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Sawan 2025: श्रावण मास में हरे वस्त्रों को पहनने का क्या है महत्व, जानिए शिव-शक्ति से इसका संबंध

Tue, 15 Jul 2025 11:57 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 15 Jul 2025 11:57 AM IST
सार

सावन का प्रत्येक दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है और भक्तों को शिव के सान्निध्य का विशेष अवसर प्रदान करता है। विशेष रूप से महिलाएं इस मास में हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां, बिंदी और मेहंदी जैसे श्रृंगार करती हैं।

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Sawan 2025 Green Colour Significance Hara Rang Kyon Pehnte Hai Know Spiritual Connection To Shiv Shakti
सावन में हरे रंग का महत्व - फोटो : adobe stock

विस्तार

सावन का महीना सनातन धर्म में विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना के लिए जाना जाता है। यह मास वर्षा, हरियाली और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। सावन का प्रत्येक दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है और भक्तों को शिव के सान्निध्य का विशेष अवसर प्रदान करता है। विशेष रूप से महिलाएं इस मास में हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां, बिंदी और मेहंदी जैसे श्रृंगार करती हैं।
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यह श्रृंगार केवल सौंदर्य का साधन नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और देवी पार्वती के प्रति समर्पण का प्रतीक भी होता है। माना जाता है कि सावन में किया गया धार्मिक आचरण शीघ्र फलदायी होता है और देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यह परंपरा गहराई से जुड़ी हुई है। आइए जानते हैं सावन में महिलाओं द्वारा हरा रंग पहनने के पीछे छिपे आध्यात्मिक कारण और धार्मिक मान्यताएं।
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1. हरियाली और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक
सावन का महीना वर्षा ऋतु का प्रतीक है। इस समय पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं, खेतों में नई फसलें लहलहाने लगती हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है। महिलाएं हरा रंग पहनकर इस प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्धि का स्वागत करती हैं। यह रंग जीवन, ऊर्जा और आशा का प्रतीक है। हरे वस्त्र धारण कर महिलाएं प्रकृति के इस चक्र में भागीदारी का भाव प्रकट करती हैं।
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2. सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरा रंग सौभाग्य, समृद्धि और शांति का प्रतीक होता है। विवाहित महिलाएं सावन में हरी चूड़ियां, साड़ी और मेहंदी लगाकर भगवान शिव और माता पार्वती से अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। कुंवारी कन्याएं भी हरा रंग धारण कर अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।

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3. शिव-पार्वती की कथा से संबंध
पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था, जो श्रावण मास में ही पूर्ण हुआ था। उनके इस तप के प्रतीक स्वरूप सावन में विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती को भी हरा रंग प्रिय है, इसलिए महिलाएं इस रंग को पहनकर देवी को प्रसन्न करने का प्रयास करती हैं।


4. शीतलता और मन की शांति का प्रतीक
हरा रंग मन और शरीर को शांति प्रदान करता है। यह रंग आंखों को ठंडक देता है और मानसिक तनाव को कम करता है। सावन में लगातार वर्षा और नमी से वातावरण भारी हो जाता है, ऐसे में हरे रंग के वस्त्र पहनना मन को प्रसन्न रखने में सहायक होता है।

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5. लोक परंपराओं और उत्सवों का हिस्सा
सावन में झूला, लोकगीत, कजरी, तीज जैसे त्योहारों की भरमार होती है। इन सभी में महिलाओं के श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। इन अवसरों पर हरे रंग का श्रृंगार पहनकर महिलाएं सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन करती हैं और समाज में सौहार्द और उल्लास का वातावरण बनाती हैं।

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