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Mangala Gauri Vrat 2025: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानिए पूजाविधि, मंत्र और व्रत नियम

Tue, 15 Jul 2025 06:24 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 15 Jul 2025 06:24 AM IST
सार

Mangala Gauri Vrat 2025: आज, 15 जुलाई को सावन माह का पहला मंगला गौरी व्रत है। यह व्रत देवी पार्वती को समर्पित है, जिन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।

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Mangala Gauri Vrat 2025 Date Puja Vidhi Mantra Katha in Hindi Mangala Gauri Vrat Kab Hai
मंगला गौरी व्रत 2025 - फोटो : Instagram

विस्तार

Mangala Gauri Vrat 2025: सावन मास में पड़ने वाले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है। यह व्रत विशेषकर नवविवाहित स्त्रियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वर्ष 2025 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 15 जुलाई, मंगलवार को रखा जाएगा। यह व्रत देवी पार्वती को समर्पित है, जिन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इस व्रत का पालन कर स्त्रियां देवी गौरी की कृपा प्राप्त करती हैं, जिससे उन्हें अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु, सुखमय दांपत्य जीवन और संतान सुख की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करने वाली स्त्री का जीवन संकटों से मुक्त और सुख-समृद्धि से भर जाता है।
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मंगला गौरी व्रत का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, मंगला गौरी व्रत सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह व्रत स्त्रियों को न केवल वैवाहिक जीवन की स्थिरता देता है, बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी प्रदान करता है। मान्यता है कि जिन कन्याओं की शादी में बाधा आती है या वैवाहिक जीवन में अशांति रहती है, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए। इससे पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है और दांपत्य जीवन सुखमय होता है।
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पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत के दिन व्रती स्त्री प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती है। फिर घर के पूजन स्थान को गंगाजल अथवा गोमूत्र से शुद्ध किया जाता है। एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले कपड़े को बिछाकर उस पर मां गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। देवी को हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, नारियल, मिठाई, फल, गेहूं, पान, सुपारी और सोलह श्रृंगार की वस्तुएं जैसे चूड़ियां, बिंदी, कंघी, सिंदूर आदि अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद गेहूं से बने दीपों की कतार सजाकर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, जो इस व्रत का विशेष अंग है। फिर देवी को भोग अर्पित कर पूजा की जाती है। पूजा के पश्चात मंगला गौरी व्रत की कथा सुननी या पढ़नी चाहिए। नवविवाहिताएं इस दिन अपनी सास को वस्त्र, मिठाई और श्रृंगार सामग्री अर्पित कर उनका आशीर्वाद लेती हैं। पूजा के अंत में देवी की आरती की जाती है और प्रसाद बांटा जाता है।

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मां पार्वती के मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।
ॐ गौरीशंकराय नमः।

व्रत के नियम
मंगला गौरी व्रत के कुछ विशेष नियम होते हैं। व्रती को पूरे दिन संयम और पवित्रता के साथ उपवास रखना चाहिए। पूजा के बाद फलाहार किया जा सकता है, परंतु अन्न का सेवन वर्जित रहता है। व्रत के दिन कटु वचन, क्रोध और तामसिक प्रवृत्तियों से दूर रहना चाहिए। यह व्रत पांच या सोलह वर्षों तक निरंतर करना श्रेयस्कर माना गया है। अंतिम वर्ष में व्रत का उद्यापन करना आवश्यक होता है। यदि कोई स्त्री लगातार यह व्रत नहीं कर सकती तो केवल एक बार भी श्रद्धा और विधिपूर्वक यह व्रत करने से जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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