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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Sawan Shivratri 2022 date pujan vidhi and lord shiva aarti

Sawan Shivratri 2022: सावन शिवरात्रि पर मंगला गौरी व्रत का अद्भुत संयोग, इस आरती से बरसेगी महादेव की कृपा

Tue, 26 Jul 2022 10:08 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Tue, 26 Jul 2022 10:08 AM IST
सार

Sawan Shivratri 2022: इस साल सावन शिवरात्रि पर मंगला गौरी व्रत का भी संयोग बन रहा है। इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने से शिव जी के साथ मां पार्वती की भी कृपा प्राप्त होगी। 

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Sawan Shivratri 2022 date pujan vidhi and lord shiva aarti
Mahashivratri 2022 - फोटो : iStock

विस्तार

Sawan Shivratri 2022: आज यानी 26 जुलाई को सावन माह की शिवरात्रि है। वैसे तो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन सावन में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। सावन शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ का रूद्राभिषेक या जलाभिषेक करने का बहुत महत्व है। इस बार सावन शिवरात्रि पर खास संयोग बन रहा है। इस माह में जितना महत्व सोमवार व्रत का है, उतना ही मंगलवार व्रत का भी है। सावन मास के मंगलवार व्रत माता पार्वती को समर्पित माने गए हैं। इस दिन मां मंगला गौरी व्रत का रखा जाता है। ऐसे में इस साल सावन शिवरात्रि पर मंगला गौरी व्रत का भी संयोग बन रहा है। इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने से शिव जी के साथ मां पार्वती की भी कृपा प्राप्त होगी। साथ ही पूजा के दौरान शिव जी आरती करने आपकी सभी मनोकामना पूरी हो जाएंगी। यहां शिव जी की आरती लिरिक्स दी जा रही है, जिसके जरिए आप पूजा के दौरान आरती पढ़ सकते हैं...    

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शिवजी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

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