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Surya Grahan 2020: सर्वप्रथम महर्षि अत्रि ने सूर्य को ग्रहण से मुक्ति दिलाई
Thu, 18 Jun 2020 05:45 PM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 18 Jun 2020 05:45 PM IST
सार
- 21 जून को वलयाकार सूर्य ग्रहण लगेगा।
- यह सूर्य ग्रहण साल का पहला सूर्य ग्रहण है।
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खंडग्रास सूर्य ग्रहण 2020
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विस्तार
ऋग्वेद के इस मंत्र 'एत त्वा सूर्य स्वर्भानुस्तमसा विध्यदासुरः। अक्षेत्र विद्यथा मुग्धो भुवनान्य दीधयुः।। में यह वर्णन मिलता है कि हे सूर्य ! असुर राहु ने आप पर आक्रमण करके अंधकार से जो आपको विद्ध कर दिया है उससे मनुष्य आपके रूप को समग्रता से देख नहीं पाए और अपने अपने कार्य क्षेत्रों में ठगे से हो गए। तब महर्षि अत्रि ने अपने अर्जित मंत्र शक्ति सामर्थ्य से अनेक मंत्रों द्वारा आप पर पड़ रही राहू की काली छाया को दूर कर आप का उद्धार किया। इंद्र ने भी महर्षि अत्रि की सहायता से राहु की माया से सूर्य की रक्षा की। इस प्रकार ग्रहण की छाया को दूर करने में समर्थ महर्षि अत्रि के संधान से अलौकिक प्रभाव का वर्णन वेद के अनेक मंत्रों से प्राप्त होता है। इस प्रकार सूर्य को ग्रहण से मुक्ति दिलाने के लिए सर्वप्रथम सर्वसमर्थ महर्षि अत्रि ही आचार्य माने गए हैं।
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अपने भ्रमण पथ पर चलते हुए चंद्रमा अमावस्या को सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाते हैं और कभी-कभी तो तीनों एक सीध में होते हैं। तब सूर्य के प्रकाश को ढक लेते हैं जिससे सूर्यग्रहण हो जाता है। चंद्रमा पृथ्वी के उपग्रह और अपार दर्शक हैं जो स्वयं प्रकाशक न होने के कारण अप्रकाशित पिंड हैं। ये पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं ये कई बार ये पृथ्वी के इतने करीब आ जाते हैं कि उनके और बीच की दूरी का अंतर 121000 मील ही रह जाता है और कभी कभी इतने दूर चले जाते हैं कि इनके बीच की दूरी का अंतर 253000 हो जाता है।
अपने भ्रमण पथ पर चलते हुए चंद्रमा अमावस्या को सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाते हैं। कभी कभी तो तीनो बिलकुल एक सीध में आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेते हैं उस समय चंद्रमा का अप्रकाशित भाग हमारी ओर पड़ता है और उनकी हलकी परछाईं पृथ्वी पर पड़ती है ऐसे में सूर्य पृथ्वी के जितने भाग पर घनी छाया रहने से दिखाई नहीं देते उतने भाग पर सूर्य ग्रहण होता है । जब ये तीनों पूर्णतः एक सीध में आकर सूर्य के पूर्ण प्रकाश को ही ढक लेते हैं तब खग्रास अथवा पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जाता है। यदि ये एक सीध में आने से कुछ बच जाएँ तो खंडग्रास सूर्य ग्रहण होता है। जब इन तीनों के एक सीध में आने का कुछ अंश रह जाय तो कंकड़ सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
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इस दिन संयोगवश रविवार का दिन भी हो तो चूडामणि ग्रहण कहा जाएगा जिसमें मध्य जप, तप, साधना का फल अमोघ कहा गया है 21 जून को पड़ने वाले इस कंकड़ सूर्य ग्रहण के दिन रविवार है अतः इस दिन ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमः शिवाय या ॐ नमो खखोल्काय का जप तुलसी अथवा रुद्राक्ष की माला से जप करना श्रेष्ठ फलदाई रहेगा।
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अपने भ्रमण पथ पर चलते हुए चंद्रमा अमावस्या को सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाते हैं। कभी कभी तो तीनो बिलकुल एक सीध में आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेते हैं उस समय चंद्रमा का अप्रकाशित भाग हमारी ओर पड़ता है और उनकी हलकी परछाईं पृथ्वी पर पड़ती है ऐसे में सूर्य पृथ्वी के जितने भाग पर घनी छाया रहने से दिखाई नहीं देते उतने भाग पर सूर्य ग्रहण होता है । जब ये तीनों पूर्णतः एक सीध में आकर सूर्य के पूर्ण प्रकाश को ही ढक लेते हैं तब खग्रास अथवा पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जाता है। यदि ये एक सीध में आने से कुछ बच जाएँ तो खंडग्रास सूर्य ग्रहण होता है। जब इन तीनों के एक सीध में आने का कुछ अंश रह जाय तो कंकड़ सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
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