Mata Lakshmi: धन की देवी मां लक्ष्मी को अर्पित करें ये चीजें, मिलेगा मनचाहा वरदान
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Mata Lakshmi: हिंदू धर्म में रोजाना मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। देवी की पूजा के लिए शास्त्रों में कई नियमों का उल्लेख है, जिनका पालन करने पर पूजा का संपूर्ण फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से परिवार में खुशियों का वास होता है। साथ ही धन आगमन के योग बनते हैं। कई बार व्यापार, नौकरी या धन से जुड़ी समस्याएं बार-बार आने लगती हैं। इन समस्याओं के चलते व्यक्ति मानसिक तनाव का सामना करता है। ऐसे में मां लक्ष्मी का व्रत और उपाय करने की सलाह दी जाती है।
मान्यता है कि इन उपायों को करने पर समस्त परेशानियों का निवारण होता है। वहीं कुछ लोग मां देवी की विशेष कृपा पाने के लिए उनकी पसंदीदा चीजों को अर्पित करते हैं। अगर आप भी लक्ष्मी जी को उनकी पसंद की चीजों को अर्पित करना चाहते हैं, तो आइए इस लेख के माध्यम से उनके बारे में जान लेते हैं।
इन चीजों से प्रसन्न हो सकती हैं लक्ष्मी जी
किसी भी मांगलिक कार्यक्रम में नारियल को जरूर शामिल किया जाता है। इसे बहुत शुभ माना जाता है। बता दें ये माता रानी का प्रिय फल है। ऐसे में इसे अर्पित करने पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। साथ ही धन धान्य में भी वृद्धि होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी को लाल फूल बहुत पसंद है। इसे अर्पित करने पर धन संबंधी परेशानियों का निवारण होने लगता है। वहीं धन की देवी मां लक्ष्मी को आप मखाने का भोग लगा सकते है। मान्यता है कि ये मां देवी का प्रिय भोग है। इसके अलावा आप मिश्री और बताशे भी चढ़ा सकते हैं।
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का रूप माना गया है। आप इसकी पूजा करते हुए इसे घर के पवित्र स्थान पर रख दें, ऐसा करने मां लक्ष्मी का वास घर में बना रहता है। माना जाता है कि मां लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद पाने के लिए काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए। इससे परिवार में भी बरकत होती है और रूक हुए कार्यों को गति मिलती है।
मां लक्ष्मी की आरती
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता।
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का मंत्र
ऊँ महालक्ष्म्यै नमो नमः । ऊँ विष्णुप्रियायै नमो नमः ।।
ऊँ धनप्रदायै नमो नमः । ऊँ विश्वजन्नयै नमो नमः ।।
लक्ष्मी जी का बीज मंत्र
ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:।।
श्री लक्ष्मी महामंत्र
ऊँ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।