Lord Krishna Janmashtami: भगवतगीता के चमत्कारी मंत्र, जानिए भगवतगीता पढ़ने के फायदे
Shri Krishna Janmashtami 2022: गीता का अध्ययन कने वाला व्यक्ति धीरे धीरे कामवासना,क्रोध,लालच और मोह माया के बंधनों से मुक्त हो जाता है। ऐसे बंधन उसे और उसके जीवन में कभी रुकावट नहीं बन पाते।
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वैदिक सनातन धर्म में भगवतगीता का विशेष स्थान है। महाभारत के युद्ध के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सखा अर्जुन को धर्म की रक्षा, कर्म का पाठ और दिव्य ज्ञान का बोध करने के लिए गीता का उपदेश दिया था। गीता महज एक किताब ही नहीं है,बल्कि यह साक्षात दिव्य प्रतिमूर्ति है। इसके नियमित अध्ययन और इसके संदेशों के अनुशरण से आदमी के जीवन में आमूल चूल परिवर्तन आता है। गीता हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र धर्मग्रंथ है। गीता का ज्ञान भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में अर्जुन को दिया था। गीता का संदेश भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकला हुआ अमृत समान शब्द है। मनुष्य को कर्म का रास्ता और दिव्य ज्ञान का बोध दिलाने के लिए गीता का पाठ भगवान कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के दौरान अपने सखा अर्जुन को दिया था। ताकि मनुष्य माया, मोह, लोभ और छल के बंधनों से मुक्त होकर संमार्ग मिलता है।यही वजह है कि आज के वैज्ञानिक युग में भी अदालतों में कसम गीता की ही खिलाई जाती है। आइए जानते हैं भगवतगीता पाठ करने के क्या-क्या होते हैं फायदे।
मन को शांति मिलती है
जो व्यक्ति नियमित गीता पढता है, उसका मन शांत बना रहता है। वह विपरीत परिस्थिति में भी अपने मन वह वचनों पर नियंत्रण पा लेता है।
काम क्रोध लोभ मोह दूर होता है
गीता का अध्ययन कने वाला व्यक्ति धीरे धीरे कामवासना,क्रोध,लालच और मोह माया के बंधनों से मुक्त हो जाता है। ऐसे बंधन उसे और उसके जीवन में कभी रुकावट नहीं बन पाते।
मन नियंत्रण में रहता है
गीता पढ़ने वाला व्यक्ति पूर्ण रूप से अपने मन में नियंत्रण पा लेता है। वह जैसे चाहे अपने मन को कार्य में ले सकता है।
सच और झूठ का ज्ञान होता है
गीता पढ़ने वाले व्यक्ति को सच और झूठ, ईश्वर और जीव का ज्ञान हो जाता है। उसे अच्छे और बुरे की समझ आ जाती है।
आत्मबल बढ़ता है
गीता पढ़ने से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है और व्यक्ति साहसी और निडर बनकर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता है।
सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है
रोजाना गीता पढ़ने से शरीर और दिमाग में सकारात्मक ऊर्जा विकसित होती है। ऐसे व्यक्ति को भूत पिशाच आदि का भय नहीं रहता।