शनि का नाम आते ही लोगों के मन में तरह-तरह का भय और चिंता सताने लगती है। शनि को लेकर आम धारणा है कि शनि एक खराब ग्रह हैं। इनकी क्रूर द्दष्टि पड़ते ही जातक के बुरे दिन आ जाते हैं। लेकिन कर्म के देवता शनि ऐसे ग्रह नहीं है। शनि व्यक्ति को उसके कर्मो के हिसाब से अच्छा या बुरा फल प्रदान करते है। शनि की शुभ छाया पड़ते ही व्यक्ति राजा के समान ऐशो आराम की जिंदगी बीताने लगता है। उसके जीवन में किसी भी प्रकार की कोई भी कमी नहीं होती।
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वैदिक ज्योतिष में शनि को मंद गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। शनि लगभग ढाई सालों में एक राशि से दूसरी राशि में जाता है। वहीं एक राशि में दोबारा आने में शनि को 30 वर्षों का लंबा समय लगता है। ऐसे में शनि हर एक राशि में तीस वर्षों में आते हैं। शनि की साढे़साती और ढैय्या का प्रकोप भी जातकों पर लगता है। शनि किसी भी व्यक्ति के गलत कर्मों पर उसे सजा और अच्छे कार्य करने पर इनाम भी देते हैं।
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शनि कैसे किसी जातक पर मेहरबान होते हैं कि अचानक किसी व्यक्ति की परेशानियां कम होती चली जाती है। अचानक उसे हर एक कार्य में सफलता मिलती जाती है। उसकी जेब हमेशा पैसों से भरा रहने लगता है। आइए जानते हैं।
शनि अगर किसी जातक की कुंडली में तीसरे, छठें, दसवें या ग्यारहवें भाव में बैठे तो शनि हमेशा शुभ फल प्रदान करते हैं।
शनि अगर जातक की कुंडली में 1,2, 5 या 7वें भाव में हों तो अशुभ फल मिलते हैं। इसके अलावा शनि सबसे ज्यादा 4, 8 और 12वें भाव में अशुभ फल देते हैं।