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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Shani Pradosh Vrat 2021 18 sept muhurat vrat vidhi and significance katha

Shani Pradosh Vrat 2021: शनि प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत विधि और कथा

Sat, 18 Sep 2021 07:52 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 18 Sep 2021 07:52 AM IST
सार

प्रदोष व्रत में भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना की जाती है। जबकि शनि प्रदोष व्रत में शिव-पार्वती की पूजा के साथ-साथ शनि देव की भी पूजा का विधान है। ऐसा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है।

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Shani Pradosh Vrat 2021 18 sept muhurat vrat vidhi and significance katha
शनि प्रदोष व्रत सितंबर 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रदोष व्रत 18 सितंबर शनिवार को है। यह भाद्रपद माह का दूसरा और आखिरी शनि प्रदोष व्रत है। हिन्दू पंचांग प्रत्येक माह में त्रयोदशी (शुक्ल-कृष्ण पक्ष) तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना की जाती है। जबकि शनि प्रदोष व्रत में शिव-पार्वती की पूजा के साथ-साथ शनि देव की भी पूजा का विधान है। ऐसा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है शाप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ प्रभाव से चंद्रदेव को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। इस व्रत को रखने वाले भक्तों के जीवन से दु:ख दरिद्रता भी दूर होती है। इस दिन प्रदोष काल में विधिवत्त तरीके से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है, सब संकट दूर हो जाते हैं और मान-सम्मान बढ़ता है।

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शनि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - 18 सितंबर सुबह 06 बजकर 54 मिनट से 
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 19 सितंबर को सुबह 05 बजकर 59 मिनट

प्रदोष व्रत की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें। शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर अथवा घर पर ही बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि से भगवान शिव की पूजा करें। शिवजी की कृपा पाने के लिए भगवान शिव के मन्त्र ॐ नमः शिवाय का मन ही मन जप करते रहें। प्रदोष बेला में फिर से भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने के बाद गंगाजल मिले हुए शुद्ध जल से भगवान का अभिषेक करें। शिवलिंग पर शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि अर्पित करें। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें एवं शिव चालीसा का पाठ करें। तत्पश्चात कपूर प्रज्वलित कर भगवान की आरती कर भूल-चूक की क्षमा मागें।
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प्रदोष व्रत कथा
प्राचीन समय में एक नगर में एक सेठ अपने परिवार के साथ निवास करता था। विवाह के काफी समय बाद भी उसे संतान सुख नहीं मिला। इससे सेठ और सेठानी दुखी थे। एक दिन दोनों ने तीर्थ यात्रा पर जाने का फैसला किया। शुभ मुहूर्त में दोनों तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े। रास्ते में एक महात्मा मिले। दोनों ने उस महात्मा से आशीष लिया। ध्यान से विरक्त होने के बाद उस साधु ने दोनों की बातें सुनीं। फिर दोनों को शनि प्रदोष व्रत करने का सुझाव दिया। तीर्थ यात्रा से आने के बाद उन दोनों ने विधि विधान से शनि प्रदोष का व्रत किया। भगवान शिव की पूजा की। कुछ समय बाद सेठानी मां बनी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। शनि प्रदोष व्रत के प्रभाव से उन दोनों को संतान की प्राप्ति हुई।
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उपाय
शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए शनि प्रदोष के दिन शनि स्त्रोत का पाठ करें और इस दिन कम से कम शनि मंत्र का एक माला जाप करें।

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