{"_id":"64636f5b321298ee4d055a99","slug":"nautapa-2023-kab-hai-start-date-know-astrological-significance-in-hindi-2023-05-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nautapa 2023: 22 मई से नौतपा की होगी शुरुआत, जानिए इसका महत्व","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Nautapa 2023: 22 मई से नौतपा की होगी शुरुआत, जानिए इसका महत्व
Wed, 17 May 2023 06:57 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 17 May 2023 06:57 AM IST
सार
नौतपा के दौरान सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है। नौतपा तब सूर्य होता है जब सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों तक रहते हैं। इस कारण से नौतपा कहा जाता है।
विज्ञापन
Nautapa 2023 : नौतपा के मध्य आगजनी की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं किन्तु पृथ्वी पर जन-जीवन के लिए हानिकारक विषाणुओं का शमन होने लगता है।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
Nautapa 2023: देशभर के कई इलाकों में इस समय भयंकर गर्मी का मौसम जारी है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष ज्येष्ठ माह के दौरान नौतपा आरंभ हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा का मतलब नौ दिनों तक भयंकर गर्मी से होता है। नौतपा की शुरुआत तब होती है जब इस पृथ्वी पर प्रत्यक्ष देवता माने जाने वाले सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हुए कुल 15 दिनों तक की यात्रा पर रहते हैं। इन 15 दिनों के शुरुआत नौ दिनों तक सबसे ज्यादा गर्मी होती है। दरअसल जब सूर्यदेव ज्येष्ठ माह में रोहिणी नक्षत्र में होते हैं तब सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती है जिस कारण से प्रचंड गर्मी पड़ती है। आइए जानते हैं नौतपा का ज्योतिषीय महत्व।
विज्ञापन
नौतपा क्या होता है
नौतपा 9 दिनों तक चलने वाला एक प्राकृतिक घटनाक्रम होता है। नौतपा के दौरान सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है। नौतपा तब सूर्य होता है जब सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों तक रहते हैं। इस कारण से नौतपा कहा जाता है। सूर्य बृषभ राशि में प्रवेश के साथ ही ग्रीष्मऋतु की युवावस्था आरम्भ हो चुकी है और इसी दिन से गर्मी का चरम 'नौतपा' भी आरम्भ हो जायेगा। नौतपा के मध्य आगजनी की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं किन्तु पृथ्वी पर जन-जीवन के लिए हानिकारक विषाणुओं का शमन होने लगता है। शास्त्र कहते हैं कि केवल सूर्य की ही आराधना से ही मनुष्य की जन्मकुंडली में विराजमान सभी ग्रहदोषों से मुक्ति मिलती है। प्रत्यक्ष देवता सूर्य और चन्द्र में दोनों में ही पूर्व के जन्मों के पाप शमन करने शक्ति रहती है। 'पूर्व जन्म कृतं पापं व्याधि रूपेण जायते' अर्थात पूर्व के जन्मों में किया गया पाप रोग के रूप में उत्पन्न होता है। इन्हें अर्घ्य देकर और प्रणाम करके ही प्राणी भवसागर से मुक्त हो जाता है।
विज्ञापन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल सूर्यदेव 22 मई को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ नौ दिनों तक नौतपा की शुरुआत हो जाएगी। सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 5 जून तक रहेंगे। इसी के साथ नौतपा खत्म हो जाएगा।
विज्ञापन
Shani Sade Sati: इन राशियों पर चल रही है शनि की साढ़ेसाती, रहना होगा आपको सतर्क
Guru Chandal Yog: कालसर्प दोष से भी ज्यादा विनाशकारी है चांडाल दोष, जानें इस योग के संकेत और उपाय