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Navratri 2020: क्यों मनाते हैं नवरात्रि, क्या है इसका पौराणिक महत्व

Thu, 08 Oct 2020 07:04 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 08 Oct 2020 07:04 AM IST
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shardiya  navratri 2020 october why is it celebrated know the significance history and pauranik katha
navratri 2020

नवरात्रि के दिनों में नौ दिनों तक मां के अलग-अलग नौ स्वरुपों की आराधना की जाती है। वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं। लेकिन उसमें से दो नवरात्रि गुप्त होती हैं, जबकि साधारण जन के द्वारा चैत्र और शारदीय नवरात्रि मनाई जाती हैं। इन नौं दिनों तक लोग मां को अपने घर में विराजते हैं। इसबार शारदीय अधिक मास (जिसे मलमास या पुरुषोत्म मास भी कहते हैं) के कारण नवरात्रि एक माह बिलंब से मनाई जाएगी। इस बार नवरात्रि का त्योहार 17 अक्टूबर से आरंभ होकर 25 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। जानते हैं कि क्यों मनाई जाती है नवरात्रि, क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा...

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मां दुर्गा की पूजा के लिए किसी समय की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन नवरात्रि का समय मां की पूजा के लिए विशेष माना गया है। नवरात्रि मनाने के पीछे का प्रकृति कारण यह माना जाता है कि इस समय मौसम परिवर्तित होता है। इसलिए जब हम नौं दिनों तक व्रत करते हैं तो शरीर को ऋतु के अनुसार ढलने का समय मिल जाता है। जो हमारे स्वास्थ के लिए अच्छा माना जाता है। जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक महत्व
 

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नवरात्रि मनाने के विषय में दो कथाएं कथा मिलती हैं एक कथा रामनवमी से संबंधित है तो दूसरी कथा महिषासुर के वध से संबंधित है। प्रथम कथा के अनुसार महिषासुर नाम का राक्षस था जो ब्रह्मा जी का उपासक था। अपने तप के बल पर उसने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि कोई मनुष्य, देवता या दानव उसका अंत न कर सके। अपने इस वरदान के कारण वह निर्दयता से तीनों लोकों में आतंक मचाने लगा। देवता और ऋषि-मुनि सभी उसके कृत्यों से अत्यन्त परेशान हो गए। तब सृष्टि के रचियता ब्रह्मा, पालनकर्ता विष्णु और देवों के देव महादेव ने अपनी शक्तियों को एक साथ करके मां दुर्गा को उत्पन्न किया। मांदुर्गा और महिषासुर के बीच पूरे नौ दिनों तक युद्ध चला। जिसके पश्चात् मां दुर्गा ने उस राक्षस का अंत कर दिया और सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।

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दूसरी कथा के अनुसार राम जी लंका पर आक्रमण करने से पहले रावण से युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे। तब उन्होंने रामेश्वरम में नौ दिनों तक मां की पूजा आराधना की। जिसके  बाद राम जी ने लंका पर विजय प्राप्त की। इसलिए नवरात्रि के बाद दशहरा (विजयदशमी) का त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत के रुप में मनाया जाता है।

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