{"_id":"64520621c7491e3260067785","slug":"pradosh-vrat-2023-budh-pradosh-vrat-katha-in-hindi-2023-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budh Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत आज, सुख-समृद्धि के लिए प्रदोष काल में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Budh Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत आज, सुख-समृद्धि के लिए प्रदोष काल में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा
Wed, 03 May 2023 12:29 PM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Wed, 03 May 2023 12:29 PM IST
सार
Budh Pradosh Vrat Katha: आज यानी 3 मई 2023, बुधवार को वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत है। ये व्रत भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। इस दिन शिव जी के मां पार्वती की पूजा की जाती है।
विज्ञापन
प्रदोष व्रत आज, सुख-समृद्धि के लिए प्रदोष काल में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा
- फोटो : iStock
विस्तार
Budh Pradosh Vrat Katha: आज यानी 3 मई 2023, बुधवार को वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत है। ये व्रत भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। इस दिन शिव जी के मां पार्वती की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष उपासना करने से साधकों को लाभ मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि जिस व्यक्ति पर भोलेनाथ की कृपा होती है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है, इसलिए लोग शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करते हैं। वहीं यदि इस दिन प्रदोष काल में शिव जी की पूजा के दौरान प्रदोष व्रत की कथा पढ़ी जाए तो शिव जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
विज्ञापन
Chandra Grahan 2023: इन राशियों के लिए शुभ नहीं है साल का पहला चंद्र ग्रहण, हो जाएं सतर्क
विज्ञापन
पौराणिक कथा के अनुसार एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ। विवाह के 2 दिनों बाद उसकी पत्नी मायके चली गई। कुछ दिनों के बाद वह पुरुष पत्नी को लेने उसके घर गया। बुधवार को जब वह पत्नी के साथ लौटने लगा तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का प्रयत्न किया कि विदाई के लिए बुधवार शुभ नहीं होता, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी और पत्नी को लेकर चल पड़ा।
विज्ञापन
नगर के बाहर पहुंचने पर पत्नी को प्यास लगी। पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में चल पड़ा। पत्नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई। थोड़ी देर बाद पुरुष पानी लेकर वापस लौटा, तब उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी पी रही है। उसको क्रोध आ गया। वह निकट पहुंचा तो उसके आश्चर्य का कोई ठिकाना न रहा, क्योंकि उस आदमी की सूरत उसी की भांति थी। पत्नी भी सोच में पड़ गई। दोनों पुरुष झगड़ने लगे। भीड़ इकट्ठी हो गई। सिपाही आ गए। हमशक्ल आदमियों को देख वे भी आश्चर्य में पड़ गए।
Buddha Purnima 2023: बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर पढ़ें गौतम बुद्ध के अनमोल विचार
उन्होंने स्त्री से पूछा 'उसका पति कौन है?' लेकिन महिला दोनों पुरुषों की एक जैसी शक्ल होने की वजह से अपने पति को पहचान ही नहीं पाई। इसके बाद पुरुष ने भगवान शिव से प्रार्थना की, उसने शिव जी से कहा- 'हे भगवान! हमारी रक्षा करें। मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार को पत्नी को विदा करा लिया। मैं भविष्य में ऐसा कदापि नहीं करूंगा।' जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया। पति-पत्नी सकुशल अपने घर पहुंच गए। उस दिन के बाद से पति-पत्नी नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष का व्रत रखने लगे।