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Adipurush: हनुमान जी भक्त है या भगवान? जानिए यहां

Tue, 20 Jun 2023 06:16 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 20 Jun 2023 06:16 PM IST
सार

पौराणिक कथाओं के आधार पर कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु राम अवतार लेकर पृथ्वीलोक पर असुरों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर आए तब भोलेनाथ चिंतित हो गए और इसीलिए वे स्वयं भी हनुमान का अवतार लेकर उनकी सहायता के लिए धरती पर आ गए।

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Lord hanuman adipurush controvesy manoj muntashir statement hanuman ji bhakt hain ya bhagwan
Hanuman ji Bhakt ya Bhagwan: - फोटो : iStock

विस्तार

Hanuman ji Bhakt ya Bhagwan: आदिपुरुष फिल्म जबसे पर्दे पर आई है तबसे वो विवादों के घेरे में बनी हुई है कभी संवादों को लेकर तो कभी फिल्म के लेखक मनोज मुंतशिर द्वारा हनुमान जी पर दिए गए बयान को लेकर आम जनता इसका खासा विरोध कर रही है। मनोज ने हनुमान जी को लेकर बयान दिया है कि "हनुमान जी भगवान नहीं भक्त हैं,उन्हें भगवान हमने बनाया।" इन विवादों से परे आइए जानते हैं हनुमान जी वास्तव में भक्त हैं या भगवान।  इससे जुड़ी दो पौराणिक कथाएं हैं जो इस विषय को कुछ हद तक स्पष्ट कर सकती हैं। 

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Lord hanuman adipurush controvesy manoj muntashir statement hanuman ji bhakt hain ya bhagwan
Hanuman ji Bhakt ya Bhagwan: - फोटो : istock

तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा में एक चौपाई में उल्लेख है -"भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे" अर्थात राम जी के सभी काम को हनुमान जी बनाते हैं। और यही कारण है कि भगवान राम की सहायता के लिए ही हनुमान जी का जन्म 11वें रुद्रवतार के रूप में हुआ। हनुमान जी शिव के 11वें अवतार यानी रुद्रवतार माने जाते हैं और भगवान राम विष्णुजी के 7वें अवतार हैं। पौराणिक कथाओं के आधार पर कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु राम अवतार लेकर पृथ्वीलोक पर असुरों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर आए तब भोलेनाथ चिंतित हो गए और इसीलिए वे स्वयं भी हनुमान का अवतार लेकर उनकी सहायता के लिए धरती पर आ गए। इसलिए देखा जाए तो भगवान शिव ने अपने आराध्य विष्णु की रक्षा के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया और वो हनुमान जी के रूप में वो भगवान से राम भक्त बन गए। 

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Lord hanuman adipurush controvesy manoj muntashir statement hanuman ji bhakt hain ya bhagwan
Hanuman ji Bhakt ya Bhagwan: - फोटो : istock

दूसरी कथा के अनुसार माता सीता ने हनुमान जी को अजर अमर होने का वरदान दिया था। जब श्रीराम ने देह त्यागने की घोषणा की तो राहनुमान जी बड़े व्यथित हो गए और माता सीता के समक्ष आकर उनसे अपना वरदान वापस लेने का आग्रह किया। हनुमान जी कि व्यथा देखकर माता सीता ने श्रीराम का ध्यान किया। श्रीराम ने जब इस अवस्था में हनुमान जी को देखा तो उन्हें गले लगाते हुए कहा, ‘ धरती पर आनेवाला कोई भी जीव या प्राणी, चाहे वह संत हो या देवता कोई भी अमर नहीं है। लेकिन हनुमान तुम्हें ये वरदान है कि जब धरती पर कोई नहीं होगा तो रामभक्तों का बेड़ा तुमको ही पार लगाना है। जब धरती पर किसी भी देवता का अवतार नहीं होगा, और पाप बढ़ेगा तब राम के भक्तों का उद्धार मेरा हनुमान ही तो करेगा। इसलिए तुमको अमरता का वरदान दिलवाया गया है हनुमान।’
उपरोक्त कथा के अनुसार श्री राम ने जब हनुमान जी को अमरता का वरदान दिलवाया तभी से रामभक्त हनुमान भगवान हो गए।  हालांकि हनुमान जी हमेशा से ही रामभक्त कहलाएं हैं और इसलिए वो स्वयं रामभक्त हैं और अन्य रामभक्तों के लिए उनका उद्धार करने वाले भगवान।

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