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शिक्षक दिवस 2020: हिन्दू संस्कृति के प्रति ऐसा था डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का चिंतन
Sat, 05 Sep 2020 07:36 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Sat, 05 Sep 2020 07:36 AM IST
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शिक्षक दिवस 2020
- फोटो : Facebook/All India Radio News
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राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है। शिक्षक के प्रति समर्पण और सम्मान का यह दिन भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। वे एक महान शिक्षाविद् और दार्शनिक थे। हिन्दू धर्म में उनकी गहरी आस्था थी। हालांकि हिंदू धर्म के प्रति उनका दर्शन और उनका चिंतन बेहद अलग था। शिक्षक दिवस के इस अवसर पर जानते हैं डॉ. राधाकृष्णन का हिन्दू संस्कृति के प्रति चिंतन क्या था।
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डॉ. राधाकृष्णन बचपन से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे। किताबों के प्रति उनका गहरा लगाव था। यही कारण था कि उन्होंने हिन्दू धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों का गहन अध्ययन किया और उनकी अपने शब्दों में व्याख्या की। दरअसल, डॉ. राधाकृष्णन हिन्दू धर्म को बेहद गहराई से समझना चाहते थे। वे जानना चाहते थे कि ऐसी कौनसी संस्कृति है जिसके अंदर चेतना समाहित है। उन्होंने जब अपनी इस जिज्ञासा का अध्ययन करना प्रारम्भ किया तो उन्हें हिन्दू संस्कृति में चेतना का आभास हुआ। उन्होंने अपने अध्ययन में पाया कि हिन्दू धर्म कि नींव सबसे पुरानी है जो निरंतर काल से चली आ रही है।
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यही नहीं हर बात जो ग्रंथों में कही गई है उसके पुख्ता प्रमाण हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने ये जान लिया था कि भारतीय संस्कृति काफी समृद्ध है। दूसरे धर्मों के लोगों के तर्क और विचार हिन्दू संस्कृति के लिए गलत और निराधार हैं। हिंदू धर्म का विशद् अध्ययन करने के बाद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने ये जान लिया था कि जीवन काफी छोटा है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। उनका मानना था कि जीवन मे सुख-दुख बने रहते हैं और व्यक्ति को समभाव से रहना चाहिए।
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डॉ. सर्वपल्ली के अनुसार मृत्यु एक अटल सत्य है जिसे टाला नहीं जा सकता, अमीर-गरीब सभी को यह आनी है। मृत्यु ही एक ऐसी है जो कभी किसी तरह का भेदभाव किसी के साथ भी नहीं करती है। उनके अनुसार सच्चा ज्ञान वही है जो अंदर के अज्ञान को मिटा दे। मन-मस्तिष्क में एक नया जोश और उमंग भर दे। आलोचनाएं शुद्धिकरण का कार्य करती है। उन्होंने संपूर्ण विश्व को एक विद्यालय माना और शिक्षा पर हमेशा बल दिया। उनका मानना था कि शिक्षा द्वारा ही विकास संभव है। शिक्षा से ही मानव अपने मन-मस्तिष्क का उपयोग बेहतर ढंग से कर सकता है। शिक्षा व्यवस्था संपूर्ण विश्व को एक मान कर ही होनी चाहिए। इस बात पर उनका पुरजोर मत था। बेहतरीन शिक्षा से ही विश्व मे शांति व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय थे। वे छोटी-छोटी आनंदमय कथाओं से बच्चों को मंत्रमुग्ध कर दिया करते थे। उनमें ज्ञान का भंडार था वो जहां कही भी जाते वहां ज्ञान कि धाराएं बह जाती थीं। यही कारण है कि उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप मे मनाया जाता है।