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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Nautapa Vishesh 2025 Know the Most Auspicious Surya Mantras and Benefits of Surya Chalisa

Nautapa Vishesh 2025: इन मंत्रों से करें सूर्य देव की आराधना, मिलेगी सफलता, सम्मान और समृद्धि

Sun, 25 May 2025 10:43 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 25 May 2025 10:43 AM IST
सार

Nautapa mein Kya Karna Chahiye: आज सूर्य देव ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया है, जिससे नौतपा की शुरुआत हो गई है। इस पवित्र अवधि में सूर्यदेव की अराधना और मंत्र जाप से विशेष कृपा और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

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Nautapa Vishesh 2025 Know the Most Auspicious Surya Mantras and Benefits of Surya Chalisa
nautapa 2025

विस्तार

Benefits of Nautapa: आज से नौतपा की शुरुआत हो चुकी है, जो हर वर्ष गर्मी के चरम समय में आता है। यह नौ दिन सूर्य देव के अधिकतम प्रभाव वाले माने जाते हैं, जब सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट होता है और उसकी तीव्र किरणें धरती को सीधे प्रभावित करती हैं। इसका असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वातावरण और मानव जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालता है। इस दौरान भीषण गर्मी पड़ती है, पर साथ ही यह समय ऊर्जा, तप और साधना का प्रतीक भी होता है।Weekly Horoscope (26 May To 01 June): इस सप्ताह इन पांच राशि वालों को मिलेगा भाग्य का साथ, पढ़ें दैनिक राशिफल
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हिंदू धर्म में नौतपा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इन नौ दिनों में सूर्य देव की आराधना, मंत्र जाप और ध्यान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्य देव को आत्मबल, सफलता और तेजस्विता का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस समय की गई साधना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। नौतपा न केवल प्रकृति की तीव्रता का अनुभव कराने वाला समय है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी उत्तम अवसर है। आइये जानते हैं इस दौरान भगवान सूर्य के किन मंत्रों का जाप करना चाहिए। 
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Nautapa Vishesh 2025 Know the Most Auspicious Surya Mantras and Benefits of Surya Chalisa
nautapa 2025 - फोटो : adobe stock
नौतपा में करें सूर्य देव के इन मंत्रों का जाप
  • ॐ आदित्याय नमः
  • ॐ सूर्याय नमः
  • ॐ रवये नमः
  • ॐ पूष्णे नमः
  • ॐ सविते नमः
  • ॐ प्रभाकराय नमः
  • ॐ मित्राय नमः
  • ॐ भानवे नमः
  • ॐ मार्तंडाय नमः

Nautapa Vishesh 2025 Know the Most Auspicious Surya Mantras and Benefits of Surya Chalisa
nautapa 2025 - फोटो : adobe stock

सूर्य चालीसा
॥ दोहा ॥


कनक बदन कुण्डल मकर,मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए,शंख चक्र के संग॥

॥ चौपाई ॥

जय सविता जय जयति दिवाकर!।सहस्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!।सविता हंस! सुनूर विभाकर॥

विवस्वान! आदित्य! विकर्तन।मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
अम्बरमणि! खग! रवि कहलाते।वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥

सहस्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि।मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
अरुण सदृश सारथी मनोहर।हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥

मंडल की महिमा अति न्यारी।तेज रूप केरी बलिहारी॥
उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते।देखि पुरन्दर लज्जित होते॥

मित्र मरीचि भानु अरुण भास्कर।सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
पूषा रवि आदित्य नाम लै।हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं।मस्तक बारह बार नवावैं॥
चार पदारथ जन सो पावै।दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥

नमस्कार को चमत्कार यह।विधि हरिहर को कृपासार यह॥
सेवै भानु तुमहिं मन लाई।अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥

बारह नाम उच्चारन करते।सहस जनम के पातक टरते॥
उपाख्यान जो करते तवजन।रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है।प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
अर्क शीश को रक्षा करते।रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत।कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
भानु नासिका वासकरहुनित।भास्कर करत सदा मुखको हित॥

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे।रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा।तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर।त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
युगल हाथ पर रक्षा कारन।भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥

बसत नाभि आदित्य मनोहर।कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
जंघा गोपति सविता बासा।गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥

विवस्वान पद की रखवारी।बाहर बसते नित तम हारी॥
सहस्रांशु सर्वांग सम्हारै।रक्षा कवच विचित्र विचारे॥

अस जोजन अपने मन माहीं।भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं॥
दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै।जोजन याको मन मंह जापै॥

अंधकार जग का जो हरता।नव प्रकाश से आनन्द भरता॥
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही।कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥

मंद सदृश सुत जग में जाके।धर्मराज सम अद्भुत बांके॥
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा।किया करत सुरमुनि नर सेवा॥

भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों।दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥
परम धन्य सों नर तनधारी।हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन।मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥
भानु उदय बैसाख गिनावै।ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥

यम भादों आश्विन हिमरेता।कातिक होत दिवाकर नेता॥
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं।पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं॥

॥ दोहा ॥
भानु चालीसा प्रेम युत,गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहि बिबिध,होंहिं सदा कृतकृत्य॥


                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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