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लक्ष्मीजी का ही अंश है श्रीयंत्र, जानिए घर में रखने के लाभ और कथा
Sat, 03 Feb 2024 08:58 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 03 Feb 2024 08:58 AM IST
सार
वेदों के अनुसार श्रीयंत्र में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। विधिवत श्रीयंत्र की पूजा,उपासना से प्राणी को सभी सुख प्राप्त होते हैं,धन की घर में कमी नहीं रहती।
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श्रीयंत्र की स्थापना से कारोबार में सफलता, समृद्धि, आर्थिक मजबूती और पारिवारिक सुख प्राप्त होते हैं।
विस्तार
यंत्रों में सबसे अधिक चमत्कारिक और शीघ्र असर दिखाने वाला सर्वश्रेष्ठ यंत्र श्रीयंत्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलियुग में श्रीयंत्र कामधेनु के समान है। इसकी स्थापना और पूजा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और जातक पर कृपा बनाए रखती हैं,अर्थात चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। इसलिए इसे श्रीयंत्र कहते हैं।
हिंदू धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि जिस घर में श्रीयंत्र की स्थापना होती है और उसकी नियम अनुसार पूजा पाठ की जाती है उस घर में अष्ट लक्ष्मी का वास होता है। मान्यता है कि श्रीयंत्र माता लक्ष्मी का ही एक अंश है, इसलिए इसमें महा लक्ष्मी का वास होता है। ऐसा भी माना जाता है कि श्रीयंत्र जिस जगह पर भी होता है, वहां का वातावरण शुद्ध और पवित्र हो जाता है। ऐसा होने से माता लक्ष्मी के आगमन में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न नहीं हो पाता, इसलिए घरों में श्रीयंत्र की स्थापना करना लाभदायक माना जाता है। श्रीयंत्र की स्थापना से कारोबार में सफलता, समृद्धि, आर्थिक मजबूती और पारिवारिक सुख प्राप्त होते हैं।
श्रीयंत्र का महत्व और वास्तुदोष निवारण
वेदों के अनुसार श्रीयंत्र में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। विधिवत श्रीयंत्र की पूजा,उपासना से प्राणी को सभी सुख प्राप्त होते हैं,धन की घर में कमी नहीं रहती। वास्तुदोष निवारण में इस यंत्र की कोई सानी नहीं है। इस यंत्र को पूजा स्थल पर रखा जाता है। स्फटिक के श्रीयंत्र को समस्त प्रकार के श्रीयंत्रों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वास्तु निवारण के लिए स्फटिक श्री यंत्र श्रेष्ठतम माना जाता है। इसकी पूजा-साधना करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए और मन में पूर्ण श्रद्धा का भाव रखना चाहिए। मान्यता है कि इस यंत्र को घर में स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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श्रीयंत्र की उत्पत्ति
श्रीयंत्र की उत्पत्ति के सम्बन्ध में मान्यता है कि एक बार कैलाश मानसरोवर के पास आदि शंकराचार्य ने कठोर तप करके शिवजी को प्रसन्न किया। जब शिवजी ने वर मांगने को कहा,तो शंकराचार्य ने विश्व कल्याण का उपाय पूछा।शिवजी ने शंकराचार्य को साक्षात लक्ष्मीस्वरूप श्री यंत्र तथा श्री सूक्त के मंत्र प्रदान किए।
श्रीयंत्र से जुडी कथा
श्रीयंत्र के प्रभाव के बारे में एक पौराणिक कथा है कि एक बार लक्ष्मीजी पृथ्वी से अप्रसन्न होकर वैकुण्ठ चली गईं। परिणामस्वरूप पृथ्वी पर अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गईं।तब महर्षि वशिष्ठ ने भगवान् विष्णु की सहायता से लक्ष्मी को मनाने के प्रयास किए,लेकिन विफल रहे।इस पर देवगुरु वृहस्पति ने लक्ष्मी को खींचने का एकमात्र उपाय श्री यंत्र बताया।श्री यंत्र की आराधना से लक्ष्मीजी पृथ्वी पर तुरंत लौट आईं और कहा-'श्री यंत्र ही मेरा आधार है तथा इसमें मेरी आत्मा निवास करती है।इसलिए मुझे आना ही पड़ा।
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हिंदू धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि जिस घर में श्रीयंत्र की स्थापना होती है और उसकी नियम अनुसार पूजा पाठ की जाती है उस घर में अष्ट लक्ष्मी का वास होता है। मान्यता है कि श्रीयंत्र माता लक्ष्मी का ही एक अंश है, इसलिए इसमें महा लक्ष्मी का वास होता है। ऐसा भी माना जाता है कि श्रीयंत्र जिस जगह पर भी होता है, वहां का वातावरण शुद्ध और पवित्र हो जाता है। ऐसा होने से माता लक्ष्मी के आगमन में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न नहीं हो पाता, इसलिए घरों में श्रीयंत्र की स्थापना करना लाभदायक माना जाता है। श्रीयंत्र की स्थापना से कारोबार में सफलता, समृद्धि, आर्थिक मजबूती और पारिवारिक सुख प्राप्त होते हैं।
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श्रीयंत्र का महत्व और वास्तुदोष निवारण
वेदों के अनुसार श्रीयंत्र में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। विधिवत श्रीयंत्र की पूजा,उपासना से प्राणी को सभी सुख प्राप्त होते हैं,धन की घर में कमी नहीं रहती। वास्तुदोष निवारण में इस यंत्र की कोई सानी नहीं है। इस यंत्र को पूजा स्थल पर रखा जाता है। स्फटिक के श्रीयंत्र को समस्त प्रकार के श्रीयंत्रों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वास्तु निवारण के लिए स्फटिक श्री यंत्र श्रेष्ठतम माना जाता है। इसकी पूजा-साधना करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए और मन में पूर्ण श्रद्धा का भाव रखना चाहिए। मान्यता है कि इस यंत्र को घर में स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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श्रीयंत्र की उत्पत्ति
श्रीयंत्र की उत्पत्ति के सम्बन्ध में मान्यता है कि एक बार कैलाश मानसरोवर के पास आदि शंकराचार्य ने कठोर तप करके शिवजी को प्रसन्न किया। जब शिवजी ने वर मांगने को कहा,तो शंकराचार्य ने विश्व कल्याण का उपाय पूछा।शिवजी ने शंकराचार्य को साक्षात लक्ष्मीस्वरूप श्री यंत्र तथा श्री सूक्त के मंत्र प्रदान किए।
श्रीयंत्र से जुडी कथा
श्रीयंत्र के प्रभाव के बारे में एक पौराणिक कथा है कि एक बार लक्ष्मीजी पृथ्वी से अप्रसन्न होकर वैकुण्ठ चली गईं। परिणामस्वरूप पृथ्वी पर अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गईं।तब महर्षि वशिष्ठ ने भगवान् विष्णु की सहायता से लक्ष्मी को मनाने के प्रयास किए,लेकिन विफल रहे।इस पर देवगुरु वृहस्पति ने लक्ष्मी को खींचने का एकमात्र उपाय श्री यंत्र बताया।श्री यंत्र की आराधना से लक्ष्मीजी पृथ्वी पर तुरंत लौट आईं और कहा-'श्री यंत्र ही मेरा आधार है तथा इसमें मेरी आत्मा निवास करती है।इसलिए मुझे आना ही पड़ा।