चित्र घर के मंदिर में रखे जाएं और उपयुक्त पूजन न हो, तो यह मानसिक अशांति और भय का कारण बन सकती हैं।



6. तांडव मुद्रा में नटराज की मूर्ति
भगवान शिव के तांडव रूप को ऊर्जा और संहार का प्रतीक माना जाता है। यह रूप अत्यधिक उर्जावान होता है, जो घर में अस्थिरता ला सकता है। इसलिए तांडव मुद्रा में नटराज की मूर्ति घर के मंदिर में नहीं रखनी चाहिए।
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