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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Pithori Amavasya 2025 23 August katha path on Bhadrapad Amavasya for blessings of amcesstors

Pithori Amavasya 2025: पिठोरी अमावस्या पर जरूर करें इस कथा का पाठ, संतान की होगी दीर्घायु

Sat, 23 Aug 2025 06:01 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 23 Aug 2025 06:01 AM IST
सार

Vrat Katha In Hindi: पिठोरी अमावस्या के दिन महिलाएं मां दुर्गा की आराधना करती हैं और आटे से 64 योगिनियों के प्रतीक रूप में पिंड बनाकर विधिवत पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती ह। 

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Pithori Amavasya 2025 23 August katha path on Bhadrapad Amavasya for blessings of amcesstors
पिठोरी अमावस्या व्रत कथा - फोटो : amarujala

विस्तार

Pithori Amavasya 2025 Katha:  हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। खासतौर पर भाद्रपद माह की अमावस्या को पिठोरी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह दिन माताओं द्वारा अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए व्रत रखने के लिए समर्पित होता है। वर्ष 2025 में यह व्रत 23 अगस्त, शनिवार को मनाया जा रहा है।

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पिठोरी अमावस्या के दिन महिलाएं मां दुर्गा की आराधना करती हैं और आटे से 64 योगिनियों के प्रतीक रूप में पिंड बनाकर विधिवत पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इस अवसर पर व्रत कथा सुनने और पूजा विधि का विशेष महत्व होता है।
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पिठोरी अमावस्या की कथा
पिठोरी अमावस्या से जुड़ी एक रोचक और पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में एक गांव में सात भाई रहते थे। उनकी पत्नियां हर साल श्रद्धा भाव से पिठोरी अमावस्या का व्रत करती थीं।

पहले वर्ष जब सबसे बड़े भाई की पत्नी ने यह व्रत रखा, तो उसके बेटे की मृत्यु हो गई। अगले साल फिर व्रत रखा गया, लेकिन फिर किसी न किसी बेटे की मौत हो जाती। ऐसा लगातार सात वर्षों तक होता रहा। सातवें साल जब फिर बेटे की मृत्यु हुई, तो दुखी मां ने उसका शव छुपा दिया और गांव की कुलदेवी मां पोलेरम्मा के पास गई।

मां पोलेरम्मा ने जब उसकी व्यथा सुनी तो उसे हल्दी लेकर उन स्थानों पर छिड़कने को कहा जहां उसके बेटों का अंतिम संस्कार हुआ था। महिला ने वैसा ही किया। जब वह घर लौटी तो देखा कि उसके सातों बेटे जीवित हो गए हैं। इस चमत्कार को देखकर गांव की सभी महिलाएं श्रद्धा से भर उठीं और तभी से संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए पिठोरी अमावस्या का व्रत करने की परंपरा शुरू हो गई।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।


 

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