29 सितंबर से शारदीय नवरात्रि, यहां जानें नवरात्रि की पूरी जानकारी
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शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 29 सिंतबर से होने जा रही है। नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति की उपासना का पर्व है। इस त्योहार का महत्व हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। नवरात्रि का पर्व नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में देवी शक्ति के नौ अलग-अलग रूप की पूजा-आराधना की जाती है।साल में पांच बार नवरात्र के पर्व आते हैं- चैत्र, आषाढ़, अश्विन, पौष और माघ माह के नवरात्रि। चैत्र और अश्विन शारदीय नवरात्रि को ही मुख्य माना गया है। जबकि आषाढ़, पौष और माघ के नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनायी जाती है। दरअसल जब शरद ऋतु का आगमन होता है तो इस कारण इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है।
शारदीय नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि में माँ दुर्गा के भक्त नौ दिनों तक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन यानि प्रतिपदा पर घरों में कलश स्थापित किया जाता है और पूरे नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है। नवरात्रि में ही भगवान राम ने रावण का वध करने से पहले देवी शक्ति की पूजा-आराधना की थी। जो बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूप
पहला दिन - माँ शैलपुत्री - नवरात्रि के पहले दिन देवी के शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है। नौ रूपों में से देवी का यह प्रथम रूप है। मां शैलपुत्री की पूजा में चंद्रमा का महत्व है। इनकी पूजा से चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त हो जाते हैं।
दूसरा दिन - माँ ब्रह्मचारिणी पूजा - नवरात्रि के दूसरे दिन देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा होती है। ज्योतिष के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी के इस स्वरूप की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
तीसरा दिन - माँ चंद्रघंटा पूजा - नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघण्टा देवी की आराधना होती है। देवी चंद्रघण्टा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इनकी पूजा से शुक्र ग्रह का अशुभ प्रभाव कम होता है।
चौथा दिन- माँ कूष्मांडा पूजा - चौथा दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा का दिन होता है।माँ कूष्माण्डा सूर्य का प्रतिनिधित्व करती हैं। नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा से कुंडली से सूर्य का अशुभ प्रभाव कम होता है।
पांचवा दिन - माँ स्कंदमाता पूजा - पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा होती है। यह देव बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं।
छठा दिन - माँ कात्यायनी पूजा - छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है। यह देवी बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करती हैं। पूजा से बृहस्पति के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
सातवां दिन - माँ कालरात्रि पूजा - देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं। पूजा से शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
आठवां दिन - माँ महागौरी पूजा - देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
नौवां दिन - माँ सिद्धिदात्री पूजा - देवी सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। पूजा से केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
Navratri 2019 Calendar: किसी तिथि पर किस देवी की होगी पूजा-आराधना
29 सितंबर 2019 - नवरात्रि का पहला दिन- घट/ कलश स्थापना - शैलपुत्री
30 सितंबर 2019 - नवरात्रि 2 दिन द्वितीया- ब्रह्मचारिणी पूजा
1 अक्टूबर 2019 - नवरात्रि का तीसरा दिन तृतीया तिथि - चंद्रघंटा पूजा
2 अक्टूबर 2019 - नवरात्रि का चौथा दिन चतुर्थी - कुष्मांडा पूजा
3 अक्टूबर 2019 - नवरात्रि का 5वां दिन पंचमी - स्कंदमाता पूजा
4 अक्टूबर 2019 - नवरात्रि का छठा दिन षष्ठी - कात्यायनी पूजा
5 अक्टूबर 2019 - नवरात्रि का सातवां दिन सप्तमी - कालरात्रि पूजा
6 अक्टूबर 2019 - नवरात्रि का आठवां दिन अष्टमी - महागौरी, दुर्गा अष्टमी
7 अक्टूबर 2019 - नवरात्रि का नौवां दिन नवमी - नवमी हवन, नवरात्रि पारण
8 अक्टूबर 2019- दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी