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जानें सुबह उठते ही क्यों करनी चाहिए भूमि वंदना और क्या हैं इसके फायदे?
Wed, 19 Jun 2019 08:17 AM IST
Madhukar Mishra
अनीता जैन, वास्तुविद्
अनीता जैन, वास्तुविद्
Published by: Madhukar Mishra
Updated Wed, 19 Jun 2019 08:17 AM IST
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भूमि वंदना
- फोटो : Rohit Jha
शास्त्रों में पृथ्वी की वंदना, मां कहकर की गई है, अतः यह आदरणीय हैं। हमारी सनातन संस्कृति में सुबह उठते ही धरती को दाएं हाथ से स्पर्श कर हथेली को माथे से लगाने की परंपरा है। हमारे ऋषि-मुनियों ने इस रीति को विधान बनाकर धार्मिक रूप इसलिए दिया ताकि हम धरती माता के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट कर सकें, उन्हें सम्मान दे सकें। हमारा शरीर भी भूमि तत्वों से बना है। धरती हमारे लिए मातृ स्वरूपा है। जो भी हम इसमें बोते हैं, उसे ही पल्लवित-पोषित करके हमें पुनः दे देती है। अन्न, जल, औषधियां, फल-फूल, वस्त्र एवं आश्रय आदि सब धरती की ही तो देन हैं। इसलिए हम सब धरती माता के ऋणी हैं।
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इस मंत्र से प्रतिदिन करें क्षमा प्रार्थना
माता के समान पूज्यनीय होने से भूमि पर पैर रखना भी दोष का कारण माना गया है। पर भूमि स्पर्श से तो कोई अछूता नहीं रह सकता। यही कारण है कि शास्त्रों में उस पर पैर रखने की विवशता के लिए एक विशेष मंत्र के द्वारा क्षमा प्रार्थना ज़रूरी मानी गई है।
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समुद्र-वसने देवि, पर्वत-स्तन-मंडिते ।
विष्णु-पत्नि नमस्तुभ्यं, पाद-स्पर्शं क्षमस्व मे ॥
अर्थात् समुद्र रुपी वस्त्र धारण करने वाली पर्वत रुपी स्तनों से मंडित भगवान विष्णु की पत्नी हे माता पृथ्वी! आप मुझे पाद स्पर्श के लिए क्षमा करें।
जानें कब-कब और क्यों की जाती है धरती माता की पूजा —
— स्टेज पर कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करने से पूर्व धरती को छूकर प्रणाम करते हैं। मंदिर में प्रवेश करने से पहले भी धरती को छूकर आर्शीवाद लिया जाता है। कहीं-कहीं तो आज भी बच्चे को नया वस्त्र पहनाने से पहले कपड़े को धरती से स्पर्श करवाया जाता है। यह सब धरती मां की मानसिक पूजा का ही एक रूप है।
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— कोई भी पूजा-अनुष्ठान आरम्भ करने से पहले उस जगह को धोकर, जल छिड़क कर, मांडना बनाकर मूर्ति, कलश,दीपक या पूजा की थाली रखी जाती है।
— मकान-दुकान आदि के निर्माण कार्य में सर्वप्रथम भूमि पूजन ही किया जाता है। विशेष मन्त्रों के द्वारा माँ भूमि से प्रार्थना की जाती है कि हे माँ! हम आपके ऊपर भार डाल रहें हैं, उसके लिए आप हमें क्षमा करें। नींव में भी चांदी का सर्प रखा जाता है। ऎसी मान्यता है कि हमारी पृथ्वी सर्प के फन पर टिकी हुई है।
— किसानों के द्वारा उत्तम फसल की प्राप्ति के लिए फसल बोने से पूर्व धरती पूजन किया जाता है।
— नए घर में प्रवेश करने से पूर्व देहरी की पूजा अवश्य की जाती है। विवाह के समय भी नई बहू के द्वारा रोली, चावल, फल-मिठाई आदि से देहली की पूजा करवाई जाती है।
— पुराने समय में घरों में गृहिणी सुबह उठते ही घर, मुख्य द्वार को झाड़-बुहार कर जल से धोकर चौक पूरती थीं। कहीं-कहीं तो आज भी हमारे बड़े-बुज़ुर्ग घर से बाहर जाते वक्त बड़ी ही श्रद्धा से धरती को स्पर्श कर प्रणाम करते हैं।
— वास्तव में भूमि वन्दना के पीछे यदि वैज्ञानिक कारण की ओर दृष्टि डाली जाए तो अनेक शोध बताते हैं कि जब हम कोई कम्बल या चादर ओढ़कर सोते हैं, तो हमारे शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है, ऐसे में बिस्तर से नीचे एकदम पैर रख देने से शरीर में गर्मी-सर्दी का प्रवाह हो जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
— व्यवहारिक दृष्टि से भूमि वंदना इंसान को ज़मीन से जुड़े रहकर अहंकार से परे हटाकर सहनशील, धैर्यवान और क्षमाशील जीवन जीने का सन्देश देती है।
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