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Navroz 2024: जानिए पारसी नववर्ष 'नवरोज' का इतिहास और महत्व
Tue, 19 Mar 2024 12:00 PM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Tue, 19 Mar 2024 12:00 PM IST
सार
Parsi New Year 2024: पारसी समुदाय के लोगों के लिए नवरोज का पर्व बहुत खास माना जाता है। हर साल लोग हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं। नवरोज दो पारसी शब्दों नव और रोज से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है- नया दिन।
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नवरोज 2024
- फोटो : iStock
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विस्तार
Parsi New Year 2024: पारसी समुदाय के लोगों के लिए नवरोज का पर्व बहुत खास माना जाता है। नवरोज से पारसी नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है। हर साल लोग हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं। नवरोज दो पारसी शब्दों नव और रोज से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है- नया दिन। इस दिन से ही ईरानी कैलेंडर की भी शुरुआत होती है। पारसी नववर्ष को पतेती, जमशेदी नवरोज, नौरोज और नवरोज जैसे कई नामों से जाना जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं नवरोज के इतिहास और परंपरा के बारे में...
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नवरोज का इतिहास
मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि पारसी समुदाय के लोग नवरोज का पर्व फारस के राजा जमशेद की याद में मनाते हैं। करीब तीन हजार साल पहले इसी दिन पारसी समुदाय के एक योद्धा जमशेद ने पारसी कैलेंडर की स्थापना की थी। वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार इसी दिन ईरान में जमदेश ने सिंहासन ग्रहण किया था। उस दिन को पारसी समुदाय में नवरोज कहा गया था। तब से आज तक लोग इस दिन को नए साल के रूप में मनाते हैं।
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इस तरह मनाते हैं यह पर्व
नवरोज के दिन पारसी लोग सुबह जल्दी उठकर तैयार हो जाते हैं। इस दिन खास पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें पारसी लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ बांटते हैं। इसके अलावा वो इस दिन एक-दूसरे के प्रति सहयोग और प्रेम व्यक्त करने के लिए आपस में उपहार भी बांटते हैं। घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। इस दिन पारसी मंदिर अगियारी में भी विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। लोग मंदिर में जाकर फल, चंदन, दूध और फूलों का चढ़ावा देते हैं। साथ ही उपासना स्थल पर चन्दन की लकड़ी अग्नि को समर्पित की जाती है।
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इस दिन घर की साफ-सफाई करके घर के बाहर रंगोली बनाई जाती है। साथ ही घर में चंदन की लकड़ियों के टुकड़े को रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि चंदन की लकड़ियों की सुगंध हर ओर फैलने से हवा शुद्ध होती है। साथ ही इस दिन पारसी मंदिर अगियारी में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। प्रार्थनाओं के दौरान पिछले साल लोगों ने जो कुछ भी पाया, उसके लिए ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। मंदिर में प्रार्थना समाप्त होने के बाद लोग एक-दूसरे को नववर्ष की बधाई देते हैं और जश्न मनाते हैं।
360 दिनों का ही होता है एक वर्ष
नवरोज का उत्सव पारसी समुदाय में पिछले तीन हजार साल से मनाया जाता रहा है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार एक साल में 365 दिन होते हैं, लेकिन पारसी समुदाय के लोग 360 दिनों का ही साल मानते हैं। बाकी पांच दिन गाथा के रूप में मनाए जाते हैं। इन पांच दिनों में सभी लोग मिलकर अपने पूर्वजों को याद करते हैं।