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Sita Navami 2020: कब है सीता नवमी, जानिए तिथि एवं मुहूर्त
Thu, 30 Apr 2020 03:52 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Thu, 30 Apr 2020 03:52 AM IST
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Sita Navami 2020
- फोटो : sita
Sita Navmi 2020: सीता नवमी का पर्व राजा जनक की पुत्री एवं भगवान श्रीराम की पत्नि माता सीता का प्राकट्योत्सव है। इसे जानकी नवमी पर्व भी कहते हैं। हिन्दू धार्मिक आस्था के अनुसार यह महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन माता सीता सहित भगवान राम की पूजा की जाती है एवं व्रत उपवास रखा जाता है। आइए जानते हैं सीता नवमी कब है और इसका मुहूर्त का समय क्या होगा।
कब है सीता नवमी 2020? (Sita Navami 2020 Date)
हिन्दू पंचांग के अनुसार, माता सीता का प्राकट्य त्रेतायुग में वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। इस साल यह तिथि 2 मई को पड़ रही है। इसलिए सीता नवमी का पर्व 2 मई को है।
सीता नवमी 2020 का मुहूर्त
सीता नवमी मुहूर्त - सुबह 10:58 से दोपहर 01:38 बजे तक (2 मई 2020)
कुल अवधि - 02 घंटे 40 मिनट
नवमी तिथि प्रारंभ - दोपहर 01:26 बजे से (01 मई 2020)
नवमी तिथि समाप्त - सुबह 11:35 तक (02 मई 2020)
ऐसे हुआ था माता सीता का जन्म
वाल्मिकी रामायण के अनुसार, एक बार मिथिला में पड़े भयंकर सूखे से राजा जनक बेहद परेशान हो गए थे, तब इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और धरती पर हल चलाने का सुझाव दिया। ऋषि के सुझाव पर राजा जनक ने यज्ञ करवाया और उसके बाद राजा जनक धरती जोतने लगे। तभी उन्हें धरती में से सोने की खूबसूरत संदूक में एक सुंदर कन्या मिली। राजा जनक की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उस कन्या को हाथों में लेकर उन्हें पिता प्रेम की अनुभूति हुई। राजा जनक ने उस कन्या को सीता नाम दिया और उसे अपनी पुत्री के रूप में अपना लिया।
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कब है सीता नवमी 2020? (Sita Navami 2020 Date)
हिन्दू पंचांग के अनुसार, माता सीता का प्राकट्य त्रेतायुग में वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। इस साल यह तिथि 2 मई को पड़ रही है। इसलिए सीता नवमी का पर्व 2 मई को है।
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सीता नवमी 2020 का मुहूर्त
सीता नवमी मुहूर्त - सुबह 10:58 से दोपहर 01:38 बजे तक (2 मई 2020)
कुल अवधि - 02 घंटे 40 मिनट
नवमी तिथि प्रारंभ - दोपहर 01:26 बजे से (01 मई 2020)
नवमी तिथि समाप्त - सुबह 11:35 तक (02 मई 2020)
ऐसे हुआ था माता सीता का जन्म
वाल्मिकी रामायण के अनुसार, एक बार मिथिला में पड़े भयंकर सूखे से राजा जनक बेहद परेशान हो गए थे, तब इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और धरती पर हल चलाने का सुझाव दिया। ऋषि के सुझाव पर राजा जनक ने यज्ञ करवाया और उसके बाद राजा जनक धरती जोतने लगे। तभी उन्हें धरती में से सोने की खूबसूरत संदूक में एक सुंदर कन्या मिली। राजा जनक की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उस कन्या को हाथों में लेकर उन्हें पिता प्रेम की अनुभूति हुई। राजा जनक ने उस कन्या को सीता नाम दिया और उसे अपनी पुत्री के रूप में अपना लिया।
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