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Nautapa 2025: आज नौतपा में क्या करें और क्या न करें, जानिए इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
Sun, 25 May 2025 07:22 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 25 May 2025 07:22 AM IST
सार
Nautapa 2025: इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से होगी, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। यह अवधि नौ दिनों तक चलेगी और इसका समापन 8 जून को होगा, जब सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। वैसे तो नौतपा के शुरुआती 9 दिन सबसे गरम होते हैं, लेकिन ये 15 दिन की अवधि होती है, जिसमें सबसे अधिक भीषण गर्मी पड़ती है।
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nautapa 2025: इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से होगी
- फोटो : adobe stock
विस्तार
Nautapa 2025: हर साल ज्येष्ठ महीने की शुरुआत में नौतपा शुरू होता है। इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से होगी, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। यह अवधि नौ दिनों तक चलेगी और इसका समापन 8 जून को होगा, जब सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। वैसे तो नौतपा के शुरुआती 9 दिन सबसे गरम होते हैं, लेकिन ये 15 दिन की अवधि होती है, जिसमें सबसे अधिक भीषण गर्मी पड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये नक्षत्र 15 दिन तक रहता है। पर शुरू के 9 दिन नौतपा कहलाते हैं। इन दिनों में तापमान बहुत ज्यादा होता है।नौतपा न केवल प्रकृति के ताप का संकेत है, बल्कि यह शरीर, मन और पर्यावरण को शुद्ध करने का काल भी माना गया है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस समय की गई तपस्या, सेवा और दान अत्यंत फलदायी होते हैं।
पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार नौतपा का संबंध भगवान सूर्य से है। इन दिनों में सूर्य की किरणें अत्यंत प्रखर होती हैं और यह काल रोगों, ताप और अग्नि तत्व को प्रभावित करता है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान जल का अधिक वाष्पीकरण होता है, जो आगे चलकर मानसून की वर्षा में सहायक बनता है। स्कंद पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे ग्रंथों में सूर्योपासना को अत्यंत फलदायी बताया गया है। कई लोग इसे प्राकृतिक तपस्या का समय मानते हैं जब सूर्य देव स्वयं प्रकृति को शुद्ध करते हैं।
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सूर्य देव की पूजा करें- रोज़ प्रातः स्नान कर तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, चावल, रोली डालकर सूर्य को अर्घ्य दें और "ॐ घृणि सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें।
शीतल जल और फलाहार लें- बेल का शरबत, सत्तू, आम का पना, नींबू पानी और ठंडी छाछ का सेवन शरीर को ठंडक देता है।
शरीर को ढककर रखें- हल्के सूती और सफेद रंग के कपड़े पहनें जिससे शरीर सूर्य की तपन से सुरक्षित रहे।
धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें- विशेष रूप से "आदित्य हृदय स्तोत्र", "सूर्य चालीसा" और "गायत्री मंत्र" का पाठ करें।
जरूरतमंदों को जल और छाया प्रदान करें- इस काल में प्याऊ लगवाना, पक्षियों के लिए पानी रखना, वृक्षों की सेवा करना पुण्यदायक माना गया है।
नौतपा में क्या न करें
धूप में अधिक समय न बिताएं- इस समय तेज गर्मी से लू लगने का खतरा रहता है। दोपहर १२ से ३ बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
तीखा, तला-भुना भोजन न करें- इस काल में अग्नि तत्व अधिक सक्रिय रहता है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है।
गुस्से और वाद-विवाद से बचें- शास्त्रों में बताया गया है कि गर्मियों में मानसिक संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
खाली पेट बाहर न निकलें- खाली पेट निकलने पर लू का खतरा अधिक रहता है। घर से निकलते समय थोड़ा पानी या फल जरूर लें।
वृक्षों की कटाई न करें- गर्मी में वृक्ष जीवनदायिनी छाया प्रदान करते हैं, अतः इनका संरक्षण करना विशेष रूप से आवश्यक है।
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पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार नौतपा का संबंध भगवान सूर्य से है। इन दिनों में सूर्य की किरणें अत्यंत प्रखर होती हैं और यह काल रोगों, ताप और अग्नि तत्व को प्रभावित करता है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान जल का अधिक वाष्पीकरण होता है, जो आगे चलकर मानसून की वर्षा में सहायक बनता है। स्कंद पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे ग्रंथों में सूर्योपासना को अत्यंत फलदायी बताया गया है। कई लोग इसे प्राकृतिक तपस्या का समय मानते हैं जब सूर्य देव स्वयं प्रकृति को शुद्ध करते हैं।
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नौतपा में क्या करें ?
सूर्य देव की पूजा करें- रोज़ प्रातः स्नान कर तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, चावल, रोली डालकर सूर्य को अर्घ्य दें और "ॐ घृणि सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें।
शीतल जल और फलाहार लें- बेल का शरबत, सत्तू, आम का पना, नींबू पानी और ठंडी छाछ का सेवन शरीर को ठंडक देता है।
शरीर को ढककर रखें- हल्के सूती और सफेद रंग के कपड़े पहनें जिससे शरीर सूर्य की तपन से सुरक्षित रहे।
धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें- विशेष रूप से "आदित्य हृदय स्तोत्र", "सूर्य चालीसा" और "गायत्री मंत्र" का पाठ करें।
जरूरतमंदों को जल और छाया प्रदान करें- इस काल में प्याऊ लगवाना, पक्षियों के लिए पानी रखना, वृक्षों की सेवा करना पुण्यदायक माना गया है।
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नौतपा में क्या न करें
धूप में अधिक समय न बिताएं- इस समय तेज गर्मी से लू लगने का खतरा रहता है। दोपहर १२ से ३ बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
तीखा, तला-भुना भोजन न करें- इस काल में अग्नि तत्व अधिक सक्रिय रहता है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है।
गुस्से और वाद-विवाद से बचें- शास्त्रों में बताया गया है कि गर्मियों में मानसिक संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
खाली पेट बाहर न निकलें- खाली पेट निकलने पर लू का खतरा अधिक रहता है। घर से निकलते समय थोड़ा पानी या फल जरूर लें।
वृक्षों की कटाई न करें- गर्मी में वृक्ष जीवनदायिनी छाया प्रदान करते हैं, अतः इनका संरक्षण करना विशेष रूप से आवश्यक है।