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Mahavir Jayanti 2021: महावीर जयंती आज, जीवन को सुखद बनाते हैं भगवान महावीर के पांच संदेश

Sun, 25 Apr 2021 09:00 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 25 Apr 2021 09:00 AM IST
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mahavir jayanti 2021 birth anniversary of lord mahavir and significance
हैप्पी महावीर जयंती 2021 - फोटो : अमर उजाला

जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म उत्सव आज (25 अप्रैल) मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को बड़ी धूमधाम से महावीर जयंती का पर्व मनाया जाता है। भगवान महावीर जैन धर्म के 24 वें व अंतिम तीर्थंकर थे। जैन धर्म में तीर्थंकर का अभिप्राय उन 24 दिव्य महापुरुषों से है जिन्होंने अपनी तपस्या से आत्मज्ञान को प्राप्त किया एवं जिन्होंने अपनी इंद्रियों और भावनाओं पर पूरी तरह से विजय प्राप्त की। इस दौरान भगवान महावीर ने दिगंबर स्वीकार कर लिया, दिगंबर मुनि आकाश को ही अपना वस्त्र मानते हैं इसलिए वस्त्र धारण नहीं करते हैं।



करीब 600 वर्ष पहले कुण्डलपुर में क्षत्रिय वंश में पिता सिद्दार्थ और माता त्रिशला के यहां चैत्र शुक्ल तेरस को वर्धमान का जन्म हुआ। वर्धमान को महावीर के अलावा वीर,अतिवीर और सन्मति भी कहा जाता है । भगवान महावीर के प्रारम्भिक तीस वर्ष राजसी वैभव एवं विलास के दलदल में कमल के समान रहे। उसके बाद बारह वर्ष घनघोर जंगल में मंगल साधना और आत्म जागृती की आराधना में वे इतने लीन हो गए कि उनके शरीर के कपड़े गिरकर अलग होते गए। भगवान महावीर की बारह वर्ष की मौन तपस्या के बाद उन्हें 'केवलज्ञान ' प्राप्त हुआ। भगवान महावीर ने पूरे समाज को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया। जैन धर्म का समुदाय इस पर्व को बड़े उल्लास से एक उत्सव की तरह मनाते हैं।
 

mahavir jayanti 2021 birth anniversary of lord mahavir and significance
हैप्पी महावीर जयंती - फोटो : अमर उजाला
भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत बताए जो आज भी समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं। सैकड़ों वर्ष पूर्व भगवान महावीर ने विश्व को अहिंसा, जीव दया सहित मानव हित के कई संदेश दिए। आज पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी जूझ रहा है, हजारों की संख्या में लोग मर रहे है। ये सब प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ का ही तो नतीजा है या यूँ कहें कि हिंसा का प्रतिफल ही कोरोना महामारी है। वर्तमान समय में हमें अहिंसा और जीवों पर दया व महावीर के सिद्धांत ही ऐसी आपदाओं से पार पाने का मार्ग बताते हैं। इस महामारी के दौर में भगवान महावीर के ये पांच सूत्र आपके बहुत काम आ सकते हैं। 
mahavir jayanti 2021 birth anniversary of lord mahavir and significance
हैप्पी महावीर जयंती - फोटो : अमर उजाला

महावीर स्वामी अहिंसा के पुजारी थे उनका मानना था कि इस सृष्टि में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रिय वाले जीव) आदि की हिंसा नहीं करनी चाहिए। उन्हें अपने रास्ते पर जाने से नहीं रोकना चाहिए। उन सब के प्रति समानता व प्रेम का भाव रखना चाहिए, साथ ही उनकी रक्षा करनी चाहिए। इस दौर में अहिंसा के व्रत का पालन किए जाने की सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि कोरोना वायरस जैसी महामारी भी एक हद तक प्रकृति और जानवरों के साथ की गई हिंसा का ही परिणाम है।

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हैप्पी महावीर जयंती 2021 - फोटो : अमर उजाला
भगवान महावीर का दूसरा सिद्धांत है सत्य- इसके बारे में उनका कहना है कि मनुष्य को सत्य का मार्ग जरूर अपनाना चाहिए किसी भी स्थिति में झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। सत्य के संबंध में कहा कि जो बुद्धिमान मनुष्य सत्य की ही आज्ञा में रहता है वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।भारत में इतना ज्यादा कोरोना फैलने का एक बहुत बड़ा कारण झूठ भी है क्योंकि बहुत लोग संक्रमित होने के बावजूद भी इस बात को सबसे छिपाकर रखते हैं और आज नतीजा यह है कि इस महामारी से पूरा देश त्राहि-त्राहि कर रहा है।इसलिए भगवान महावीर के सदेशों से प्रेरणा लेते हुए आपको सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए क्यों कि इसी में आपकी,आपके परिवार और देश की भलाई है।  
 
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हैप्पी महावीर जयंती - फोटो : अमर उजाला

भगवान महावीर का तीसरा सिद्धांत है अपरिग्रह। अपरिग्रह के बारे में उनका कहना है कि जो मनुष्य निर्जीव चीजों या आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह करता है अथवा वह दूसरों से ऐसा संग्रह करवाता है या दूसरों को ऐसा संग्रह करने की सलाह देता है। ऐसे व्यक्ति को दुखों से कभी भी छुटकारा नहीं मिल सकता है।जगत के कल्याण हेतु भगवान महावीर ने ये संदेश अपरिग्रह के माध्यम से दुनिया को देना चाहा। सुखी और शांति भरा जीवन जीने के लिए जितना आपको जरूरत है उतना ही संचय कीजिए।

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