Parivartini Ekadashi 2022: परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा सुनने से मिलती है पापों से मुक्ति, जरूर करें इसका श्रवण
Parivartini Ekadashi Vrat Katha: परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा सुनने से भक्तों को जीवन भर विष्णु जी की कृपा मिलती रहती है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि देवी-देवताओं की पूजा के बाद कथा पढ़ने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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Parivartini Ekadashi Vrat Katha: पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी व्रत रखा जाता है। इस साल परिवर्तिनी एकादशी व्रत 06 अगस्त 2022 को है। परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी एकादशी, पद्म एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु निद्रासन में अपनी करवट बदलते हैं, इसलिए इसका नाम परिवर्तिनी एकादशी है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। साथ ही भक्तों को जीवन भर विष्णु जी की कृपा मिलती रहती है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि देवी-देवताओं की पूजा के बाद कथा पढ़ने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कथा सुने या पढ़े बिना व्रत पूरा नहीं माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी व्रत की कथा...
परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में बलि नामक एक असुर राजा था। असुर होने के बावजूद भी वह महादानी और भगवान श्री विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था।वैदिक विधियों के साथ वह भगवान का नित्य पूजन किया करता था। उसके द्वार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। कहा जाता है कि अपने वामनावतार में भगवान विष्णु ने राजा बलि की परीक्षा ली थी। राजा बलि ने तीनों लोकों पर अपना अधिकार कर लिया था लेकिन उसमें एक गुण यह था कि वह किसी भी ब्राह्मण को खाली हाथ नहीं भेजता था उसे दान अवश्य देता था।
दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने उसे भगवान विष्णु की लीला से अवगत भी करवाया, लेकिन फिर भी राजा बलि ने वामन स्वरूप भगवान विष्णु को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया। फिर क्या था दो पगों में ही भगवान विष्णु ने समस्त लोकों को नाप दिया तीसरे पग के लिये कुछ नहीं बचा तो बलि ने अपना वचन पूरा करते हुए अपना शीष उनके पग के नीचे कर दिया।
भगवान विष्णु की कृपा से बलि पाताल लोक में रहने लगा, लेकिन साथ ही उसने भगवान विष्णु को भी अपने यहां रहने के लिये वचनबद्ध कर लिया था। मान्यता है कि वामन अवतार की इस कथा को सुनने और पढ़ने वाला व्यक्ति तीनों लोकों में पूजित होता है।